कहानी के पहले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे मेरी नज़र सेक्सी अनार पर पड़ी और मैं उसको अपनी अनारकली बनाने की सोचने लगा। अब आगे_
वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगी।
"मैंने सुना है तुम्हारी शादी हो रही है?"- मैंने पूछा।
"शादी नहीं साहब गौना हो रहा है।"
“हाँ हाँ वही ! पर तुम तो अभी बहुत छोटी हो। इतनी कम उम्र में ??”
“छोटी कहाँ हूँ ! पूरी १८ की हो गई हूँ। और फ़िर गरीब की बेटी तो घरवालों, रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों, शोहदों की नज़र में तो १०-१२ साल की भी जवान हो जाती है। हर कोई उसे लूटने खसोटने के चक्कर में रहता है।”
अनारकली ने माहौल ही संज़ीदा (गम्भीर) बना दिया। मैंने बात को अपने मतलब की ओर मोड़ते हुए कहा,“ चलो वो तो ठीक है पर तुम तो जानती हो मैं .... मेरा मतलब है मधु .... हम सभी तुम्हें कितना प्प्यऽऽ ..... चाहते हैं, तुम हम से दूर चली जाओगी” मैं हकलाता हुआ सा बोला और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसने हाथ छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की।
मेरा जी तो कर रहा था कि कह दूँ कि मैं भी तुम्हें चोदने के चक्कर में ही तो लगा हूं, पर कह नहीं पाया।
“हाँ साहब ! मैं जानती हूँ। आप और मधु दीदी तो मुझे बहुत चाहते हो, दीदी तो मुझे छोटी बहन की तरह मानती हैं। दुःख तो मुझे भी है पर ससुराल तो एक दिन जाना ही पड़ता है ना ! क्यों ! मैं गलत तो नहीं कह रही ?”
“ ” मैं चुप रहा।
अनारकली फ़िर बोली,“साहब आप उदास क्यों होते हो ! आपको कोई और नौकरानी मिल जाएगी।”
“पर तुम्हारे जैसी कहाँ मिलेगी !”
“क्यों ऐसा क्या है मुझ में ?”
“अरे मेरी रानी तुम नहीं जानती तुम कितनी सुन्दर हो .... म्म.... मेरा मतलब है तुम हर काम कितने सुन्दर ढंग से करती हो।”
“काम का तो ठीक है पर इतनी सुन्दर कहाँ हूँ?”
“हीरे को अपनी कीमत का पता नहीं होता, कभी मेरे जैसे ज़ोहरी की नज़रों से भी तो देखो ?”
“साहब इतने सपने ना दिखाओ कि मैं उनके टूटने का गम बर्दाश्त ही ना कर पाऊँ !”
“देखो अनारकली मैं सच कहता हूँ, तुम्हारे जाने के बाद मेरा मन बहुत उदास हो जाएगा।”
“मैं जानती हूँ साहब” अनारकली ने अपनी पलकें बंद कर ली।
लोहा गरम हो गया था, जाल बिछ गया था, अब तो बस शिकार फ़ंसने ही वाला था। मैं जबरदस्त ऐक्टिंग करते हुए बोला, “ अनार मुझे लगता है हमारा पिछले जन्म का जरूर कोई रिश्ता है। कहीं तुम पिछले जन्म में अनारकली या मधुबाला तो नहीं थी ?” मैंने पासा फ़ेंका।
मैं आगे बोलने जा ही रहा था कि " और मैं शहज़ादा सलीम " पर मेरे ये शब्द होंठों में ही रह गए।
अनारकली बोली,“मुझे क्या मालूम बाबूजी, आप तो मुझे सपने ही दिखा रहे हैं” अनारकली की आँखें अब भी बंद थी वो कुछ सोच रही थी।
“मैं तुम्हें कोई सपना नहीं दिखा रहा बिल्कुल सच कहता हूँ मैं तुम्हें इन दो महीनो में ही कितना चाहने लगा हूँ अगर मेरी शादी नहीं हुई होती तो मैं तुम्हें ही अपनी दुल्हन बना लेता !”
“साहब मैं तो अब भी आपकी ही हूँ !”
मेरा दिल उछलने लगा। मछली फंस गई। मेरा लंड तो इस समय कुतुब मीनार बना हुआ था। एक दम १२० डिग्री पर अगर हाथ भी लगाओ तो टन्न की आवाज आए।
मैंने उसे अपनी बाहों में भर लेना चाहा पर कुछ सोच कर केवल उसकी ठुड्डी को थोड़ा सा उठाया और अपने होंठ उसकी और बढाए ही थे कि उसने अपनी आँखें खोली और मुझे अपनी ओर बढ़ते हुए देख कर अचानक उठ खड़ी हुई। मेरा दिल धक् से रह गया कहीं मछली फिसल तो नहीं जा रही।
“नहीं मेरे शहजादे इतनी जल्दी नहीं। तुम्हारे लिए हो सकता है ये खेल हो या टाइम पास का मसाला हो पर मेरे लिए तो जिन्दगी का अनमोल पल होगा। मैं इतनी जल्दबाजी में और इस तरीके से नहीं गुजारना पसंद करुँगी ”
“प्लीज़ एक बार मेरी अनारकली बस एक बार !” मैं गिड़गिड़ाया। मैं तो अपनी किल्ली ठोक देने पर उतारू था।
पर वो बोली,“सब्र करो मेरे परवाने इतनी भी क्या जल्दी है। आज की रात को हम यादगार बनायेंगे !”
“पर रात में तुम कैसे आओगी ?? तुम्हारे घरवाले ?” मैंने अपनी आशंका बताई।
“वो मुझ पर छोड़ दो। आप नहीं जानते, जब आप टूर पर कई कई दिनों के लिए बाहर जाते हो, मैं दीदी के पास ही तो सोती हूँ मेरे घरवालों को पता है ” अनारकली ने मेरे होंठों पर अंगुली रखते हुए कहा।
मैं गुमसुम मुंह बाए वहीँ खड़ा रह गया। अनारकली चाय बनने रसोई में चली गई।
मैं सोचने लगा कहीं वो मुझे मामू (चूतिया) तो नहीं बना गई ?
ये साला सक्सेना भी एक नम्बर का गधा है। (अरे यार ! हमारा पड़ोसी !). हर सही चीज ग़लत समय पर करेगा। रात को ११ बजे भजन सुनेगा और सुबह सुबह फरीदा खानम की ग़ज़ल। अब भी उसके फ्लैट (हमारे बगलवाले) से डेक पर सुन रहा है_
यूँ ही पहलू में बैठे रहो !
आज .... जाने की जिद ना ....करो !!
पर आज मुझे लगा कि उसने सही गाना सही वक्त पर लगाया है।
आज शुक्रवार का दिन था। ऑफिस में कोई ख़ास काम नहीं था। मैंने छुट्टी मार ली। दिन में अनारकली के लिए कुछ शोपिंग की। मेरा पप्पू तो टस से मस ही नहीं हो रहा था रात के इन्तजार में। एक बार तो मन किया की मुठ ही मार लूँ पर बाद में किसी तरह पप्पू को समझाया “थोड़ा सब्र करना सीखो ”
रात कोई १०.३० बजे अनारकली चुपचाप बिना कॉल बेल दबाये अन्दर आ गई और दरवाजा बंद कर दिया। मैं तो ड्राइंग रूम में उसका इन्तजार ही कर रहा था। एक भीनी सी कुंवारी खुशबू से सारा ड्राइंग रूम भर उठा।
उसके आते ही मैं दौड़ कर उससे लिपट गया और दो तीन चुम्बन उसके गालों होंठो पर तड़ा तड़ ले लिए। वो घबराई सी मुझे बस देखती ही रह गई।
“ओह .. फिर उतावलापन मेरे शहजादे हमारे पास सारी रात पड़ी है जल्दी क्या है ?”
“मेरी अनारकली अब मुझसे तुम्हारी ये दूरी सहन नहीं होती !”
“पहले बेडरूम में तो चलो !”
मैंने उसे गोद में उठा लिया और बेडरूम में आ गया। अब मेरा ध्यान उसकी ओर गया। पटियाला सूट पहने, बालों में पंजाबी परांदा (फूलों वाली चोटी), होंठों पर सुर्ख लाली। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया। सूट में टाइट कसे हुए उसके उन्नत उरोज पतली कमर, मोटे नितम्ब मैं अपने आप को काबू में कहाँ रख पाता। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसने भी अपनी आँखें बंद कर ली।
“मेरी अनारकली !”
“हाँ मेरे शहजादे !”
“मुझे तो विश्वास ही नहीं था कि तुम आओगी। मुझे तो लग रहा है कि मैं अब भी सपना देख रहा हूँ !”
“नहीं मेरे शहजादे ! ये ख्वाब नहीं हकीकत है। ख्वाब तो मेरे लिए हैं !”
“वो क्यों ?”
“मेरा मन डर रहा है कहीं तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगे। अनारकली कि किस्मत में तो दीवार में चिनना ही लिखा होता है !”
“नहीं मेरी अनारकली मै तुमसे प्यार करता हूँ तुम्हें कैसे धोखा दे सकता हूँ ” मैंने कह तो दिया पर बाद में सोचा अगर उसने पूछ लिया क्या मधु के साथ ये धोखा नहीं है तो मेरे पास कोई जवाब नहीं होगा। मैंने उससे कहा “अनारकली मैं शादी शुदा हूँ अपनी बीवी को तो नहीं छोड़ सकता पर तुम्हें भी उतना ही प्यार करता रहूँगा जितना मधु से करता हूँ। ”
“मुझे यकीन है मेरे शहजादे !”
अनु जिस तरीके से बोल रही थी मैं सोच रहा था कहीं अनारकली सचमुच ‘मुग़ल-ऐ-आज़म’ तो नहीं देख कर आई है।
अब देरी करना कहाँ की समझदारी थी। मैंने पूरा नाटक करते हुए पास पड़ी एक छोटी सी डिबिया उठाई और उसमें से एक नेकलेस (सोने का) निकाला और अनारकली के गले में डाल दिया। (इस मस्त हिरणी क़यामत के लिए ५-१० हज़ार रुपये की क्या परवाह थी मुझे)
अनारकली तो उसे देखकर झूम ही उठी और पहली बार उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख कर चूम लिए। मैंने उसके कपड़े उतार दिए और अपना भी कुरता पाजामा उतार दिया।
उसने लाइट बंद करने को कहा तो मैंने मना कर दिया। हमारे प्यार का भी तो कोई गवाह होना चाहिए। वो बड़ी मुश्किल से मानी।
मैं सिर्फ़ चड्डी में था। अनारकली ब्रा और पैन्टी में। ये वोही ब्रा और पैन्टी थी जो मैंने उसे १०-१५ दिन पहले लाकर दी थी। वो पूरी तैयारी करके आई थी।
मैं तो उसका बदन देखता ही रह गया। मैंने उसे बाहों में भर लिया और ब्रा के हुक खोल दिए .....
एक दम मस्त कबूतर छलक कर बाहर आ गए, गोरे गोरे छोटे नाज़ुक मुलायम ! एरोला कोई १.५ या २ इन्च का गहरे गुलाबी रंग के चुचूक मटर के दाने जितने।
मैंने उनको मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया। वो ज़ोर ज़ोर से सीत्कार करने लगी। मैं एक हाथ से एक अनार दबा रहा था और उसके नितम्बों पर कभी पीठ पर घुमा रहा था। उसके हाथ मेरे सिर पर और पीठ पर घूम रहे थे। कोई दस मिनट तक मैंने उसके स्तनों को चूसा होगा। अब मैंने उसकी पैन्टी उतार दी। उसने शर्म के मारे अपने हाथ चूत पर रख लिए।
मैंने कहा- "मेरी रानी ! हाथ हटाओ !"
तो वो बोली- "मुझे शर्म आती है !"
मैंने कहा,“ अगर शर्म आती है तो अपने हाथ अपनी आँखों पर रखो, इस प्यारी चीज़ पर नहीं, अब इस पर तुम्हारा कोई हक नहीं रहा। अब यह मेरी हो गई है !”
“हाँ मेरे शहज़ादे ! अब तो मैं सारी की सारी तुम्हारी ही हूँ !”
मैंने झट से उसके हाथ परे कर दिए। वाह !! क्या कयामत छुपा रखी थी उसने ! पाव रोटी की तरह फ़ूली हुई लाल सुर्ख चूत मेरे सामने थी, बिल्कुल गोरी चिट्टी! झाँटों का नाम निशान ही नहीं, जैसे आज़ ही उसने अपनी झाँट साफ़ की हो। चूत की फ़ांकें संतरे की फ़ांकों जितनी मोटी और रस भरी। अन्दर के होंठ हल्के गुलाबी और कोफ़ी रंग के आपस में जुड़े हुए। चूत का चीरा कोई चार इन्च क गहरी पतली खाई जैसे। चूत का दाना मटर के दाने जितना बड़ा सुर्ख लाल बिल्कुल अनारदाने जैसा। गोरी जांघें संगमरमर की तरह चिकनी। दांई जांघ पर एक तिल। चूत की प्यारी पड़ोसन (गाण्ड) के दर्शन अभी नहीं हुए थे क्योंकि अनारकली अभी लेटी थी और उसके पैर भींचे हुए थे।
मैंने उसके पैरों को थोड़ा फ़ैलाया तो गाण्ड का छेद भी नज़र आया। छेद बहुत बड़ा तो नहीं पर इतना छोटा भी नहीं था, हल्के भूरे रंग का बिल्कुल सिकुड़ा हुआ चिकना चट्ट्। उस छेद की चिकनाहट देख कर मुझे हैरानी हुई कि यह छेद इतना चिकना क्यों है !
बाद में मुझे अनारकली ने बताया था कि वो पूरी तैयारी करके आई थी। उसने अपनी झाँट आज़ ही साफ़ की थी और चूत और गाण्ड दोनों पर उसने मेरी दी हुई खुशबू वाली क्रीम भी लगाई थी।
मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने जलते होंठ उसकी गुलाबी चूत की फ़ांकों पर रख दिए। वो जोर जोर से सीत्कारने लगी। उसकी कुँवारी चूत की महक से मेरा तन मन सब सराबोर हो गया। एक चुम्मा लेने के बाद मैंने जीभ से उसकी अन्दर वाली फ़ांकें खोली और अपनी जीभ उसके अन्दर डाल दी।
उसने अपनी दोनों जांघें ऊपर मोड़ कर मेरे गले में कैंची की तरह डाल दी और मेरे सिर के बाल पकड़ लिए। मैं मस्त हुआ उसकी चूत चूसे चाटे जा रहा था। कोई दस मिनट तक मैंने उसकी चूत चाटी होगी। वो मस्त हुई सीत्कार किए जा रही थी और बड़बड़ा रही थी,“ मेरे शहज़ादे ! मेरे सलीम ! साहब जी ! ......”
अब उसके झड़ने का वक्त नज़दीक आ रहा था, वो जोर जोर से चिल्ला रही थी और जोर से चूसो ! और जोर से चूसो ! मज़ा आ रहा है !
मेरा लण्ड चड्डी में अपना सिर धुन रहा था। मैंने एक हाथ से उसके एक संतरे को कस कर पकड़ लिया और उसे मसलने लगा। दूसरे हाथ की तर्ज़नी उंगली से उसकी नर्म चिकनी गाण्ड का छेद टटोलने लगा। जब छेद मिल गया तो मैंने तीन काम एक साथ किए। पहला उसकी एक चूची को मसलना, दूसरा चूत को पूरा मुंह में ले कर जोर से चूसना और तीसरा अपनी एक उंगली उसकी गाण्ड के छेद में डाल दी।
उसका शरीर पहले से ही अकड़ता जा रहा था, उसकी जांघें मेरे गले के गिर्द जोर से लिपटी हुई थी। उसने एक जोर की किलकारी मारी और उसके साथ ही वो झड़ गई। उसकी चूत से कोई दो चम्मच शहद जैसा खट्टा मीठा नमकीन नारियल पानी जैसे स्वाद वाला काम रस निकला जिससे मेरा मुंह भर गया। मैं उसे पूरा पी गया। फ़िर वो शांत पड़ गई। औरत को स्खलित करवाने का यह सबसे बढ़िया तरीका है, समझो ' राम बाण ' है। मधु को झड़ने में कई बार जब देर लगती है तो मैं यही नुस्खा अपनाता हूँ।
मैंने अपनी चड्डी निकाल फेंकी। मेरा शेर दहाड़े मारने लगा था। आज तो उसका जलाल देखने लायक था। ७” का मोटा गेहुंआ रंग १२० डिग्री में मुस्तैद जंग लड़ने वाले सिपाही की तरह। मैंने अनारकली से उसे प्यार करने को कहा तो वो बोली “नही आज नहीं चूस सकती !” मैंने जब इसका कारण पूछा तो वो बोली “आज मेरा शुक्रवार का व्रत है नहीं तो मैं आपको निराश नहीं करती। मैं जानती हूँ इस अमृत को पीने से आंखों की ज्योति बढ़ती है और पति की उमर, पर क्या करूं ये कुछ खट्टा सा होता है न और शुक्रवार के व्रत में खट्टा नहीं खाया पीया जाता !”
मैंने कहा मैं पानी मुंह में नहीं निकालूँगा बस एक बार तुम इसे मुंह में लेकर चूस लो। तो वो मान गई और अपने घुटनों के बल बैठकर मेरा लण्ड चूसने लगी। पहले उसने उसे चूमा फ़िर जीभ फिराई और बाद में अपने मुंह में लेकर चूसने लगी। मेरे लण्ड ने २-३ टुपके प्री-कम के छोड़ ही दिए पर लण्ड चूसने की लज्जत में उसे कुछ पता नहीं चला। जब मुझे लगने लगा कि अब मामला गड़बड़ हो सकता है मैंने अपना लण्ड उसके मुंह से बाहर निकाल लिया।
अब तो बस यू पी, बिहार (चूत और गाण्ड) लूटने का काम रह गया था। मैंने उसे सीधा लेटा दिया। अपनी तर्जनी अंगुली पर थूक लगाया और उसकी पहले से ही गीली चूत में गच्च से डाल दी तो वो चिहुंकी, “ऊईई .... माँ .....”
अब देर करना कहाँ की समझदारी थी मैंने झट से अपना लण्ड उसकी चूत के मुहाने पर रखा और एक जोर का धक्का लगाया। आधा लण्ड गप्प से उसकी रसीली चूत में चला गया। एक दो झटकों के साथ ही मेरा पूरा का पूरा ७” का लण्ड उसकी चूत में फिट हो गया। वो थोड़ा सा चिहुंकी पर बाद में सीत्कार के साथ आ .... उईईई ..... आँ ..... करने लगी। मुझे शक हुआ कहीं उसकी चूत पहले से चुदी तो नहीं है?
मैंने उसे पूछ ही लिया,“क्यों मेरी अनारकली ! ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ ?”
वो मुस्कराते हुए बोली “मैं जानती हूँ कि आप क्या पूछना चाहते हैं ?”
“क्या ?”
“कि मेरी सील टूटने पर खून क्यों नहीं निकला और पहली बार लण्ड लेने पर भी मैं चीखी चिल्लाई क्यों नहीं?”
“हूँ .... हाँ ”
तो सुनिए “मेरी चूत और गाण्ड दोनों ही अन-चुदी और कुंवारी हैं और आज पहला लण्ड आपका ही उसके अन्दर गया है। पर मेरी चूत की सील पहले से ही टूटी है?”
“वो कब .... ये कैसे हुआ?” सुनकर मुझे बड़ी हैरानी हुई।
“दर असल कोई ९-१० महीने पहले एक दिन बापू ने अम्मा को बहुत बुरी तरह चोदा था। उस रात मैं और छोटे भाई बहन एक कोने में दुबके पड़े थे। हमारे घर में एक ही कमरा है न।
बापू बता रहे थे की उन्होंने कोई ११ नम्बर की गोली खाई है। (वो वियाग्रा की बात कर रही थी)
उनका गधे जैसा लण्ड कोई ८-९ इंच का तो जरूर होगा। अम्मा की दो तीन बार जमकर चुदाई की और एक बार गाण्ड मार कर उसे अधमरी करके ही उन्होंने छोड़ा था। ये जो नया कैलेंडर आया है शायद उसी रात का कमाल है। मैं जाग रही थी। मैंने पहली बार अपनी चूत में अंगुली डाल कर देखी थी। मुझे बहुत मज़ा आया। जब मैं बहुत उत्तेजित हो गई तो मैं पानी पीने के बहाने के बाहर आई और रसोई में जाकर वहाँ रखी एक मोटी ताज़ी मूली पड़ी देखी जो बापू के लण्ड के आकार की लग रही थी। मैंने उसे थोड़ा सा आगे से तोड़ा और सरसों का तेल लगाकर एक ही झटके में अपनी कुंवारी चूत में डाल दिया। मेरी दर्द के मारे चीख निकल गई और चूत खून से भर गई। मुझे बहुत दर्द हुआ। मैं समझ गई मेरी सील टूट गई है .” उसने एक ही साँस में सब कुछ बता दिया था।
फ़िर थोड़ी देर बाद बोली “अरे रुक क्यों गए धक्के क्यों बंद कर दिए?”
मैंने दनादन ४-५ धक्के कस कर लगा दिए। अब तो मेरा लण्ड दुगने उत्साह से उसे चोद रहा था। क्या मक्खन मलाई चूत थी। बिल्कुल मधु की तरह। सील टूटने के बाद भी एक दम कसी हुई।
उसकी चुदाई करते मुझे कोई २० मिनट तो हो ही गए थे। उसकी चूत इस दौरान २ बार झड़ गई थी और अब मेरा शेर भी किनारे पर आ गया था। मैंने उसे बताया कि मैं झड़ने वाला हूँ तो वो बोली अन्दर ही निकाल दो। मैंने उससे कहा कि अगर कोई गड़बड़ हो गई तो क्या होगा?
तो वो बोली “मेरे शहजादे मैं तो कब से इस अमृत की प्यासी हूँ अगर बच्चा ठहर गया तो भी कोई बात नहीं, १५ दिनों बाद गौना होने वाला है। तुम्हारे प्यार की निशानी मान कर अपने पास रख लूंगी, किसी को क्या पता चलेगा !”
और फ़िर मैंने ८-१० करारे झटके लगा दिए। मेरे लण्ड ने जैसे ही पहली पिचकारी छोड़ी ड्राइंग रूम में लगी दीवाल घड़ी ने भी टन्न टन्न १२ घंटे बजा दिए और मेरे लण्ड से भी दूसरी तीसरी चौथी ............ पिचकारियाँ निकलती चली गई। अनार अब मेरी यानी प्रेम की अनारकली बन चुकी थी।
हम लोग कोई १० मिनट इसी तरह पड़े रहे।
फ़िर अनारकली बोली “मेरे शहजादे आपने मुझे अपनी अनारकली तो बना दिया पर मेरी मांग तो भरी ही नहीं?”
मैंने अपना अंगूठा उसकी चूत में घुसा कर अपने वीर्य और चूतरस में डुबो कर उसकी मांग भर दी और उसके होंठों पर एक चुम्बन ले लिया। उसने भी नीचे झुककर मेरे पाऊँ छू लिए और मेरे गले से लिपट गई।
फ़िर हम उठाकर बाथरूम में गए और सफाई करी। सफाई करते समय मैंने देखा था उसकी चूत फूल सी गई थी और बाहर के होंठ भी सूज कर मोटे हो गए थे।
! यानि उम्मीद से दुगने ! !
उसने मेरे लण्ड पर एक चुम्मा लिया और मैंने भी उसकी चूत पर एक चुम्मा लेकर उसका धन्यवाद किया।
वो एक बार फ़िर मेरा लण्ड लेकर चूसने लगी। ५ मिनट चूसने के बाद मेरा लण्ड फ़िर खड़ा हो गया। मैंने उससे कहा “डारलिंग अब मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर चोदना चाहता हूँ !”
तो वो बोली “अब घोड़ी बनाओ या कुतिया क्या फर्क पड़ता है पर पानी अन्दर मत छोड़ना ”
मैंने हैरानी से पूछा “क्यों एक बार तो अन्दर ले ही चुकी हो ”
तो वो बोली “ये अन्दर की बात है तुम नहीं समझोगे !”
मुझे बड़ी हैरानी हुई। मैंने उसे घोड़ी बनाकर जल्दी से लण्ड अन्दर डाला और १५-२० धक्के लगा दिए। उसके गोल गोल सिंदूरी आमों जैसे उरोज के बीच फंसा सोने का लोकेट ऐसे लग रहा था जैसे घड़ी का पेंडुलम। अनारकली तो मस्त हुई आह .... उह्ह .... उईईइ .... करती जा रही थी। मैं जोर जोर से धक्के लगा रहा था। उसकी गाण्ड ऐसे खुल और बंद हो रही थी जैसे कोई सीटी बजा रहा हो मैंने अपनी एक अंगुली पर थूक लगाया और उसकी गाण्ड में पेल दी।
अनारकली एक झटके से अलग हो गई और बोली बस अब खेल खत्म ! और वो खड़ी हो गई। उसने एक बार मेरे लण्ड को फ़िर धोया और चूम लिया।
अब मैंने उसे गोद में उठाया और फ़िर बेड पर लाकर लिटा दिया। मैं बेड पर सिराहने की ओर बैठ गया और अनारकली मेरी गोद में सर रख कर लेट गई। मैंने पूछा “मेरी जान कैसी लगी पहली चुदाई?”
“जैसा मधु दीदी ने बताया था बिल्कुल वैसी ही रही !”
अब चौंकने की बारी मेरी थी। “क्या कह रही हो? मधु को कैसे? पता क्या .... मधु .... ??”
“अरे घबराओ नहीं मेरे सैंया वो बेचारी तो सपने में भी तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं जान सकती और सोच सकती !”
“तो फ़िर ”
“दर असल दीदी मेरे से कुछ नहीं छिपाती। वो तो मुझे अपनी छोटी बहन ही मानती हैं और जब से उन्हें मेरे गौने के बारे में पता लगा है उन्होंने मुझे चुदाई की सारी ट्रेनिंग देनी भी शुरू कर दी है।”
“क्या क्या बताया उसने?” मैंने पूछा
“सब कुछ ! सुहागरात के बारे में ! चुदाई के आसनों के बारे में ! चूत लण्ड और गाण्ड के बारे में !”
“अरे क्या उसने साफ़ साफ़ इनका नाम लिया?”
“नहीं उन्होंने तो पता नहीं कोई ' काम-दंड ',' रस-कूप ' और ' प्रेम-द्वार ', ' प्रेम मिलन ' पता नहीं क्या क्या नाम ले रही थी?”
“तो फ़िर तुम क्यों इनका वैसे ही नाम नहीं लेती?”
“अरे बाबू क्या फर्क पड़ता है? चुदाई को प्रेम मिलन कहो या मधुर मिलन। छुरी खरबूजे पर पड़े या खरबूजा छुरी पर मतलब तो खरबूजे को कटना ही है। अब लण्ड को काम-दंड बोलो या चूत को बुर या प्रेम-द्वार, चुदना और फटना तो चूत को ही पड़ेगा ना? ये तो पढ़े लिखे लोगों का ढकोसला है। अपनी पत्नी या प्रेमिका को अपने शब्दजाल में फंसा कर उसे खुश करने का बहाना है कि वो उसे प्यार करता है मतलब तो चुदाई से ही है ना। अपने नंगेपन के ऊपर परदा डालने का एक तरीका है। क्या किसी कड़वी गोली के ऊपर शहद की चाशनी लगा देने से उस दवाई का असर ख़त्म हो जाएगा?”
अनारकली का दर्शन शास्त्र (फलसफ़ा) सुनकर मैं तो हक्का बक्का रह गया। मेरा सेक्स का सारा ज्ञान इसके आगे जैसे फजूल था। मैंने फ़िर उससे पूछा “उसने और क्या क्या बताया है?”
तो वो बोली,“बहुत कुछ .... वो तो मेरी गुरु है !”
ऐसा नहीं है कि मैं चुपचाप उसकी बातें ही सुन रहा था। मैं उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था और वो मेरे लण्ड से खेल रही थी। उसने पाँव ऊपर उठा रखे थे और अपने नितम्बों पर धीरे धीरे मार रही थी। जब भी उसकी एड़ी नितम्ब को छूती तो उसके नितम्ब दब जाते और जोर से हिलते। मैंने जब उसके गोल गोल नितम्बों की ओर देखा और मेरा मन उसकी नरम नाज़ुक गुलाबी गाण्ड मारने को उतावला हो गया। ख़याल आते ही मेरे लण्ड ने एक ठुमका लगाया और फ़िर से चुस्त दरुस्त हो गया। अनार ने तड़ से एक चुम्मा उस पर ले ही लिया और मैंने चूत कि सुनहरी पड़ोसन के मुंह में अपनी एक अंगुली डाल दी।
अनार कली थोड़ी सी चिहुंकी “ऊईई माँ ...... क्या कर रहे हो ?”
मैंने उसके होंठों पर एक चुम्मा ले लिया। मैं अभी उसे गाण्ड मरवाने के लिए कहने की सोच ही रहा था की वो बोल पड़ी “दीदी सच कहती थी !”
“क्या?”
“कि सब मर्द एक जैसे होते हैं !”
“क्या मतलब?”
“वो आपके बारे में भी एक बात कहती थी !”
“वो क्या?”
“कि तुम चूत भले ही मारो या न मारो पर गाण्ड के बहुत शौकीन हो। मैं जानती हूँ तुम गाण्ड मारे बिना नहीं मानोगे। पर मेरे शहजादे मैं उसकी भी पूरी तैयारी करके आई हूँ !”
मैं तो हक्का बक्का बस उसे देखता ही रह गया। मधु बेचारी को क्या पता कि उसने कितनी बड़ी गलती की है अनारकली को सब कुछ समझाकर। पर चलो ! मेरे लिए तो बहुत ही अच्छी बात है।
मधु डार्लिंग ! इसी लिए तो तुम को मैं इतना प्यार करता हूँ। गुरूजी ठीक कहते हैं गीता में भगवान् कृष्ण ने कहा है “हे अर्जुन ! इस ज्ञान को केवल पात्र मनुष्य को ही देना चाहिए !”
अनारकली से ज्यादा अच्छा पात्र भला कौन हो सकता था। अब साड़ी बातें मेरी समझ में आ गई कि ये दोनों अन्दर क्या खुसर फुसर करती रहती हैं।
“तो क्या तुम तैयार हो ?”
“नेकी और पूछ पूछ पर एक ध्यान रखना मेरी गाण्ड में अब तक दीदी कि अंगुली के सिवा कोई दूसरी चीज नहीं गई है एक दम कोरी और अनछुई है। प्यार से करना और धक्के जोर से नहीं समझे मेरे एस .एस .एस। (ट्रिपल एस)”
“ये एस .एस .एस। क्या होता है?”
“शौदाई शहजादा सलीम ”
मेरी हँसी निकल गई। शौदाई पागल प्रेमी को कहते हैं। फ़िर मैंने उससे पूछा “पर तुम तो कह रही थी कि तुमने इसकी भी तैयारी कर रखी है फ़िर डर कैसा। प्लीज़ बताओ क्या क्या तैयारी की है ?”
“दीदी बता रही थी कि गाण्ड रानी की महिमा बहुत बड़ी है। चूत तो दो चार बार चुदने से ढीली हो जाती है पर गाण्ड मर्जी आए जितनी मारो लो उतनी ही टाइट रहती है। हाँ लगातार मारते रहने से उसके चारों और काला घेरा जरूर बन जाता है। गाण्ड मरवाने से नितम्ब भी भारी और सुंदर बनते हैं। गाण्ड मारने और मरवाने का अपना ही सुख और आनंद है। पहले पहले सभी औरतों को डर लगता है पर एक बार गाण्ड मरवाने का चस्का लग जाए तो फ़िर रोज गाण्ड मरवाने को कहती है। गाण्ड मरवाने से पति और प्रेमी का प्यार बढ़ता है !”
“पर मधु तो मुझे से गाण्ड मरवाने में बहुत नखरे करती है ”
“अरे बाबू वो तो बस तुम्हें अपने ऊपर लट्टू करने का नाटक है अगर एक बार मांगने से ही गाण्ड मिल जाए तो वो मज़ा नहीं आता। जिस चीज को जितना मना करो उतना ही ज्यादा करने को मन करता है !”
“ओह .....” साली मधु की बच्ची मेरे साथ इतना नाटक। फ़िर मैंने कहा “और वो तैयारी वाली बात?”
“जो लड़की या औरत पहली बार गाण्ड मरवाने जा रही उनके लिए एक टोटका दीदी ने बताया था !”
“हूँ .... क्या ?”
“लड़की को उकडू बैठ जाना चाहिए और बोरोलीन या कोई और क्रीम की मटर के दाने जितनी मात्रा अपनी अंगुली पर लगा कर धीरे से गाण्ड के छेद पर लगा लो फ़िर उठकर खड़ी हो जाओ। अब फ़िर नीचे उसी तरह बैठ कर अपनी गाण्ड को छोटे शीशे में देखो जितनी दूर वो क्रीम फ़ैल गई है अगर लण्ड की मोटाई उतनी ही है या कम, तो डरने की कोई बात नहीं है उतना मोटा लण्ड गाण्ड रानी आसानी से झेल लेगी। हाँ एक बात और जिस दिन गाण्ड मरवाने का हो उस दिन दिन में २-३ बार कोई क्रीम वैसलीन या तेल जरूर अपनी महारानी के अन्दर लगा लेना चाहिए !”
“अरे मेरी प्यारी अनारकली तू तो सचमुच मेरी भी गुरु बन गई है मैं तो ऐसे ही अपने आप को प्रेम (लव/सेक्स) गुरु समझता रहा हूँ !”
अब स्वर्ग के दूसरे द्वार का उदघाटन करने का वक्त आ गया था। मैंने अनारकली को घुटनों के बल कुतिया स्टाइल में कर दिया। वो मेरी और देखकर मुस्कराई और फ़िर मेरे होंठों पर एक चुम्मा लेकर बोली “वैसलीन लगना न भूलना !”
“ठीक है मेरी गुरूजी !”
अनारकली की मस्त गुलाबी गाण्ड का छेद अब ठीक मेरे सामने था। उसका छोटा सा गुलाबी छेद खुल और सिकुड़ रहा था। मैंने प्यार से उस पर अपनी अंगुली फिराई और अपनी जीभ की नोक उस पर टिका कर ऊपर से नीचे घुमाई। अनारकली की किलकारी हवा में गूंज उठी। मुझे लगा कि उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया है। फ़िर मैंने बोरोलीन की ट्यूब उठाई और उसका ढक्कन खोल कर उसकी टिप अनारकली की गाण्ड के छेद के अन्दर थोड़ी सी फंसा कर आधी ट्यूब अंदर खाली कर दी।
अनारकली थोड़ा सा कुनमुनाते हुए बोली “ओह .... क्या कर रहे हो गुदगुदी होती है !”
“बस हो गया मेरी जान !” अब मैंने अपने लण्ड पर भी क्रीम लगाई और अपने लण्ड का सुपारा उसकी गाण्ड के खुलते बंद होते छेद पर टिका दिया।
अनारकली शायद हनुमान चालीसा पढने लगी।
मैंने धीरे से एक धक्का लगाया। लण्ड अन्दर जाने के बजाय फिसल गया। एक दो धक्के और लगाए पर लण्ड कभी ऊपर फिसल जाता कभी नीचे वाले छेद में घुस जाता पर गाण्ड के अन्दर नहीं गया। मैं अब तक १०-१२ लड़कियों और औरतों की गाण्ड मार चुका हूँ पर पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। चलो पहले धक्के में तो लण्ड कई बार गाण्ड के अन्दर नहीं जाता पर ऐसा क्या जादू है अनारकली की गांड में कि वो लण्ड को अन्दर नहीं जाने दे रही। माना कि उसकी गांड कि मोरी बहुत टाइट थी, कोरी और अन-चुदी थी पर ऐसा क्या था कि मेरा लण्ड पूरा खड़ा होने के बाद भी अन्दर नहीं जा रहा था।
अनारकली मेरी हालत पर हंसे जा रही थी। फ़िर वो बोली “क्या हुआ मेरे शहजादे प्रेम ?”
“वो .... वो ....” मैं तो कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था। मैंने एक धक्का और लगाया पर वोही ढाक के तीन पात।
फ़िर अनारकली बोली- चलो अब एक बार और कोशिश करो। इस बार जैसे ही मैंने उसके छेद पर अपना लण्ड टिका कर जोर का धक्का मारा तो कमाल ही हो गया, मेरा लण्ड ५ इंच तक उसकी गांड में गच्च से घुस गया। अनारकली की दर्द के मारे भयंकर चीख निकल गई,“उई इ .... माँ.... आया ..... मर .... गई ईई ..............!”
और वो चीखते हुए झटके के साथ पेट के बल गिर पड़ी और मैं उसके ऊपर। जैसे ही मैं ऊपर गिरा मेरा बाकी का लण्ड भी अन्दर घुस गया। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। मैं चुपचाप उसके ऊपर पड़ा रहा।
कोई ४-५ मिनट के बाद वो बोली,“कोई ऐसे भी गांड मारी जाती है। मैंने आपको बताया था मेरी गांड अभी कोरी है प्यार से करना पर आप तो अपने मज़े के लिए लड़की को मार ही डालते हो !”
“ओह मुझे माफ़ कर दो मेरी रानी गलती हो गई। सॉरी प्लीज़ !” मैंने उसके गालों को चूमते हुए कहा। अब तक वो कुछ सामान्य हो गई थी।
“अब डाल दिया है तो चलो अपना काँटा निकाल ही लो। लूट लो इस स्वर्ग के दूसरे दरवाजे का मज़ा भी !” अनारकली बोली। मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने चालू कर दिए पर संभल कर।
“अनार एक बात समझ नहीं आई?”
“वो क्या?”
“पहले गांड के अन्दर क्यों नहीं जा रहा था। जब तुमने कहा तब कैसे अन्दर चला गया?”
“असल में मैंने ज्यादा समझदारी दिखाई और तुम्हें थोड़ा तड़फाने के लिए मैंने अपनी गांड को अन्दर भींच लिया था। तेल और चिकनाई लगी होने के कारण लण्ड इधर उधर फिसल रहा था। जब मैंने तुम्हें धक्का लगाने को कहा उस वक्त मैंने अपनी मोरी ढीली छोड़ कर बाहर की ओर जोर लगाया था। मुझे क्या पता था कि तुम तो निरे अनाड़ी ही निकलोगे जैसे कभी गांड मारी ही ना हो और गांड रानी कि महिमा जानते ही नहीं !”
“ओह .. माफ़ कर दो गुरूजी अब गलती नहीं होगी। तुमसे गांड मारना सीख लूँगा। वैसे एक बात बताओ तुम्हें ये ज्ञान भी मधु ने ही दिया है क्या ?”
“नहीं ये ज्ञान तो जब मैं और दीदी पिछले रविवार आश्रम गए थे वहां गुरु माताजी ने दिया था।”
अब मेरे समझ में सब कुछ आ गया कि अधकचरे ज्ञान का कितना बड़ा नुकसान होता है। इसी लिए गुरूजी कहते हैं ज्ञान पात्र को ही देना चाहिए।”
अनारकली अब फ़िर कुतिया स्टाइल में आ गई थी। मैं धक्के पर धक्के मर रहा था। उसकी गाण्ड एकदम रवाँ हो गई थी। लण्ड पूरा अन्दर बाहर हो रहा था। अनारकली को भी मज़ा आने लगा था। जब मेरा लण्ड बाहर आता तो वो उसे अन्दर की ओर खींचती और जब मैं अन्दर घुसाता तो वो बाहर की ओर जोर लगाती। वो भी “आह ह .... उ उह ह उइ इ इ ई.... वाह मेरे राज़ाऽऽऽ.... मेरे शहज़ादे और जोर से .... आह हऽऽ..... उई इ ई माँ.....” करती जा रही थी और मेरे आनन्द क तो पारावार ही नहीं था। मैंने मधु के अलावा कई लड़कियों और औरतों की गाण्ड मारी है पर सबसे खूबसूरत और कसी गाण्ड तो अनारकली की थी। रजनी (मधु की कज़न) और सुधा से भी ज्यादा।
गाण्ड का मज़ा लेते हमें कोई बीस मिनट हो गए थे। इस बीच मैं उसकी चूत में भी उंगली करता रहा और उसके संतरे भी भींचता रहा जिससे वो दो बार झड़ चुकी थी। अब मेरा भी निकलने वाला था। अनारकली की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अन्तिम झटके लगाने शुरू कर दिए। मैंने अनारकली से कहा,“ हिन्दुस्तान आज़ाद होने वाला है मेरी ज़ान !”
तो वो बोली,“ कोई बात नहीं मैं भी किनारे पर हूँ !” और एक मीठी सीत्कार के साथ मेरे लण्ड ने पिचकारियाँ छोड़नी शुरू कर दी। अनारकली की गाण्ड मेरे वीर्य से लबालब भर गई और मेरा तन मन आत्मा सब आनन्द से सराबोर हो गए।
हम दोनों ने एक बार फ़िर बाथरूम में जाकर सफ़ाई की और नंगे ही बैड पर लेट गए। अनारकली मेरी गोद में सिर रखे मेरे लण्ड की ओर मुँह किए लेटी थी। उसने मेरे लण्ड से फ़िर खेलना शुरू कर दिया। मैं उसके गाल और संतरों को सहला रहा था।
मैंने पूछा,“अनारकली एक बात बताओ- तुम मुझसे चुदवाने के लिए इतनी जल्दी कैसे तैयार हो गई?”
“ जल्दी कहाँ ! मुझे पूरे दो महीने लगे हैं तुम्हारे जैसे शहज़ादे को तैयार करने में !”
“क्या मतलब ?” अब मेरे चौंकने की बारी थी।
“अरे मेरे भोले राज़ा मैं तो पहले तुम्हें डी पी और डी डी ही समझती रही !” वो हंसते हुए बोली।
डी पी.... डी डी.... ये क्या बला है?” मैंने हंसते हुए पूछा।
“डी पी मतलब ढिल्लू प्रसाद (लल्लू) और डी डी मायने अपनी पत्नी का देव दास !” वो हंसते हुए बोली। “अखबार गोद में रखना तो आपने बाद में सीखा था !” उसने मेरी ओर आंख मार दी।
मैं समझ गया मधु ने मेरे पत्नी भक्त होने के बारे में बताया होगा कि मैं तो दुनिया की सबसे सुन्दर अप्सरा मधु के अलावा किसी की ओर देखता ही नहीं। मेरी जिन्दगी में उसके अलावा और कोई लड़की आइ ही नहीं। बेचारी मधु !!!
“पर मेरी बात का जवाब तो दिया ही नहीं !”
“ वो दर असल दीदी ने मेरा हाथ देख कर बताया था कि मुझे दो पतियों का योग है यानि मुझे दो पतियों का प्यार मिलेगा। यह देखो ........” और उसने अपना बाएँ हाथ की मुट्ठी बंद करके कनिष्ठा (छोटी) उंगली के ऊपर बनी दो लाईन दिखाई। “मैंने अपनी चूत और गाण्ड बहुत सम्भाल कर रखी हैं एकदम कोरी और अनछुई। मैं तो चाहती थी कि अपना सब कुछ सुहागरात को अपने पति को ही समर्पित करूँ पर दीदी ने जब बताया कि मुझे दो पति मिलेंगे तो मैंने तय किया कि मेरे किसी भी पति के साथ कोई अनहोनी ना हो। इसीलिए मैंने आपको अपना पहला पति, अपना शहज़ादा मान लिया और चुदने को तैयार हो गई। और जहाँ तक गाण्ड मरवाने का सवाल है पता नहीं आपने देखा या नहीं, मेरी दाहिनी जांघ पर तिल है जैसा मधु दीदी और एश्वर्या राय के भी है। मैंने एक फ़िल्म में ध्यान से देखा था जिसमें उसने बिकिनी पहनी थी। ऐसी औरतों को गाण्ड मरवाने का योग भी होता है।”
“चलो मधु और तुम्हारा तो ठीक है पर एश्वर्या राय के बारे में तुम यकीन के साथ कैसे कह सकती हो? वो साला अभिषेक तो एकदम लल्लू है। वो क्या गाण्ड मारेगा?”
“तुम क्या सोचते हो सल्लू मियाँ ने बिना उसकी गाण्ड मारे छोड़ दिया होगा?” वो खिलखिला कर हंस पड़ी।
मैं हैरान हुआ उसे देखता रह गया। मुझे लगा जैसे वो १८ साल की एक अदना सी नौकरानी नहीं ५ किलो आर डी एक्स मेरे सामने पड़ा है। पता नहीं मधु ने इसे चुदाई की पूरी पी एच डी ही करवा दी है। वो मेरा लण्ड चूसे जा रही थी जो अब फ़िर फ़ुफ़कारें मारने लगा था।
“एक बात और बताऊँ?”
“नहीं मेरी अम्मा .... और कुछ नहीं !” मैंने कहा। पता नहीं ये क्या बम फ़ोड़ दे।
अभी तो मुझे प्रेम की अनारकली कह रहे थे। अब अम्मा कैसे हो गई?”
“अच्छा मेरी अनारकली, मेरी शहज़ादी ,मेरी रानी, मेरी प्यारी, मेरी प्रेम गुरू ....” और मैंने एक चुम्मा उसके गालों और होंठों पर ले लिया। मैं अपने आप को बड़ा शिकारी समझ रहा था पर अब लगता था कि मैं तो शिकार हूँ और अनारकली एक कुशल शिकारी है। मेरी हालत तो ऐसी हो रही थी जैसे मकड़ी खुद अपने ज़ाल में फ़ंस गई हो।
“पर बात तो सुननी ही पड़ेगी !” उसने कहा।
“अच्छा चलो बताओ!” मैंने उसके गालों और उरोज़ों पर अपने हाथ फ़िराने लगा और अपनी आंखें बंद कर ली। अनारकली के चूसने के कारण मेरा लण्ड फ़िर से पत्थर की तरह सख्त हो गया था।
“वो..... वो.... कई बार खड़े लण्ड को धोखा भी हो जाता है।”
“खड़े लण्ड का धोखा..... वो क्या होता है ????”
“अरे मेरे एस एस एस , जब लण्ड लोहे के डण्डे की तरह खड़ा हो और एक हसीन चूत और गाण्ड उसके सामने नंगी लेटी हो और उसकी चुदाई ना की जाए तो बेचारे लण्ड के साथ तो धोखा ही होगा ना ! वो फ़िर खुदकुशी ही करेगा ना ???” उसने आँख मारते हुए कहा और जोर से हंस पड़ी।
मैं पहले तो कुछ समझा नहीं फ़िर मैंने उसे जोर से अपनी बाहों में भींच लिया और उसके होंठ इतने जोर से काटे कि उसका खून ही निकल आया। उसने मेरा लण्ड अपनी चूत में इस तरह बंद कर लिया जैसे सलीम की अनारकली की तरह उसे दीवार में चिन दिया गया हो।
बस आज़ इतना ही !
कैसी लगी ‘मेरी अनारकली’ ?
अरे भाई ' प्रेम की अनारकली ' ? मुझे मेल करेंगे ना??
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शुक्रवार, 30 मार्च 2012
अनारकली की चुदाई - 1
पहली बार चुदवाने में हर लड़की या औरत जरूर नखरा करती है लेकिन एक बार चुदने के बाद तो कहती है आ लंड मुझे चोद।
अब अनारकली को देखो, साली ने पूरे २ महीने से मुझे अपने पीछे शौदाई सलीम (पागल) बना कर रखा था। पुट्ठे पर हाथ ही नहीं धरने देती थी। रगड़ने का तो दूर चूमा-चाटी का भी कोई मौका आता तो वो हर बार कुछ ऐसा करती कि गीली मछली की तरह मेरे हाथ से फिसल ही जाती थी।
अकेले में एक दो बार उसके अनारों को भींचने या गालों को छूने या चुम्मा लेने के अलावा मैं ज्यादा कुछ नहीं कर पाया था। पर मैंने भी सोच लिया था कि उसे प्रेम की अनारकली बना कर ही दम लूँगा। साली अपने आप को सलीम वाली अनारकली से कम नहीं समझती। मैंने भी सोच लिया था चूत मारूँ या न मारूं पर एक बार उसकी मटकती गांड जरूर मारूंगा।
आप सोच रहे होंगे अनारकली तो सलीम की थी फ़िर ये नई अनारकली कौन है। दर असल अनार हमारी नौकरानी गुलाबो की लड़की है। उसके घरवाले और मधु (मेरी पत्नी) उसे अनु और मैं अनारकली बुलाता हूँ। अनार के अनारकली बनने की कहानी आप जरूर सुनना चाहेंगे।
अनार नाम बड़ा अजीब सा है ना। दर असल जिस रात वो पैदा हुई थी उसके बाप ने उसकी अम्मा को खाने के लिए अनार लाकर दिए थे तो उसने उसका नाम ही अनार रख दिया।
अनु कोई १८-१९ साल की हुई है पर है एकदम बम्ब पटाखा पूरा ७.५ किलो आर डी एक्स। ढाई किलो ऊपर और उम्मीद से दुगना यानि ५ किलो नीचे। नहीं समझे अरे यार उसके स्तन और नितम्ब। क्या कयामत है साली। गोरा रंग मोटी मोटी आँखे, काले लंबे बाल, भरे पूरे उन्नत उरोज, भरी पर सुडोल जांघें पतली कमर। और सबसे बड़ी दौलत तो उसके मोटे मोटे मटकते कूल्हे हैं।
आप सोच रहे होंगे इसमे क्या खास बात है कई लड़कियों के नितम्ब मोटे भी होते है तो दोस्तों आप ग़लत सोच रहे हैं। अगर एक बार कोई देख ले तो मंत्रमुग्ध होकर उसे देखता ही रह जाए। खुजराहो के मंदिरों की मूर्तियों जैसी गांड तो ऐसे मटका कर चलती जैसे दीवानगी में 'उर्मिला मातोंडकर' चलती है। नखरे तो इतने कि पूछो मत।
अगर एक बार उसे देख लें तो 'उर्मिला मातोंडकर' या 'शेफाली छाया' को भूल जायेंगे। और फ़िर मैं तो नितम्बों का मुरीद (प्रेम पुजारी) हूँ।
कभी कभी तो मुझे शक होता है इसकी माँ गुलाबो तो चलो ठीक ठाक है, हो सकता है जवानी में थोड़ी सुंदर भी रही होगी पर बाप तो काला कलूटा है। तो फ़िर ये इंतनी गोरी चिट्टी कैसे है। लगता है कहीं गुलाबो ने भी अपनी जवानी में मेरे जैसे किसी प्रेमी भंवरे से अपनी गुलाब की कली मसलवा ली होगी।
खैर छोड़ो इन बातों को हम तो अनु के अनारकली बनने की बात कर रहे थे।
अरे नए पाठकों को अपना परिचय तो दे दूँ। मैं प्रेम गुरु माथुर। उमर ३२ साल। जानने वाले और मेरे पाठक मुझे प्रेम गुरु बुलाते हैं। मैं एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता हूँ।
मेरे लंड का आकार लगभग ७” है। सुपारा ज्यादा बड़ा नहीं है पर ऐसे सुपाड़े और लंड गांड मारने के लिए बड़े मुफीद (उपयुक्त) होते हैं। मेरे लंड के सुपाड़े पर एक तिल भी है। पता नहीं आप जानते हैं या नहीं ऐसे आदमी बड़े चुद्दकड़ होते हैं और गांड के शौकीन।
मेरी पत्नी मधुर (मधु ) आयु २८ साल बला की खूबसूरत ३६-२८-३६ मिश्री की डली ही समझो, चुदाई में बिल्कुल होशियार। पर आप तो हम भंवरों की कैफियत (आदत) जानते ही हैं कभी भी एक फूल से संतुष्ट नहीं होते।
एक बात समझ नहीं आती साली ये पत्नियाँ पता नहीं इतनी इर्ष्यालू क्यों होती हैं जहाँ भी कोई खूबसूरत लड़की या औरत देखी और अपने मर्द को उनकी और जरा सा भी उनपर नज़रें डालते हुए देख लिया तो यही सोचती रह्रती हैं कि जरूर ये उसे चोदना चाहते हैं।
कमोबेश मधु की भी यही हालत थी। अनार को अनारकली बनाने में मेरी सबसे बड़ी दिक्कत तो मधु ही थी। मुझे तो हैरत होती है पूरी छान बीन किए बिना उसने गुलाबो को कैसे काम पर रख लिया जिसके यहाँ आर डी एक्स जैसी चीज भी है जिसका नाम अनार है।
मुझे तो कई दिनों के बाद पता चला था कि अनु बहुत अच्छी डांसर है। मधु बहुत अच्छी डांसर है। शादी के बाद स्कूल कार्यक्रम को छोड़ कर उसे कोई कम्पीटीशन में तो नाचने का मौका नहीं मिला पर घर पर वो अभ्यास करती रहती और अनु भी साथ होती है।
अनु तो १०-१५ दिनों में ही उससे इतना घुलमिल गई थी कि अपनी सारी बातें मधु उससे करने लग गई थी। दो दो घंटे तक पता नहीं वो सर जोड़े क्या खुसर फुसर करती रहती हैं।
वैसे तो ये कभी कभार ही आती थी और मैंने पहले कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया। आप ये जरूर सोच रहे होंगे ये कैसे हो सकता है। कोई खूबसूरत फूल आस पास हो और मेरी नज़र से बच जाए ये कैसे हो सकता है। दर असल उन दिनों मेरा चक्कर अपनी खूबसूरत सेक्रेटरी से चल रहा था।
लेकिन जबसे गुलाबो बीमार हुई है पिछले एक महीने से अनार ही हमारे यहाँ काम करने आ रही है। मुझे तो बाद में पता चाल जब मधु ने बताया कि गुलाबो के फ़िर लड़की हुई है।
कमाल है ३८-४० साल की उमर में ५-६ बच्चों के होते हुए भी एक और बच्चा ? अगर माँ इतनी चुद्दकड़ है तो बेटी कैसी होगी !
माँ पर बेटी नस्ल पर घोड़ी !
ज्यादा नहीं तो थोड़ी थोड़ी !!
एक दिन जब मैं बाथरूम से निकल रहा था तो अनु अपनी चोटी हाथ में पकड़े घुमाते हुए गाना गाते लगभग तेजी से अन्दर आ रही थी_
मैं चली मैं चली देखो प्यार की गली !
मुझे रोके ना कोई मैं चली मैं चली !!
वो अपनी धुन में थी अचानक मैं सामने आ गया तो वो मुझसे टकरा गई। उसके गाल मेरे होंठो को छू गए और स्तन भी सीने से छू कर गए। मैंने उसकी चोटी पकड़ते हुए कहा “कहाँ चली मेरी अनु रानी कहीं सचमुच ससुराल तो नहीं जा रही थी?”
वो शरमा कर अन्दर भाग गई। हाय अल्लाह …. क्या कमायत है साली। मैं भी कितना गधा था इतने दिन इस आर डी एक्स पर ध्यान ही नहीं दिया।
उस दिन के बाद मैंने अनु को चोदने का जाल बुनना शुरू कर दिया। अनु ने तो मधु पर पता नहीं क्या जादू कर दिया था कि वो उसे अपनी छोटी बहन ही समझने लगी थी।
अनु भी लगभग सारे दिन हमारे घर में मंडराती रहती थी हलाँकि वो एक दो जगह पर और भी काम करती थी। मधु ने उसे अपनी पुरानी साड़ियां, चप्पल, सूट, मेक-अप का सामान आदि देना शुरू कर दिया। उसे अपनी पहनी पैंटी ब्रा और अल्लम-गल्लम चीजें भी देती रहती थी।
अनु हमारे यहाँ झाडू पोंछा बर्तन सफाई कपड़े आदि सब काम करती थी। कभी कभी रसोई में भी मदद करती थी। वो तो यही चाहती थी कि किसी तरह यहीं बनी रहे। मैं शुरूआत में जल्दी नहीं करना चाहता था।
जब वो ड्राइंग रूम में झाडू लगाती तो उसके रसभरे संतरे ब्लाउज के अन्दर से झांकते साफ़ दिख जाते थे। पर निप्पल और एरोला नहीं दिखते थे पर उसकी गोलाइयों के हिसाब से अंदाजा लगना कहाँ मुश्किल था। मेरा अंदाजा है कि एक रुपये के सिक्के से ज्यादा बड़ा उसका एरोला नहीं होगा। सुर्ख लाल या थोड़ा सा बादामी। उसकी घुंडी तो कमाल की होगी।
मधु के तो अब अंगूर बन गए है और चूसने में इतना मज़ा अब नहीं आता। पता नहीं इन रस भरे आमों को चूसने का मौका कब नसीब होगा। शुरू शुरू में मैं जल्दबाजी से काम नहीं लेना चाहता था। अनु इन सब से शायद बेखबर थी।
आज शायद उसने मधु की दी हुई ब्रा पहनी थी जो उसके के लिए ढीली थी। झाडू लगाते हुए जब वो झुकी तो मैंने देख लिया था। मेरी नज़रें तो बस उन कबूतरों पर टिकी रह गई। मुझे तो होश तब आया जब मेरे कानों में आवाज आई, “साहब अपने पैर उठाओ मुझे झाडू लगानी है।” अनु ने झुके हुए ही कहा।
“आंऽऽ हाँ ” मैंने झेंपते हुए कहा। मैं सोच रहा था कहीं उसने मुझे ऐसा करते पकड़ तो नहीं लिया। लेकिन उसके चेहरे से ऐसा कुछ नहीं लगा और अगर ऐसा हुआ भी है तो चलो आगाज तो अच्छा है। मेरा लंड तो पजामे के अन्दर उछल कूद मचाने लगा था। मैंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। पजामे के बाहर उसका उभार साफ़ नज़र आ रहा था।
मधु ने उसको समझा दिया था कि वो उसे (मधु को) दीदी बुलाया करेगी और मुझे भइया।
मै तो सोच रहा था कि जब मधु उसकी दीदी हुई तो वो मेरी साली हुई ना और मैं उसका जीजा, मुझे भइया की जगह सैयां नहीं तो कम से कम जीजू ही बुलाये। ताकि साली पर आधा हक, जो जीजू का होता ही है, मेरा भी हो जाए, पर मैं तो लड्डू पूरा खाने में विश्वास रखता हूँ। पर मधु के हिसाब से साहब ही कहलवाना ठीक था मैं मरता क्या करता।
मधु इस समय बाथरूम में थी। आज वो अकेले ही नहा रही थी। कोई बात नहीं कभी कभी अकेले नहाना भी सेहत के लिए अच्छा होता है। मेरा अनार से बात करने का मूड हो आया “अनु ! चाय तो पिला दो एक कप ”
“हाँ … बनाती हूँ ” अनु ने कोयल जैसी मीठी आवाज में कहते हुए मेरी और इस तरह से देखा जैसे कह रही हो चाय क्या पीनी है कुछ और भी पी लो। वो कमर पर हाथ रखे खड़ी थी चाय बनाने नहीं गई।
“अरे अनु ! आज ये तुमने ढीले ढीले कपड़े क्यों पहन रखे हैं?”
“नहीं ! ढीले कहाँ हैं? ठीक तो हैं! ” उसने अपना कुरता नीचे खींचते हुए कहा।
“अरे ये ब्रा कितनी ढीली है ! इसके स्ट्रेप्स दिख रहे हैं !” मैंने हँसते हुए कहा।
“धत … आप भी !” वो शरमा गई।
!! या अल्लाह … क्या अदा है !!
“क्यों मैंने झूठ कहा?”
“वो दीदी भी यही कह रही थी !” वो अपनी आँखें नीची किए बोली।
“तो अपने साइज़ की पहना करो न उनमें तुम बहुत सुंदर लगोगी। ”
“पर हमारे पास इतने पैसे कहाँ हैं नई ब्रा खरीदने के लिए ?”
“कोई बात नहीं इतनी सी बात मैं तुम्हारे लिए ला दूंगा म ऽऽ म् … मेरा मतलब मधु से कह दूंगा ”
“पर दीदी … पैसे .. ??”
“अरे तुम पैसों की क्यों चिंता करती हो बाद में दे देना ” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। मेरा कुतुबमीनार पजामे के अन्दर उफन रहा था और बाहर आने को मचलने लगा। मैंने जल्दी से अखबार गोद में रख लिया नहीं तो अनु जरूर देख लेती और मेरे इरादों की भनक उसे लग जाती तो आगाज (श्री गणेश) ही ख़राब हो जाता। पर मैं तो इस मामले में पूरा खिलाड़ी हूँ।
अनु रसोई में चली गई। मधु बाथरूम में थी। मेरा मन किया उसके साथ नहा ही लिया जाए। मौसम भी है, मौका भी अच्छा है और लंड भी कुतुबमीनार बना है। मैं जैसे ही उठा सामने से मधु अपने बाल तौलिए से रगड़ते हुए बाथरूम से निकल कर मेरी ओर ही आ रही थी। मैंने मधु की ओर आँख मारी और सीटी बजाने के अंदाज़ में ओये होए कहा।
मेरे इस इशारे को वो अच्छी तरह जानती थी। जब हम लोग कामातुर हैं मतलब चुदाई की इच्छा होती है इसी तरह सीटी बजाते हैं। मैंने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो वो मुझे परे धकेलते हुए बोली,“हटो लाल बाई आ गई है।”
पहले तो मैं कुछ समझा नहीं मैंने सोचा कहीं वो गुलाबो की बात तो नहीं कर रही पर बाद में जब उसके माहवारी की और इशारे को समझा तो मेरा सारा उत्साह ही ठंडा पड़ गया। अब तो ५-६ दिन मुझे अपना हाथ जगन्नाथ ही करना पड़ेगा। मधु तो चूत और गांड पर हाथ भी नहीं फेरने देगी।
दूसरे दिन मैंने बाज़ार से २ स्टाइलिश ब्रा और काले रंग की पैंटी खरीदी। मधु सुबह जल्दी स्कूल चली जाती है। अनु रोज सुबह ८ बजे आ जाती है। हमारे लिए चाय नाश्ता बना देती है बाद में सफाई और बर्तन आदि साफ़ करती है। मैं ऑफिस के लिए कोई ९.३० बजे निकलता हूँ।
आज प्रोग्राम के मुताबिक मुझे ९.३० तक जाने की कोई जल्दी नहीं थी। मैं तो अपना जाल अच्छी तरह बुनता जा रहा था। मधु के जाते ही मैंने अनु को आवाज दी,“अरे मेरी अनारकली देखो वो मेज़ पर क्या रखा है !”
“साहब कोई पैकेट लगता है क्यों ?”
“देखो तो सही क्या है इसमें ?”
अनु ने पैकेट खोला तो उसमे से ब्रा , पैंटी और दो तीन खुशबू वाली फेस क्रीम देखकर वो खुश हो गई पर बोली कुछ नहीं।
वो कुछ नहीं बोली मेरी तरफ़ बस देखती रही। मैंने कहा- भई ये सब हमारी अनारकली के लिए है। कल मैंने तुमसे वादा किया था न।
उसे तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ।
“क्यों अच्छी है न ?”
“हाँ बहुत सुंदर है। मैं भी ऐसी ही चाहती थी ” अनजाने में उसके मुंह से निकल ही गया।
“देखो अपनी दीदी से मत कहना ”
“क्यों?”
“अरे वो तुम्हारे पैसे काट लेगी ”
“तो क्या आप नहीं काटोगे? छोड़ दोगे ?”
“तुम कहो तो नहीं काटूँगा … चोद दूंगा …पर ….?” मैंने जानबूझ कर छोड़ को चोद कहा था।
पर पता नहीं अनारकली ने ध्यान दिया या नहीं वो तो बस उन्हें देखने में ही लगी थी।
“पर एक शर्त है !” मैंने कहा।
“वो क्या ?”
“ये पहन कर मुझे भी दिखानी होगी ”
“इस्स्स्स्स्स ………………. ” अनु शरमाकर पैकेट लेकर बाहर की और भाग गई।
मेरा दिल उछलने लगा। या अल्लाह ……
आज के लिए इतना ही काफी था। मैंने बाथरूम में चला गया और कोई दो साल के बाद आज जमकर मुठ मारी तब जाकर पप्पू महाराज कुछ शांत हुए और मुझे ऑफिस जाने दिया।
अगले दो दिनों पता नहीं अनारकली काम पर क्यों नहीं आई। मैं तो डर ही गया। पता नहीं क्या हो गया। कहीं उसने घरवालों या मधु को कुछ बता तो नहीं दिया ? पर मेरी आशंका ग़लत निकली। उसे तो घर पर ही कुछ काम था। अपनी माँ और नए बच्चे से सम्बंधित।
पिछले दो तीन दिनों से मधु की माहवारी चल रही थी और मुझे चोदने नहीं दिया था। सेक्रेटरी भी नौकरी छोड़ गई थी।
आप को तो पता ही है हम लोग शनिवार की रात बड़ी मस्ती करते हैं। यह दिन मेरे लिए तो बहुत ख़ास होता है पर मधु के लिया सन्डे ख़राब करने वाला होता है। ऐसा इसलिए कि शनिवार को मैं मधु की गांड मारता हूँ बाकी दिनों तो वो मुझे गांड के सुराख पर अंगुली भी नहीं धरने देती।
हम लोगों ने आपस में तय कर रखा है की स्वर्ग के इस दूसरे द्वार यानि कि मधु की चूत की प्यारी पडोसन की मस्ती सिर्फ़ शनिवार को या होली, दीवाली, जन्मदिन या फ़िर शादी की वर्षगांठ पर ही की जायेगी।
दूसरे दिन हम लोग बाथरूम में साथ साथ नहाते हैं और अलग मौज मस्ती करते हैं। रविवार के दिन मधु जिस तरीके से टांगें चौड़ी करके चलती है कई बार तो मुझे हँसी आ जाती है और फ़िर रात को मैं चूत से भी हाथ धो बैठता हूँ।
इन दिनों मैं अपना लंड हाथ में लिए किसी चूत की तलाश में था और मुठ मार कर ही गुजारा कर रहा था। भगवन ने छप्पर फाड़ कर जैसे अनारकली को मेरे लिए भेज तो दिया था, पर जाल अभी कच्चा था।
पिछले एक डेढ़ महीने से मैं अपना जाल बुन रहा था। जल्दबाजी में टूट सकता था। और मेरे जैसे खिलाड़ी के लिए ये शर्म की बात होती की कोई चिडिया कच्चे जाल को तोड़ कर भाग जाए, मैं जल्दी नहीं करना चाहता था। पहले लोहा पूरा गरम कर लूँ फ़िर हथोड़ा मारूंगा।
आप सोच रहे होंगे एक नौकरानी को चोदना क्या मुश्किल काम है। थोड़ा सा लालच दो बाथरूम में पेशाब करने के बहने लंड के दर्शन करवाओ और पटक कर चोद दो। घर में सम्भव ना हो तो किसी होटल में ले जाकर रगड़ दो।
आप ग़लत सोच रहे हैं। अगर कोई झुग्गी बस्ती में रहने वाला कोई लौंडा लापड़ा हो या अनु की सोसायटी में रहने वाला हो तो कोई बात नहीं है जानवरों की पुँछ की तरह कभी भी लहंगा या साड़ी पेटीकोट उठाओ और ठोक दो। अब गुलाबो को ही लो ३८-४० साल की उमर में ५-६ बच्चों के होते हुए भी एक और बच्चा ?
हम जैसे तथाकथित पढ़े लिखे समझदार लोग अपने आप को मिडल क्लास समझाने वालों के लिए भला इस तरीके से इतनी आसानी से किसी और लड़की को कैसे चोदा जा सकता है। खैर आप क्यों परेशान हो रहे हैं।
आज शनिवार था। रिवाज के मुताबिक तो आज हमें रात भर मस्ती करनी थी पर अभी मधु को चौथा दिन ही था और अगले दो दिन और मुझे मुठ मार कर ही काम चलाना था। अनारकली को चोदना अभी कहाँ सम्भव था।
मैंने मधु को जब अपने खड़े लंड को दिखाया तो वो बोली “ऑफ़ ओ !आप तो ३-४ दिन भी नहीं रह सकते !”
“अरे तुम क्या जानो तीन दिन मतलब ७२ घंटे ४३२० मिनट और ……”
“बस बस अब सेकंड्स रहने दो ” मधु मेरी बात काटते हुए बोली।
प्लीज़ मेरी शहद रानी (मधु) आज तो बस मुंह में लेकर ही चूस लो या फ़िर मुठ ही मार दो अपने नाज़ुक हाथों से। मधु कई बार जब बहुत मूड में होती है मेरा लंड भी चूसती है और मुठ भी मार देती है। पर आज उसने लंड तो नहीं चूसा पर अपने हाथों में अपनी नई कच्छी लेकर मुठ जरूर मार दी। मेरा सारा वीर्य उसकी पेंटी में लिपट गया।
मधु जब हाथ धोने बाथरूम गई तो मेरे दिमाग में एक योज़ना आई। मैंने वो पेंटी गेस्ट रूम से लगे कोमन बाथरूम में डाल दी। अनारकली इसी बाथरूम में कपड़े धोती है।
दूसरे दिन रविवार था। मधु और मैं देरी से उठे थे। अनारकली रसोई में चाय बना रही थी।
चाय पीकर मधु जब बाथरूम चली गई तो मैंने अनारकली से कहा, “अनारकली तुमने जो वादा किया था उसका क्या हुआ?”
“कौन सा वादा साहब?”
“अरे इतना जल्दी भूल गई वो पैंटी और ब्रा पहन कर नहीं दिखानी??”
“ओह … वो … इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स …………..” वो एक बार फिर शरमा गई। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।
“उईई माँ ………….” वो जोर से चिल्लाई। अगर मधु बाथरूम में न होती तो जरूर सुन लेती। “वो … वो … मधु … दीदी …” मैंने इधर उधर देखा इतने में तो वो रसोई की और भाग चुकी थी।
मेरा आज का आधा काम हो गया था। बाकी का आधा काम कपड़े धोते समय अपने आप हो जाएगा।
नाश्ता आदि बनने के बाद जब अनारकली बाथरूम में कपड़े धोने जाने लगी तो मेरी आँखें उसका ही पीछा कर रही थी। वो जब बाथरूम में घुसी तो मैं जानता था उसकी नज़र सीधी पेंटी पर ही पड़ी होगी। उसने इधर उधर देखा। मैं अखबार में मुंह छिपाए उसे ही देख रहा था। जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया मैं बाथरूम की ओर भागा।
मधु अभी बेडरूम में ही थी। मैं जानता था उसे अभी आधा घंटा और लगेगा। मैंने बाथरूम के की होल से देखा तो मेरी बांछे ही खिल गई। योजना के मुताबिक ही हुआ। अनारकली ने वोही पेंटी हाथ में पकड़ रखी थी और बड़े ध्यान से उस पर लगे कम को देख रही थी।
पता नहीं उसे क्या सूझा, एक उंगली कम में डुबोई और नाक के पास लेजा कर पहले तो सुंघा फ़िर उसे मुंह में लेकर चाटा।
अपनी आँखें बंद कर ली और एक सीत्कार सी लेने लगी। फ़िर उसने अपनी सलवार उतार दी। हे भगवन उस काली पैन्टी में उसकी भरपूर जांघे बिल्कुल मक्खन मलाई गोरी चिट्टी। और २ इंच की पट्टी के दोनों ओर झांटे छोटे छोटे काले बाल। डबल रोटी की तरह फूली हुई उसकी बुर।
वो रुकी नहीं उसने पेंटी नीचे सरकाई और उसकी काले रेशमी बालों से लकदक चूत नुमाया (प्रकट) हो गई। चूत के मोटे मोटे बाहरी होंठ। अन्दर के होंठ पतले थोड़े काले और कोफी रंग के आपस में चिपके हुए। चूत का चीरा कोई ४ इंच का तो होगा। संगमरमरी जांघों के बीच दबी उसकी चूत साफ़ दिख रही थी। लाजवाब जांघें और दांई जांघ पर काला तिल।
पूरी क़यामत।
उसने धीरे से अपनी अंगुलिओं से अपनी चूत की दोनों फांकों को खोला जैसे कोई तितली अपने छोटे छोटे पंख फैलाती है, अन्दर से लाल चट्ट उसकी चूत का छेद साफ़ नज़र आने लगा।
अनु ने एक अंगुली पर थूक लगाया और फ़िर गच से अपनी चूत के नाज़ुक छेद में अन्दर डाल दी और जोर से एक सीत्कार मारी। फ़िर उसने धड़ धड़ अपनी अंगुली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी।
उसकी काले झांटो से भरी चूत और मोटे मोटे नितम्बों को देखकर मेरा दिल तो गाना ही गाने लगा “ये काली काली झांटे ये गोरी गोरी गांड !”
कोई १० मिनट तक वो अपनी अंगुली अन्दर बाहर करती रही। फ़िर एक किलकारी मारते हुए वो झड़ गई। अपनी अंगुली भी उसने एक बार चाटी और अचार की तरह चटकारा लेते हुए अपनी पैंटी पहन ली।
अब वहां रुकने का कोई अर्थ नहीं था। मैं दौड़ कर वापस ड्राइंग रूम में आ गया। मेरा जाल पक्का बन गया था और शिकार ने चारे की ओर बढ़ना शुरू कर दिया था।
आज तो छठा दिन (माहवारी का छठा) दिन … नहीं रात थी और मैं मधु को कहाँ छोड़ने वाला था। मैंने पूरी तैयारी कर ली थी। आज मैंने कस कस कर २ बार उसकी चूत मारी और एक बार गांड। मधु तो जैसे बेहोश होते होते बची। पता नहीं ये औरतें गांड मरवाने में इतना नखरा क्यों करती हैं।
गुरूजी कहते हैं “औरत के तीन छेद होते हैं और तीनो ही छेदों का मज़ा लेना चाहिए। चूत, गांड और मुंह। इसीलिए उसने मनुष्य जन्म लिया है। क्या आपने कभी दूसरे प्राणियों को गुदा मैथुन करते हुए देखा है ये गुण तो भगवन ने सिर्फ़ मनुष्य जाति को ही दिया है।”
वो कहते हैं ना “जिस आदमी ने लाहौर नहीं देखा और अपनी बीवी की गांड नहीं मारी वो समझो जीया ही नहीं।"
चलो लाहौर देखने की तो मजबूरी हो सकती है गांड मारने में कैसी लापरवाही। जो औरतें गांड नहीं मरवाती वो अगले जन्म में किन्नर या खच्चर बनती हैं और सम्भोग नहीं कर पाती। आप तो जानते ही हैं कि खच्चर सम्भोग नहीं कर सकते और किन्नर सिर्फ़ गांड ही मरवा सकते हैं सम्भोग नहीं कर सकते।
अब ये आपके ऊपर है कि अगले जन्म में आप क्या बनाना चाहते हैं और ऊपर जाकर भगवान को क्या मुंह दिखाओगे या दिखाओगी ….”
उस दिन अनारकली ने तो जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। मधु ने बताया कि घरवाले अनु का अगले महीने गौना करने वाले हैं। हे भगवन जाल में फंसी मछली क्या इतनी जल्दी निकल जायेगी। हाथ आया शिकार छिटक जाएगा।
मैंने मधु से कहा,“पर अनारकली तो अभी छोटी ही है। अभी तो मुश्किल से १७-१८ की हुई होगी!” मैं जानता हूँ वो एक साथ दो दो लंड अपनी चूत और गांड में लेने लायक बन गई है पर मधु के सामने तो उसे बच्ची ही कहना ठीक था।
“अरे आप इन लोगों की परेशानी नहीं जानते। गरीब की लुगाई हरेक की भाभी होती है। जवान होने से पहले ही मोहल्ले, पड़ोस और रिश्तदारों के लौंडे लपाड़े तो क्या घर के लोग ही उनका यौन शोषण कर लेते हैं। चाचा, ताऊ, जीजा, फूफा यहाँ तक कि उसके सगे भाई और बाप भी कई बार तो नहीं छोड़ते हैं।” मधु ने बताया।
“पर अनारकली को तो ऐसी कोई समस्या थोड़े ही है। तुम गुलाबो को समझाने कि कोशिश क्यों नहीं करती ?” मैंने कहा।
“तुम नहीं जानते उसका बाप एक नम्बर का शराबी और चुद्दकड़ है। अनु बता रही थी कि कल उसकी मासी घर आई थी उसके बापू ने उसे पकड़ लिया था। मासी ने शोर मचा कर अपने आप को छुड़ाया। अनु डर रही थी कि कहीं उसे ही ना ….”
मैं तो सुनकर ही हक्का बक्का रह गया। एक और मैं अनारकली को चोदने के चक्कर में लगा था और दूसरी और उसका बाप ही उसकी वाट लगाने पर तुला था। अगर उसका गौना हो गया तो मेरी पिछले २ महीनों की सारी मेहनत बेकार चली जायेगी। मेरा तो मूड ही ख़राब हो गया।
गुरूजी कहते हैं “समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कभी नहीं मिलता ” पता नहीं भाग्य में कब कहाँ कैसे क्या लिखा है।
उस दिन शाम को मधु ने बताया कि उसकी मम्मी की तबियत ठीक नहीं है। भइया का फ़ोन आया था वो भी जा रहे हैं और मुझे भी जयपुर जाना पड़ेगा। अब ग्वालियर से जयपुर कोई ज्यादा दूर तो है नहीं मैंने झटपट दूसरे दिन ही उसकी रेल की टिकेट कन्फर्म करवा दी। मैंने ऑफिस में जरूरी काम का परफेक्ट बहाना बना दिया।
उसने जाते हुए अनु को मेरा ध्यान रखने को समझाया कि कब नाश्ता देना है, खाना कब देना है, क्या क्या बनाना है। बस तीन चार दिनों की बात है। मजबूरी है। किसी तरह काट लेना।
मैंने मन में भगवान का धन्यवाद किया और थोड़ी सी आशा मन में जगी कि अब अनार को अनारकली बनने का माकूल (सही) समय आ गया है।
मैंने स्टेशन पर उसे छोड़ते समय इतनी बढ़िया एक्टिंग की जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से बिछुड़ रहा हो। अगर दिलीप कुमार उस वक्त देख लेता तो कहता मधुमती में उसकी एक्टिंग भी ऐसी नहीं थी। मधु एक बार तो बोल ही पड़ी कि “वैसे भइया तो जा ही रहे हैं तुम मेरे बिना इतने उदास हो रहे हो तो मैं जाना कैंसिल कर दूँ?”
मैं घबरा गया अच्छी एक्टिंग भी कई बार महंगी पड़ जाती है। मैंने कहा “अरे बूढा शरीर है ऐसे समय में जाना जरूरी होता है। कल को कोई ऐसी वैसी बात हो गई तो हमें जिन्दगी भर पछतावा रहेगा तुम मेरी चिंता छोडो किसी तरह ३-४ दिन तुम्हारे बिना काट ही लूँगा पर लौटने में देरी कर दी तो मुझे जरूरी काम छोड़ कर भी तुम्हे लेने आना पडेगा हनी डार्लिंग !”
आप तो जानते ही है जब मुझे मधु को गोली पिलानी होती है मैं उसे हनी कहता हूँ। मधु ने मेरी और ऐसे देखा जैसे मैं कोई शहजादा सलीम हूँ और वो अनारकली जो मुझसे दूर जा रही है।
रात अनारकली के सपनों में ही बीत गई। सुबह मुझे अनारकली की मीठी आवाज ने जगाया। वो आते ही बोली “दीदी के पहुँचने का फोन आया क्या ..??”
“क्यों हम अकेले अच्छे नहीं लगते क्या ?”
“ओह … वो ..वो .. बात नहीं …” अनारकली थोड़ा झिझकते हुए बोली “आपके लिए चाय बनाऊं ?”
“नहीं पहले मेरे पास बैठो मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है ” मैंने आज पहली बार उसे बेड पर अपने पास बैठाया।
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अब अनारकली को देखो, साली ने पूरे २ महीने से मुझे अपने पीछे शौदाई सलीम (पागल) बना कर रखा था। पुट्ठे पर हाथ ही नहीं धरने देती थी। रगड़ने का तो दूर चूमा-चाटी का भी कोई मौका आता तो वो हर बार कुछ ऐसा करती कि गीली मछली की तरह मेरे हाथ से फिसल ही जाती थी।
अकेले में एक दो बार उसके अनारों को भींचने या गालों को छूने या चुम्मा लेने के अलावा मैं ज्यादा कुछ नहीं कर पाया था। पर मैंने भी सोच लिया था कि उसे प्रेम की अनारकली बना कर ही दम लूँगा। साली अपने आप को सलीम वाली अनारकली से कम नहीं समझती। मैंने भी सोच लिया था चूत मारूँ या न मारूं पर एक बार उसकी मटकती गांड जरूर मारूंगा।
आप सोच रहे होंगे अनारकली तो सलीम की थी फ़िर ये नई अनारकली कौन है। दर असल अनार हमारी नौकरानी गुलाबो की लड़की है। उसके घरवाले और मधु (मेरी पत्नी) उसे अनु और मैं अनारकली बुलाता हूँ। अनार के अनारकली बनने की कहानी आप जरूर सुनना चाहेंगे।
अनार नाम बड़ा अजीब सा है ना। दर असल जिस रात वो पैदा हुई थी उसके बाप ने उसकी अम्मा को खाने के लिए अनार लाकर दिए थे तो उसने उसका नाम ही अनार रख दिया।
अनु कोई १८-१९ साल की हुई है पर है एकदम बम्ब पटाखा पूरा ७.५ किलो आर डी एक्स। ढाई किलो ऊपर और उम्मीद से दुगना यानि ५ किलो नीचे। नहीं समझे अरे यार उसके स्तन और नितम्ब। क्या कयामत है साली। गोरा रंग मोटी मोटी आँखे, काले लंबे बाल, भरे पूरे उन्नत उरोज, भरी पर सुडोल जांघें पतली कमर। और सबसे बड़ी दौलत तो उसके मोटे मोटे मटकते कूल्हे हैं।
आप सोच रहे होंगे इसमे क्या खास बात है कई लड़कियों के नितम्ब मोटे भी होते है तो दोस्तों आप ग़लत सोच रहे हैं। अगर एक बार कोई देख ले तो मंत्रमुग्ध होकर उसे देखता ही रह जाए। खुजराहो के मंदिरों की मूर्तियों जैसी गांड तो ऐसे मटका कर चलती जैसे दीवानगी में 'उर्मिला मातोंडकर' चलती है। नखरे तो इतने कि पूछो मत।
अगर एक बार उसे देख लें तो 'उर्मिला मातोंडकर' या 'शेफाली छाया' को भूल जायेंगे। और फ़िर मैं तो नितम्बों का मुरीद (प्रेम पुजारी) हूँ।
कभी कभी तो मुझे शक होता है इसकी माँ गुलाबो तो चलो ठीक ठाक है, हो सकता है जवानी में थोड़ी सुंदर भी रही होगी पर बाप तो काला कलूटा है। तो फ़िर ये इंतनी गोरी चिट्टी कैसे है। लगता है कहीं गुलाबो ने भी अपनी जवानी में मेरे जैसे किसी प्रेमी भंवरे से अपनी गुलाब की कली मसलवा ली होगी।
खैर छोड़ो इन बातों को हम तो अनु के अनारकली बनने की बात कर रहे थे।
अरे नए पाठकों को अपना परिचय तो दे दूँ। मैं प्रेम गुरु माथुर। उमर ३२ साल। जानने वाले और मेरे पाठक मुझे प्रेम गुरु बुलाते हैं। मैं एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता हूँ।
मेरे लंड का आकार लगभग ७” है। सुपारा ज्यादा बड़ा नहीं है पर ऐसे सुपाड़े और लंड गांड मारने के लिए बड़े मुफीद (उपयुक्त) होते हैं। मेरे लंड के सुपाड़े पर एक तिल भी है। पता नहीं आप जानते हैं या नहीं ऐसे आदमी बड़े चुद्दकड़ होते हैं और गांड के शौकीन।
मेरी पत्नी मधुर (मधु ) आयु २८ साल बला की खूबसूरत ३६-२८-३६ मिश्री की डली ही समझो, चुदाई में बिल्कुल होशियार। पर आप तो हम भंवरों की कैफियत (आदत) जानते ही हैं कभी भी एक फूल से संतुष्ट नहीं होते।
एक बात समझ नहीं आती साली ये पत्नियाँ पता नहीं इतनी इर्ष्यालू क्यों होती हैं जहाँ भी कोई खूबसूरत लड़की या औरत देखी और अपने मर्द को उनकी और जरा सा भी उनपर नज़रें डालते हुए देख लिया तो यही सोचती रह्रती हैं कि जरूर ये उसे चोदना चाहते हैं।
कमोबेश मधु की भी यही हालत थी। अनार को अनारकली बनाने में मेरी सबसे बड़ी दिक्कत तो मधु ही थी। मुझे तो हैरत होती है पूरी छान बीन किए बिना उसने गुलाबो को कैसे काम पर रख लिया जिसके यहाँ आर डी एक्स जैसी चीज भी है जिसका नाम अनार है।
मुझे तो कई दिनों के बाद पता चला था कि अनु बहुत अच्छी डांसर है। मधु बहुत अच्छी डांसर है। शादी के बाद स्कूल कार्यक्रम को छोड़ कर उसे कोई कम्पीटीशन में तो नाचने का मौका नहीं मिला पर घर पर वो अभ्यास करती रहती और अनु भी साथ होती है।
अनु तो १०-१५ दिनों में ही उससे इतना घुलमिल गई थी कि अपनी सारी बातें मधु उससे करने लग गई थी। दो दो घंटे तक पता नहीं वो सर जोड़े क्या खुसर फुसर करती रहती हैं।
वैसे तो ये कभी कभार ही आती थी और मैंने पहले कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया। आप ये जरूर सोच रहे होंगे ये कैसे हो सकता है। कोई खूबसूरत फूल आस पास हो और मेरी नज़र से बच जाए ये कैसे हो सकता है। दर असल उन दिनों मेरा चक्कर अपनी खूबसूरत सेक्रेटरी से चल रहा था।
लेकिन जबसे गुलाबो बीमार हुई है पिछले एक महीने से अनार ही हमारे यहाँ काम करने आ रही है। मुझे तो बाद में पता चाल जब मधु ने बताया कि गुलाबो के फ़िर लड़की हुई है।
कमाल है ३८-४० साल की उमर में ५-६ बच्चों के होते हुए भी एक और बच्चा ? अगर माँ इतनी चुद्दकड़ है तो बेटी कैसी होगी !
माँ पर बेटी नस्ल पर घोड़ी !
ज्यादा नहीं तो थोड़ी थोड़ी !!
एक दिन जब मैं बाथरूम से निकल रहा था तो अनु अपनी चोटी हाथ में पकड़े घुमाते हुए गाना गाते लगभग तेजी से अन्दर आ रही थी_
मैं चली मैं चली देखो प्यार की गली !
मुझे रोके ना कोई मैं चली मैं चली !!
वो अपनी धुन में थी अचानक मैं सामने आ गया तो वो मुझसे टकरा गई। उसके गाल मेरे होंठो को छू गए और स्तन भी सीने से छू कर गए। मैंने उसकी चोटी पकड़ते हुए कहा “कहाँ चली मेरी अनु रानी कहीं सचमुच ससुराल तो नहीं जा रही थी?”
वो शरमा कर अन्दर भाग गई। हाय अल्लाह …. क्या कमायत है साली। मैं भी कितना गधा था इतने दिन इस आर डी एक्स पर ध्यान ही नहीं दिया।
उस दिन के बाद मैंने अनु को चोदने का जाल बुनना शुरू कर दिया। अनु ने तो मधु पर पता नहीं क्या जादू कर दिया था कि वो उसे अपनी छोटी बहन ही समझने लगी थी।
अनु भी लगभग सारे दिन हमारे घर में मंडराती रहती थी हलाँकि वो एक दो जगह पर और भी काम करती थी। मधु ने उसे अपनी पुरानी साड़ियां, चप्पल, सूट, मेक-अप का सामान आदि देना शुरू कर दिया। उसे अपनी पहनी पैंटी ब्रा और अल्लम-गल्लम चीजें भी देती रहती थी।
अनु हमारे यहाँ झाडू पोंछा बर्तन सफाई कपड़े आदि सब काम करती थी। कभी कभी रसोई में भी मदद करती थी। वो तो यही चाहती थी कि किसी तरह यहीं बनी रहे। मैं शुरूआत में जल्दी नहीं करना चाहता था।
जब वो ड्राइंग रूम में झाडू लगाती तो उसके रसभरे संतरे ब्लाउज के अन्दर से झांकते साफ़ दिख जाते थे। पर निप्पल और एरोला नहीं दिखते थे पर उसकी गोलाइयों के हिसाब से अंदाजा लगना कहाँ मुश्किल था। मेरा अंदाजा है कि एक रुपये के सिक्के से ज्यादा बड़ा उसका एरोला नहीं होगा। सुर्ख लाल या थोड़ा सा बादामी। उसकी घुंडी तो कमाल की होगी।
मधु के तो अब अंगूर बन गए है और चूसने में इतना मज़ा अब नहीं आता। पता नहीं इन रस भरे आमों को चूसने का मौका कब नसीब होगा। शुरू शुरू में मैं जल्दबाजी से काम नहीं लेना चाहता था। अनु इन सब से शायद बेखबर थी।
आज शायद उसने मधु की दी हुई ब्रा पहनी थी जो उसके के लिए ढीली थी। झाडू लगाते हुए जब वो झुकी तो मैंने देख लिया था। मेरी नज़रें तो बस उन कबूतरों पर टिकी रह गई। मुझे तो होश तब आया जब मेरे कानों में आवाज आई, “साहब अपने पैर उठाओ मुझे झाडू लगानी है।” अनु ने झुके हुए ही कहा।
“आंऽऽ हाँ ” मैंने झेंपते हुए कहा। मैं सोच रहा था कहीं उसने मुझे ऐसा करते पकड़ तो नहीं लिया। लेकिन उसके चेहरे से ऐसा कुछ नहीं लगा और अगर ऐसा हुआ भी है तो चलो आगाज तो अच्छा है। मेरा लंड तो पजामे के अन्दर उछल कूद मचाने लगा था। मैंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। पजामे के बाहर उसका उभार साफ़ नज़र आ रहा था।
मधु ने उसको समझा दिया था कि वो उसे (मधु को) दीदी बुलाया करेगी और मुझे भइया।
मै तो सोच रहा था कि जब मधु उसकी दीदी हुई तो वो मेरी साली हुई ना और मैं उसका जीजा, मुझे भइया की जगह सैयां नहीं तो कम से कम जीजू ही बुलाये। ताकि साली पर आधा हक, जो जीजू का होता ही है, मेरा भी हो जाए, पर मैं तो लड्डू पूरा खाने में विश्वास रखता हूँ। पर मधु के हिसाब से साहब ही कहलवाना ठीक था मैं मरता क्या करता।
मधु इस समय बाथरूम में थी। आज वो अकेले ही नहा रही थी। कोई बात नहीं कभी कभी अकेले नहाना भी सेहत के लिए अच्छा होता है। मेरा अनार से बात करने का मूड हो आया “अनु ! चाय तो पिला दो एक कप ”
“हाँ … बनाती हूँ ” अनु ने कोयल जैसी मीठी आवाज में कहते हुए मेरी और इस तरह से देखा जैसे कह रही हो चाय क्या पीनी है कुछ और भी पी लो। वो कमर पर हाथ रखे खड़ी थी चाय बनाने नहीं गई।
“अरे अनु ! आज ये तुमने ढीले ढीले कपड़े क्यों पहन रखे हैं?”
“नहीं ! ढीले कहाँ हैं? ठीक तो हैं! ” उसने अपना कुरता नीचे खींचते हुए कहा।
“अरे ये ब्रा कितनी ढीली है ! इसके स्ट्रेप्स दिख रहे हैं !” मैंने हँसते हुए कहा।
“धत … आप भी !” वो शरमा गई।
!! या अल्लाह … क्या अदा है !!
“क्यों मैंने झूठ कहा?”
“वो दीदी भी यही कह रही थी !” वो अपनी आँखें नीची किए बोली।
“तो अपने साइज़ की पहना करो न उनमें तुम बहुत सुंदर लगोगी। ”
“पर हमारे पास इतने पैसे कहाँ हैं नई ब्रा खरीदने के लिए ?”
“कोई बात नहीं इतनी सी बात मैं तुम्हारे लिए ला दूंगा म ऽऽ म् … मेरा मतलब मधु से कह दूंगा ”
“पर दीदी … पैसे .. ??”
“अरे तुम पैसों की क्यों चिंता करती हो बाद में दे देना ” मैंने मुस्कुराते हुए कहा। मेरा कुतुबमीनार पजामे के अन्दर उफन रहा था और बाहर आने को मचलने लगा। मैंने जल्दी से अखबार गोद में रख लिया नहीं तो अनु जरूर देख लेती और मेरे इरादों की भनक उसे लग जाती तो आगाज (श्री गणेश) ही ख़राब हो जाता। पर मैं तो इस मामले में पूरा खिलाड़ी हूँ।
अनु रसोई में चली गई। मधु बाथरूम में थी। मेरा मन किया उसके साथ नहा ही लिया जाए। मौसम भी है, मौका भी अच्छा है और लंड भी कुतुबमीनार बना है। मैं जैसे ही उठा सामने से मधु अपने बाल तौलिए से रगड़ते हुए बाथरूम से निकल कर मेरी ओर ही आ रही थी। मैंने मधु की ओर आँख मारी और सीटी बजाने के अंदाज़ में ओये होए कहा।
मेरे इस इशारे को वो अच्छी तरह जानती थी। जब हम लोग कामातुर हैं मतलब चुदाई की इच्छा होती है इसी तरह सीटी बजाते हैं। मैंने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो वो मुझे परे धकेलते हुए बोली,“हटो लाल बाई आ गई है।”
पहले तो मैं कुछ समझा नहीं मैंने सोचा कहीं वो गुलाबो की बात तो नहीं कर रही पर बाद में जब उसके माहवारी की और इशारे को समझा तो मेरा सारा उत्साह ही ठंडा पड़ गया। अब तो ५-६ दिन मुझे अपना हाथ जगन्नाथ ही करना पड़ेगा। मधु तो चूत और गांड पर हाथ भी नहीं फेरने देगी।
दूसरे दिन मैंने बाज़ार से २ स्टाइलिश ब्रा और काले रंग की पैंटी खरीदी। मधु सुबह जल्दी स्कूल चली जाती है। अनु रोज सुबह ८ बजे आ जाती है। हमारे लिए चाय नाश्ता बना देती है बाद में सफाई और बर्तन आदि साफ़ करती है। मैं ऑफिस के लिए कोई ९.३० बजे निकलता हूँ।
आज प्रोग्राम के मुताबिक मुझे ९.३० तक जाने की कोई जल्दी नहीं थी। मैं तो अपना जाल अच्छी तरह बुनता जा रहा था। मधु के जाते ही मैंने अनु को आवाज दी,“अरे मेरी अनारकली देखो वो मेज़ पर क्या रखा है !”
“साहब कोई पैकेट लगता है क्यों ?”
“देखो तो सही क्या है इसमें ?”
अनु ने पैकेट खोला तो उसमे से ब्रा , पैंटी और दो तीन खुशबू वाली फेस क्रीम देखकर वो खुश हो गई पर बोली कुछ नहीं।
वो कुछ नहीं बोली मेरी तरफ़ बस देखती रही। मैंने कहा- भई ये सब हमारी अनारकली के लिए है। कल मैंने तुमसे वादा किया था न।
उसे तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ।
“क्यों अच्छी है न ?”
“हाँ बहुत सुंदर है। मैं भी ऐसी ही चाहती थी ” अनजाने में उसके मुंह से निकल ही गया।
“देखो अपनी दीदी से मत कहना ”
“क्यों?”
“अरे वो तुम्हारे पैसे काट लेगी ”
“तो क्या आप नहीं काटोगे? छोड़ दोगे ?”
“तुम कहो तो नहीं काटूँगा … चोद दूंगा …पर ….?” मैंने जानबूझ कर छोड़ को चोद कहा था।
पर पता नहीं अनारकली ने ध्यान दिया या नहीं वो तो बस उन्हें देखने में ही लगी थी।
“पर एक शर्त है !” मैंने कहा।
“वो क्या ?”
“ये पहन कर मुझे भी दिखानी होगी ”
“इस्स्स्स्स्स ………………. ” अनु शरमाकर पैकेट लेकर बाहर की और भाग गई।
मेरा दिल उछलने लगा। या अल्लाह ……
आज के लिए इतना ही काफी था। मैंने बाथरूम में चला गया और कोई दो साल के बाद आज जमकर मुठ मारी तब जाकर पप्पू महाराज कुछ शांत हुए और मुझे ऑफिस जाने दिया।
अगले दो दिनों पता नहीं अनारकली काम पर क्यों नहीं आई। मैं तो डर ही गया। पता नहीं क्या हो गया। कहीं उसने घरवालों या मधु को कुछ बता तो नहीं दिया ? पर मेरी आशंका ग़लत निकली। उसे तो घर पर ही कुछ काम था। अपनी माँ और नए बच्चे से सम्बंधित।
पिछले दो तीन दिनों से मधु की माहवारी चल रही थी और मुझे चोदने नहीं दिया था। सेक्रेटरी भी नौकरी छोड़ गई थी।
आप को तो पता ही है हम लोग शनिवार की रात बड़ी मस्ती करते हैं। यह दिन मेरे लिए तो बहुत ख़ास होता है पर मधु के लिया सन्डे ख़राब करने वाला होता है। ऐसा इसलिए कि शनिवार को मैं मधु की गांड मारता हूँ बाकी दिनों तो वो मुझे गांड के सुराख पर अंगुली भी नहीं धरने देती।
हम लोगों ने आपस में तय कर रखा है की स्वर्ग के इस दूसरे द्वार यानि कि मधु की चूत की प्यारी पडोसन की मस्ती सिर्फ़ शनिवार को या होली, दीवाली, जन्मदिन या फ़िर शादी की वर्षगांठ पर ही की जायेगी।
दूसरे दिन हम लोग बाथरूम में साथ साथ नहाते हैं और अलग मौज मस्ती करते हैं। रविवार के दिन मधु जिस तरीके से टांगें चौड़ी करके चलती है कई बार तो मुझे हँसी आ जाती है और फ़िर रात को मैं चूत से भी हाथ धो बैठता हूँ।
इन दिनों मैं अपना लंड हाथ में लिए किसी चूत की तलाश में था और मुठ मार कर ही गुजारा कर रहा था। भगवन ने छप्पर फाड़ कर जैसे अनारकली को मेरे लिए भेज तो दिया था, पर जाल अभी कच्चा था।
पिछले एक डेढ़ महीने से मैं अपना जाल बुन रहा था। जल्दबाजी में टूट सकता था। और मेरे जैसे खिलाड़ी के लिए ये शर्म की बात होती की कोई चिडिया कच्चे जाल को तोड़ कर भाग जाए, मैं जल्दी नहीं करना चाहता था। पहले लोहा पूरा गरम कर लूँ फ़िर हथोड़ा मारूंगा।
आप सोच रहे होंगे एक नौकरानी को चोदना क्या मुश्किल काम है। थोड़ा सा लालच दो बाथरूम में पेशाब करने के बहने लंड के दर्शन करवाओ और पटक कर चोद दो। घर में सम्भव ना हो तो किसी होटल में ले जाकर रगड़ दो।
आप ग़लत सोच रहे हैं। अगर कोई झुग्गी बस्ती में रहने वाला कोई लौंडा लापड़ा हो या अनु की सोसायटी में रहने वाला हो तो कोई बात नहीं है जानवरों की पुँछ की तरह कभी भी लहंगा या साड़ी पेटीकोट उठाओ और ठोक दो। अब गुलाबो को ही लो ३८-४० साल की उमर में ५-६ बच्चों के होते हुए भी एक और बच्चा ?
हम जैसे तथाकथित पढ़े लिखे समझदार लोग अपने आप को मिडल क्लास समझाने वालों के लिए भला इस तरीके से इतनी आसानी से किसी और लड़की को कैसे चोदा जा सकता है। खैर आप क्यों परेशान हो रहे हैं।
आज शनिवार था। रिवाज के मुताबिक तो आज हमें रात भर मस्ती करनी थी पर अभी मधु को चौथा दिन ही था और अगले दो दिन और मुझे मुठ मार कर ही काम चलाना था। अनारकली को चोदना अभी कहाँ सम्भव था।
मैंने मधु को जब अपने खड़े लंड को दिखाया तो वो बोली “ऑफ़ ओ !आप तो ३-४ दिन भी नहीं रह सकते !”
“अरे तुम क्या जानो तीन दिन मतलब ७२ घंटे ४३२० मिनट और ……”
“बस बस अब सेकंड्स रहने दो ” मधु मेरी बात काटते हुए बोली।
प्लीज़ मेरी शहद रानी (मधु) आज तो बस मुंह में लेकर ही चूस लो या फ़िर मुठ ही मार दो अपने नाज़ुक हाथों से। मधु कई बार जब बहुत मूड में होती है मेरा लंड भी चूसती है और मुठ भी मार देती है। पर आज उसने लंड तो नहीं चूसा पर अपने हाथों में अपनी नई कच्छी लेकर मुठ जरूर मार दी। मेरा सारा वीर्य उसकी पेंटी में लिपट गया।
मधु जब हाथ धोने बाथरूम गई तो मेरे दिमाग में एक योज़ना आई। मैंने वो पेंटी गेस्ट रूम से लगे कोमन बाथरूम में डाल दी। अनारकली इसी बाथरूम में कपड़े धोती है।
दूसरे दिन रविवार था। मधु और मैं देरी से उठे थे। अनारकली रसोई में चाय बना रही थी।
चाय पीकर मधु जब बाथरूम चली गई तो मैंने अनारकली से कहा, “अनारकली तुमने जो वादा किया था उसका क्या हुआ?”
“कौन सा वादा साहब?”
“अरे इतना जल्दी भूल गई वो पैंटी और ब्रा पहन कर नहीं दिखानी??”
“ओह … वो … इस्स्स्स्स्स्स्स्स्स …………..” वो एक बार फिर शरमा गई। मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।
“उईई माँ ………….” वो जोर से चिल्लाई। अगर मधु बाथरूम में न होती तो जरूर सुन लेती। “वो … वो … मधु … दीदी …” मैंने इधर उधर देखा इतने में तो वो रसोई की और भाग चुकी थी।
मेरा आज का आधा काम हो गया था। बाकी का आधा काम कपड़े धोते समय अपने आप हो जाएगा।
नाश्ता आदि बनने के बाद जब अनारकली बाथरूम में कपड़े धोने जाने लगी तो मेरी आँखें उसका ही पीछा कर रही थी। वो जब बाथरूम में घुसी तो मैं जानता था उसकी नज़र सीधी पेंटी पर ही पड़ी होगी। उसने इधर उधर देखा। मैं अखबार में मुंह छिपाए उसे ही देख रहा था। जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया मैं बाथरूम की ओर भागा।
मधु अभी बेडरूम में ही थी। मैं जानता था उसे अभी आधा घंटा और लगेगा। मैंने बाथरूम के की होल से देखा तो मेरी बांछे ही खिल गई। योजना के मुताबिक ही हुआ। अनारकली ने वोही पेंटी हाथ में पकड़ रखी थी और बड़े ध्यान से उस पर लगे कम को देख रही थी।
पता नहीं उसे क्या सूझा, एक उंगली कम में डुबोई और नाक के पास लेजा कर पहले तो सुंघा फ़िर उसे मुंह में लेकर चाटा।
अपनी आँखें बंद कर ली और एक सीत्कार सी लेने लगी। फ़िर उसने अपनी सलवार उतार दी। हे भगवन उस काली पैन्टी में उसकी भरपूर जांघे बिल्कुल मक्खन मलाई गोरी चिट्टी। और २ इंच की पट्टी के दोनों ओर झांटे छोटे छोटे काले बाल। डबल रोटी की तरह फूली हुई उसकी बुर।
वो रुकी नहीं उसने पेंटी नीचे सरकाई और उसकी काले रेशमी बालों से लकदक चूत नुमाया (प्रकट) हो गई। चूत के मोटे मोटे बाहरी होंठ। अन्दर के होंठ पतले थोड़े काले और कोफी रंग के आपस में चिपके हुए। चूत का चीरा कोई ४ इंच का तो होगा। संगमरमरी जांघों के बीच दबी उसकी चूत साफ़ दिख रही थी। लाजवाब जांघें और दांई जांघ पर काला तिल।
पूरी क़यामत।
उसने धीरे से अपनी अंगुलिओं से अपनी चूत की दोनों फांकों को खोला जैसे कोई तितली अपने छोटे छोटे पंख फैलाती है, अन्दर से लाल चट्ट उसकी चूत का छेद साफ़ नज़र आने लगा।
अनु ने एक अंगुली पर थूक लगाया और फ़िर गच से अपनी चूत के नाज़ुक छेद में अन्दर डाल दी और जोर से एक सीत्कार मारी। फ़िर उसने धड़ धड़ अपनी अंगुली अन्दर बाहर करनी शुरू कर दी।
उसकी काले झांटो से भरी चूत और मोटे मोटे नितम्बों को देखकर मेरा दिल तो गाना ही गाने लगा “ये काली काली झांटे ये गोरी गोरी गांड !”
कोई १० मिनट तक वो अपनी अंगुली अन्दर बाहर करती रही। फ़िर एक किलकारी मारते हुए वो झड़ गई। अपनी अंगुली भी उसने एक बार चाटी और अचार की तरह चटकारा लेते हुए अपनी पैंटी पहन ली।
अब वहां रुकने का कोई अर्थ नहीं था। मैं दौड़ कर वापस ड्राइंग रूम में आ गया। मेरा जाल पक्का बन गया था और शिकार ने चारे की ओर बढ़ना शुरू कर दिया था।
आज तो छठा दिन (माहवारी का छठा) दिन … नहीं रात थी और मैं मधु को कहाँ छोड़ने वाला था। मैंने पूरी तैयारी कर ली थी। आज मैंने कस कस कर २ बार उसकी चूत मारी और एक बार गांड। मधु तो जैसे बेहोश होते होते बची। पता नहीं ये औरतें गांड मरवाने में इतना नखरा क्यों करती हैं।
गुरूजी कहते हैं “औरत के तीन छेद होते हैं और तीनो ही छेदों का मज़ा लेना चाहिए। चूत, गांड और मुंह। इसीलिए उसने मनुष्य जन्म लिया है। क्या आपने कभी दूसरे प्राणियों को गुदा मैथुन करते हुए देखा है ये गुण तो भगवन ने सिर्फ़ मनुष्य जाति को ही दिया है।”
वो कहते हैं ना “जिस आदमी ने लाहौर नहीं देखा और अपनी बीवी की गांड नहीं मारी वो समझो जीया ही नहीं।"
चलो लाहौर देखने की तो मजबूरी हो सकती है गांड मारने में कैसी लापरवाही। जो औरतें गांड नहीं मरवाती वो अगले जन्म में किन्नर या खच्चर बनती हैं और सम्भोग नहीं कर पाती। आप तो जानते ही हैं कि खच्चर सम्भोग नहीं कर सकते और किन्नर सिर्फ़ गांड ही मरवा सकते हैं सम्भोग नहीं कर सकते।
अब ये आपके ऊपर है कि अगले जन्म में आप क्या बनाना चाहते हैं और ऊपर जाकर भगवान को क्या मुंह दिखाओगे या दिखाओगी ….”
उस दिन अनारकली ने तो जैसे बम्ब ही फोड़ दिया। मधु ने बताया कि घरवाले अनु का अगले महीने गौना करने वाले हैं। हे भगवन जाल में फंसी मछली क्या इतनी जल्दी निकल जायेगी। हाथ आया शिकार छिटक जाएगा।
मैंने मधु से कहा,“पर अनारकली तो अभी छोटी ही है। अभी तो मुश्किल से १७-१८ की हुई होगी!” मैं जानता हूँ वो एक साथ दो दो लंड अपनी चूत और गांड में लेने लायक बन गई है पर मधु के सामने तो उसे बच्ची ही कहना ठीक था।
“अरे आप इन लोगों की परेशानी नहीं जानते। गरीब की लुगाई हरेक की भाभी होती है। जवान होने से पहले ही मोहल्ले, पड़ोस और रिश्तदारों के लौंडे लपाड़े तो क्या घर के लोग ही उनका यौन शोषण कर लेते हैं। चाचा, ताऊ, जीजा, फूफा यहाँ तक कि उसके सगे भाई और बाप भी कई बार तो नहीं छोड़ते हैं।” मधु ने बताया।
“पर अनारकली को तो ऐसी कोई समस्या थोड़े ही है। तुम गुलाबो को समझाने कि कोशिश क्यों नहीं करती ?” मैंने कहा।
“तुम नहीं जानते उसका बाप एक नम्बर का शराबी और चुद्दकड़ है। अनु बता रही थी कि कल उसकी मासी घर आई थी उसके बापू ने उसे पकड़ लिया था। मासी ने शोर मचा कर अपने आप को छुड़ाया। अनु डर रही थी कि कहीं उसे ही ना ….”
मैं तो सुनकर ही हक्का बक्का रह गया। एक और मैं अनारकली को चोदने के चक्कर में लगा था और दूसरी और उसका बाप ही उसकी वाट लगाने पर तुला था। अगर उसका गौना हो गया तो मेरी पिछले २ महीनों की सारी मेहनत बेकार चली जायेगी। मेरा तो मूड ही ख़राब हो गया।
गुरूजी कहते हैं “समय से पहले और भाग्य से ज्यादा कभी नहीं मिलता ” पता नहीं भाग्य में कब कहाँ कैसे क्या लिखा है।
उस दिन शाम को मधु ने बताया कि उसकी मम्मी की तबियत ठीक नहीं है। भइया का फ़ोन आया था वो भी जा रहे हैं और मुझे भी जयपुर जाना पड़ेगा। अब ग्वालियर से जयपुर कोई ज्यादा दूर तो है नहीं मैंने झटपट दूसरे दिन ही उसकी रेल की टिकेट कन्फर्म करवा दी। मैंने ऑफिस में जरूरी काम का परफेक्ट बहाना बना दिया।
उसने जाते हुए अनु को मेरा ध्यान रखने को समझाया कि कब नाश्ता देना है, खाना कब देना है, क्या क्या बनाना है। बस तीन चार दिनों की बात है। मजबूरी है। किसी तरह काट लेना।
मैंने मन में भगवान का धन्यवाद किया और थोड़ी सी आशा मन में जगी कि अब अनार को अनारकली बनने का माकूल (सही) समय आ गया है।
मैंने स्टेशन पर उसे छोड़ते समय इतनी बढ़िया एक्टिंग की जैसे कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका से बिछुड़ रहा हो। अगर दिलीप कुमार उस वक्त देख लेता तो कहता मधुमती में उसकी एक्टिंग भी ऐसी नहीं थी। मधु एक बार तो बोल ही पड़ी कि “वैसे भइया तो जा ही रहे हैं तुम मेरे बिना इतने उदास हो रहे हो तो मैं जाना कैंसिल कर दूँ?”
मैं घबरा गया अच्छी एक्टिंग भी कई बार महंगी पड़ जाती है। मैंने कहा “अरे बूढा शरीर है ऐसे समय में जाना जरूरी होता है। कल को कोई ऐसी वैसी बात हो गई तो हमें जिन्दगी भर पछतावा रहेगा तुम मेरी चिंता छोडो किसी तरह ३-४ दिन तुम्हारे बिना काट ही लूँगा पर लौटने में देरी कर दी तो मुझे जरूरी काम छोड़ कर भी तुम्हे लेने आना पडेगा हनी डार्लिंग !”
आप तो जानते ही है जब मुझे मधु को गोली पिलानी होती है मैं उसे हनी कहता हूँ। मधु ने मेरी और ऐसे देखा जैसे मैं कोई शहजादा सलीम हूँ और वो अनारकली जो मुझसे दूर जा रही है।
रात अनारकली के सपनों में ही बीत गई। सुबह मुझे अनारकली की मीठी आवाज ने जगाया। वो आते ही बोली “दीदी के पहुँचने का फोन आया क्या ..??”
“क्यों हम अकेले अच्छे नहीं लगते क्या ?”
“ओह … वो ..वो .. बात नहीं …” अनारकली थोड़ा झिझकते हुए बोली “आपके लिए चाय बनाऊं ?”
“नहीं पहले मेरे पास बैठो मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है ” मैंने आज पहली बार उसे बेड पर अपने पास बैठाया।
!!!----!!!! कहानी अभी बाकी है मेरे दोस्त !!!----!!!!
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मेरी पहली चुदाई और लव स्टोरी
मेरा नाम समीर है मैं दिल्ली में रहता हूँ। मैं अपनी पहली स्टोरी लिखने जा रहा हूँ उम्मीद है आपको पसंद आएगी।
बात उन दिनों की है जब मैं बी.ए. में था। उन दिनों मेरी चाची की बहन घर पर आई हुई थी। देखने में वो बहुत सुंदर थी और मन ही मन मैं उसको चाहने लगा था लेकिन उसको कहने से डरता था।
एक दिन घर में सब बाहर गए हुए थे और घर में सिर्फ़ मैं और वो थे। हम म्यूज़िक सिस्टम पर गाने सुन रहे थे हम दोनों बिस्तर पर एक साथ लेटे हुए थे अचानक उसके हाथ मेरे शरीर पर चलने लगे, मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख दिए मुझे पता चल गया की आग उस तरफ़ भी लगी हुई है।
अब मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू किया, उसके मुँह से सिस्कारियां निकलने लगी। फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उसको सहलाने लगी। मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा, एक हाथ से उसकी गांड को मसलने लगा। उसकी गांड एक दम चिकनी और गोरी थी।
अब उसके हाथ बड़ी तेजी से मेरे शरीर पर चलने लगे। मैंने उसकी कमीज को धीरे से उतार दिया उसने कोई भी विरोध नहीं किया अब उसकी चूचियां मेरे सामने थी मैंने पागलों की तरह उनको चूसना शुरू कर दिया। उसके हाथ भी मेरी गांड पर चलने लगे और उसने मेरी पेंट को उतार दिया अब मैं सिर्फ़ बनियान और अंडरवियर में था और मेरे लंड अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब था उसने जल्दी से मेरे अंडरवियर उतार दिया और मेरे लंड को चूसने लगी और अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में घुसा दी और मेरे चूतड़ों को मसलने लगी।
मैंने उसको उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। उसके बाद मैंने उसकी सलवार को भी उतार दिया उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था मैंने पहली बार किसी की चूत देखी थी। उसकी बिना बालों की चूत को देख कर मैं पागल हो गया और चूत को चाटने लगा। उसने अपनी दोनों टाँगे मेरे कन्धों पर रख दी और बोलने लगी जोर से चाटो !
मैं भी पागल हो गया था मैंने उसके गांड की दोनों गोलाईयों को जोर से भींचा तो उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गयी। उसने कहा- समीर अब चोद दो मुझे कब से मेरी चूत तुम्हारे लंड की प्यासी है।
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को रखा और घुसाने लगा लेकिन उसकी चूत बड़ी टाइट थी और मेरा लंड उसमें घुस नहीं रहा था। यह उसका और मेरा पहला अनुभव था। अब मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो मेरे लंड की सुपारी उसकी चूत में घुस गयी। उसने चिल्लाना शुरू कर दिया मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया ताकि कोई आवाज़ न सुन ले और अपना पूरा जोर लगा कर लंड को उसकी चूत में घुसा दिया।
वो छटपटाने लगी। मैंने अपने शरीर के भार से उसको पूरा दबा दिया ताकि वो कहीं निकल न सके और जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। अब उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और अपने चूतडों को उठा उठा कर धक्के मारने लगी।
मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया और फिर से अपना लंड उसकी टाइट चूत में घुसा दिया और उसके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर धक्के लगाने लगा। सच दोस्तों ऐसा मज़ा मुझे पहली बार आ रहा था। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में भी घुसा दी और उसको अंदर बाहर करने लगा।
थोडी देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा मैं समझ गया कि वो अब छूटने वाली है मैंने झटके से उसको दोबारा अपने नीचे ले लिया और धक्के लगाने लगा उसके मुँह से आह आह की आवाज़ निकल रही थी और कह रही थी समीर और जोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को और यह कहते हुए वो झड़ गयी।
अब मैंने और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और १५ मिनट तक उसको चोदता रहा। उसके बाद मैंने कहा कि मैं भी आने वाला हूँ उसने कहा मेरी चूत को भर दो अपने इस वीर्य से !
उसके बाद मैं भी जोर से आवाज़ करता हुआ उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके उपर ही लेट गया। हम दोनों थोडी देर उसी अवस्था में पड़े रहे। उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुँह से साफ़ किया और कहा- अगली बात कब चोदोगे?
मैंने कहा अगली बार तुम्हारी गांड की बारी है।
दोस्तों आगे की कहानी अगली बार प्लीज़ मुझे बताइए कि मेरी यह सच्ची कहानी आपको कैसी लगी।
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बात उन दिनों की है जब मैं बी.ए. में था। उन दिनों मेरी चाची की बहन घर पर आई हुई थी। देखने में वो बहुत सुंदर थी और मन ही मन मैं उसको चाहने लगा था लेकिन उसको कहने से डरता था।
एक दिन घर में सब बाहर गए हुए थे और घर में सिर्फ़ मैं और वो थे। हम म्यूज़िक सिस्टम पर गाने सुन रहे थे हम दोनों बिस्तर पर एक साथ लेटे हुए थे अचानक उसके हाथ मेरे शरीर पर चलने लगे, मेरा लंड खड़ा हो गया। उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपनी चूचियों पर रख दिए मुझे पता चल गया की आग उस तरफ़ भी लगी हुई है।
अब मैंने उसकी चूचियों को मसलना शुरू किया, उसके मुँह से सिस्कारियां निकलने लगी। फ़िर उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उसको सहलाने लगी। मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको चूसने लगा, एक हाथ से उसकी गांड को मसलने लगा। उसकी गांड एक दम चिकनी और गोरी थी।
अब उसके हाथ बड़ी तेजी से मेरे शरीर पर चलने लगे। मैंने उसकी कमीज को धीरे से उतार दिया उसने कोई भी विरोध नहीं किया अब उसकी चूचियां मेरे सामने थी मैंने पागलों की तरह उनको चूसना शुरू कर दिया। उसके हाथ भी मेरी गांड पर चलने लगे और उसने मेरी पेंट को उतार दिया अब मैं सिर्फ़ बनियान और अंडरवियर में था और मेरे लंड अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने को बेताब था उसने जल्दी से मेरे अंडरवियर उतार दिया और मेरे लंड को चूसने लगी और अपनी एक ऊँगली मेरी गांड में घुसा दी और मेरे चूतड़ों को मसलने लगी।
मैंने उसको उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। उसके बाद मैंने उसकी सलवार को भी उतार दिया उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था मैंने पहली बार किसी की चूत देखी थी। उसकी बिना बालों की चूत को देख कर मैं पागल हो गया और चूत को चाटने लगा। उसने अपनी दोनों टाँगे मेरे कन्धों पर रख दी और बोलने लगी जोर से चाटो !
मैं भी पागल हो गया था मैंने उसके गांड की दोनों गोलाईयों को जोर से भींचा तो उसके मुँह से हल्की सी चीख निकल गयी। उसने कहा- समीर अब चोद दो मुझे कब से मेरी चूत तुम्हारे लंड की प्यासी है।
मैंने उसकी चूत पर अपने लंड को रखा और घुसाने लगा लेकिन उसकी चूत बड़ी टाइट थी और मेरा लंड उसमें घुस नहीं रहा था। यह उसका और मेरा पहला अनुभव था। अब मैंने थोड़ा और जोर लगाया तो मेरे लंड की सुपारी उसकी चूत में घुस गयी। उसने चिल्लाना शुरू कर दिया मैंने उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया ताकि कोई आवाज़ न सुन ले और अपना पूरा जोर लगा कर लंड को उसकी चूत में घुसा दिया।
वो छटपटाने लगी। मैंने अपने शरीर के भार से उसको पूरा दबा दिया ताकि वो कहीं निकल न सके और जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिया। अब उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी और अपने चूतडों को उठा उठा कर धक्के मारने लगी।
मैंने उसको अपने ऊपर ले लिया और फिर से अपना लंड उसकी टाइट चूत में घुसा दिया और उसके चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर धक्के लगाने लगा। सच दोस्तों ऐसा मज़ा मुझे पहली बार आ रहा था। मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में भी घुसा दी और उसको अंदर बाहर करने लगा।
थोडी देर बाद उसका शरीर अकड़ने लगा मैं समझ गया कि वो अब छूटने वाली है मैंने झटके से उसको दोबारा अपने नीचे ले लिया और धक्के लगाने लगा उसके मुँह से आह आह की आवाज़ निकल रही थी और कह रही थी समीर और जोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को और यह कहते हुए वो झड़ गयी।
अब मैंने और जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए और १५ मिनट तक उसको चोदता रहा। उसके बाद मैंने कहा कि मैं भी आने वाला हूँ उसने कहा मेरी चूत को भर दो अपने इस वीर्य से !
उसके बाद मैं भी जोर से आवाज़ करता हुआ उसकी चूत में ही झड़ गया और उसके उपर ही लेट गया। हम दोनों थोडी देर उसी अवस्था में पड़े रहे। उसके बाद उसने मेरे लंड को अपने मुँह से साफ़ किया और कहा- अगली बात कब चोदोगे?
मैंने कहा अगली बार तुम्हारी गांड की बारी है।
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चोरी की चुदाई
मैं बचपन से अच्छे माहौल में नहीं रहा हूँ। मैं चोरी बहुत कुशलता से कर लेता हूँ। पर इसके लिये भाग्य का भी आपके साथ होना जरूरी है। शारीरिक सुडौलता एक आवश्यक गुण है। इसके लिये मैं हमेशा कठिन योग भी करता हूँ और जिम भी जाता हूँ। मेरा शरीर एक दम चुस्त और वी शेप का है। मैं सुबह सुबह मैदान के चार से पांच चक्कर लगाता हूँ। मेरी चोरी करने के कपड़े भी एकदम बदन से चिपके हुए होते हैं। तो आईये चलते हैं चोरी करने…
मेरे सामने एक मकान है। उसमें एक छोटा सा परिवार रहता है। सिर्फ़ मियां-बीवी और उनकी एक १८-१९ साल की लड़की वहां रहती है। पैसा अच्छा है… जो सामने वाले कमरे कि अल्मारी में रखा है। उसकी अलमारी की चाबी मालकिन के पास उसके तकिये के नीचे होती है। रात की शिफ़्ट में मालिक काम करता है। मालिक ड्यूटी पर जा चुका है। मैं मकान के पास, कभी पान की दुकान पर या पास की चाय की दुकान पर मंडरा रहा हूँ।
कमरे की लाईट अभी जल रही है… मैने समय देखा रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। और अब लाईट बन्द हुई है। मैंने टहलते हुये उस घर का एक चक्कर लगाया… सभी कुछ शान्त था। १२ बज चुके हैं।… मैं घर के पिछ्वाड़े में गया और एक ही छलांग में चाहरदीवारी पार कर गया। बिना कोई आवाज किये बाल्कनी के नीचे आ गया। उछल कर बालकनी में आ गया। थोड़ी देर इन्तजार करके खिड़की को धीरे से धक्का दिया… मेरी आशा के अनुरूप खिड़की खुली मिली… मैने धीरे से कदम अन्दर बढ़ाया। कमरे मे पूरी शान्ति थी। सामने बिस्तर था। मैं दबे पांव वहां पहुँचा। वहां पर, जैसा मैंने सोचा था, घर की मालकिन सो रही थी। मै चाबी निकालने के लिये ज्यों ही झुका…
"मैने दरवाजा खुला रखा था… खिड़की से क्यों आये…" फ़ुसफ़ुसाते हुये मालकिन ने कहा।
मै घबरा गया। पर मेरा दिमाग कंट्रोल में था। …
"बाहर से कोई देख लेता तो…" मैंने हकलाते हुए कहा…
"लेट क्यो आये … इतनी देर कर दी…"
"लाईट जली थी…मैं समझा कि कोई है……" उसने मुझे अपने बिस्तर पर मुझे खींच लिया…
"तुम मनोज के दोस्त हो ना… क्या नाम है तुम्हारा…"
"जी… सोनू… है…"
"अरे… मनोज तो रवि को भेजने वाला था… तुम कौन हो…"
" जी… मैं रवि ही हूँ…सोनू तो मुझे प्यार से कहते हैं…"
"अरे सोनू हो या मोनू … तुम तो बस शुरू हो जाओ… " उसने मुझे अपनी बांहों मे कस लिया।
मुझे अहसास हुआ वो बिलकुल नन्गी थी। मैं चोरी के बारे में भूल गया। मेरे शरीर मे गर्मी आने लगी। वो किसी का इन्तजार कर रही थी। शायद रवि का…
"दरवाजा खुला है क्या…?"
"अरे हां…" वो जल्दी से उठी और दरवाजा बन्द करके आ गई। मैने भी अपने कपड़े उतार लिये और नंगा हो गया।
"आपका नाम क्या है …" मैने उसका नाम पूछ ही लिया
"कामिनी… क्यों मनोज ने बताया नहीं क्या…"
मैने कुछ नहीं कहा … उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया… और बेशर्मी से अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। मेरे बदन में वासना भड़क उठी। उसका नंगा बदन मुझे रोमान्चित कर रहा था। मेरा लण्ड जाग चुका था। और अपने काम की चीज़ ढूंढ रहा था। फ़ड़फ़ड़ाती चिड़िया को कामिनी ने तुरन्त अपने कब्जे में ले लिया। मेरे लण्ड पर उसके हाथ कस चुके थे और अब उसे मसल रहे थे। मेरे मुख से आह निकल गई… मैंने उसे चूमना जारी रखा… तभी
"बहन के लौड़े… मेरी चूंचियां तो दबा … " उखड़ती हुई सांस और एक गाली दी… मैं और उत्तेजित हो गया। उसके बोबे बड़े थे… दबा दिये और उन्हें मसलने लगा।
"मेरी जान… जल्दी क्या है … देख तेरी चूत को कैसा चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा"
कामिनी मेरे लण्ड की खाल को ऊपर नीचे मुठ मारने जैसी चलाने लगी। मैने जोश में आकर उसके चूतड़ों को दबा डाला।
"हाय रे… मेरी गाण्ड मसल दी … बहन चोद… मेरी गाण्ड मारनी है क्या…" वो वासना में डूब चुकी थी।
"इच्छा है तो कहो… आपका गुलाम हूँ… " मैने उसकी चमचागिरी की।
"तो चल चोद दे पहले मेरी गाण्ड… फिर मेरा भोंसड़ा चोद देना…" उसकी भाषा … हाय रे… मुझे उत्तेजित कर रही थी। शायद वो बहुतों से चुदा चुकी थी … और उसकी गाली देने की आदत पड़ गई थी। मैंने उसके मस्त चूतड़ दबाने और मसलने चालू कर दिये। उसके मुख से सिसकियाँ निकलने लगी।
वो सीधी लेटी थी। मैंने उसकी चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और गाण्ड ऊंची कर दी। मैने उसकी गाण्ड पर अपना लण्ड टिका दिया और जोर लगाने लगा। मेरे दोनो हाथ फ़्री थे। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे उतर गया… मैने उसके बोबे दबाये और और उसकी गाण्ड को चोदना चालू कर दिया। वो मस्त होने लगी। कुछ देर बोबे मसलने के बाद बोबे छोड़ कर उसकी चूत में अपनी अंगुली घुसा दी।
वो चिंहुक उठी। बोली -"हरामी ये तरीका किसने बताया रे…… मस्त स्टाईल है… अब तो चूत में भी मजा आ रहा है…।"
" कामिनी जी … आपकी चूत मस्त है…अगर इसकी मां चुद जाये तो आपको मजा आ जायेगा ना…"
"हाय मेरे सोनू…… तूने ये क्या कह दिया … मां चोद दे मेरी भोसड़ी की…हाय…सच में बहुत प्यासी है रे…"
मेरा लण्ड अब थोड़ा तेजी पर था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, उसकी गाण्ड थोड़ी सी टाईट भी थी। मेरे धक्के उसकी गाण्ड में और उसकी चूत में मेरी अंगुलियां तेजी से चल रही थी। वो लगभग चीखती हुई सिसकारियां भर रही थी। उसे डबल मजा जो मिल रहा था। अब मेरा भी लण्ड फूल कर बहुत ही मस्त हो रहा था। मुझे लग रहा था कि ऐसे ही अगर गाण्ड चोदता रहा तो मैं झड़ जाऊंगा। मैने अपना लण्ड अब गाण्ड में से निकाला और उसकी चूत में फ़ंसा दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी चूत में फ़क से फ़िट हो गया ।
"हाय्…री… गया अन्दर… चुद गई…रे……" वो मस्त होती हुई सिसकने लगी।
मुझे भी तेज आनन्द की अनुभूति हुई… उसे अपनी चूत में लण्ड उतराता हुआ मह्सूस हो रहा था। मेरे लण्ड की चमड़ी रगड़ खाती हुई तेज मजा दे रही थी। मैने अपने धक्के लगा कर चूत की गहराई तक अपना लण्ड गड़ा दिया। अब मै उसके ऊपर लेट गया और अपने हाथो से शरीर को ऊंचा उठा लिया। मुझे लण्ड और चूत को फ़्री करके तेजी से धक्के लगाना अच्छा लगता है। अब मेरी बारी थी तेजी दिखाने की। जैसे ही मैने अपना पिस्टन चलाना चालू किया वो भी बड़े जोश से उतनी ही तेजी से अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर साथ देने लगी।
"तू तो गजब का चोदता है रे… मुझे तू ही रोज़ चोद जाया कर…"
"मत बोलो कुछ भी…… मुझे बस चोदने दो… हाय रे…कितना मजा आ रहा है…"
"मादरचोद…रुक जा…झड़ना मत……वर्ना मेरी चूत को फिर कौन चोदेगा…"
"चुप रहो … छिनाल… अभी तो चुद ले… झड़े तेरी मां… कुतिया…"
मेरे धक्के बढ़ते गये। उसकी सिसकारियां भी बढ़ती गई…उसकी गालियां भी बढ़ती गई… अचानक ही गालियों की बौछार बढ़ गई………
"हरामी … चोद दे……मेरी भोसड़ी फ़ाड़ डाल…… मेरी बहन चोद दे… कुत्ते… मार लण्ड चूत पर… हाय रे मेरी मां…"
मैं समझ गया कि अब कामिनी चरमसीमा पर पहुंच रही है। मैंने भी अपने आप को अब फ़्री छोड़ दिया झड़ने के लिये।
"मर गई रे…… भोंसड़ी के… लगा… दे धक्के… निकाल दे मेरा पानी… मादरचोद रे…अरे…गई… निकला रे……हाऽऽऽऽय री मां…"
और वो झड़ने लगी। मैने भी लण्ड अब उसके भोंसड़े में जोर से गड़ा दिया। और जोर लगाता रहा…दबाव से मेरे लण्ड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। मेरा लण्ड झटके मार मार कर वीर्य उसके चूत में छोड़ रहा था। कामिनी ने मुझे अपनी टांगों के बीच मुझे जकड़ लिया था। दोनो का रस एक साथ ही निकल रहा था। हम आपस में चिपके रहे। अब मैं बिस्तर से नीचे उतर गया था।
"बस कामिनी जी… आपने तो मेरा पूरा रस निकाल दिया…"
"……ये लो… कल दरवाजे से आना……" कामिनी ने मुझे ५०० का एक नोट दिया…"तुम बहुत अच्छा चोदते हो…अब मुझे किसी दूसरे की जरूरत नहीं है…"
मैने झिझकते हुए रुपये ले लिये और चुपचाप सर झुका कर दरवाजा खोला और बाहर निकल गया।
sexygirl4uonly16@gmail.com
मेरे सामने एक मकान है। उसमें एक छोटा सा परिवार रहता है। सिर्फ़ मियां-बीवी और उनकी एक १८-१९ साल की लड़की वहां रहती है। पैसा अच्छा है… जो सामने वाले कमरे कि अल्मारी में रखा है। उसकी अलमारी की चाबी मालकिन के पास उसके तकिये के नीचे होती है। रात की शिफ़्ट में मालिक काम करता है। मालिक ड्यूटी पर जा चुका है। मैं मकान के पास, कभी पान की दुकान पर या पास की चाय की दुकान पर मंडरा रहा हूँ।
कमरे की लाईट अभी जल रही है… मैने समय देखा रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। और अब लाईट बन्द हुई है। मैंने टहलते हुये उस घर का एक चक्कर लगाया… सभी कुछ शान्त था। १२ बज चुके हैं।… मैं घर के पिछ्वाड़े में गया और एक ही छलांग में चाहरदीवारी पार कर गया। बिना कोई आवाज किये बाल्कनी के नीचे आ गया। उछल कर बालकनी में आ गया। थोड़ी देर इन्तजार करके खिड़की को धीरे से धक्का दिया… मेरी आशा के अनुरूप खिड़की खुली मिली… मैने धीरे से कदम अन्दर बढ़ाया। कमरे मे पूरी शान्ति थी। सामने बिस्तर था। मैं दबे पांव वहां पहुँचा। वहां पर, जैसा मैंने सोचा था, घर की मालकिन सो रही थी। मै चाबी निकालने के लिये ज्यों ही झुका…
"मैने दरवाजा खुला रखा था… खिड़की से क्यों आये…" फ़ुसफ़ुसाते हुये मालकिन ने कहा।
मै घबरा गया। पर मेरा दिमाग कंट्रोल में था। …
"बाहर से कोई देख लेता तो…" मैंने हकलाते हुए कहा…
"लेट क्यो आये … इतनी देर कर दी…"
"लाईट जली थी…मैं समझा कि कोई है……" उसने मुझे अपने बिस्तर पर मुझे खींच लिया…
"तुम मनोज के दोस्त हो ना… क्या नाम है तुम्हारा…"
"जी… सोनू… है…"
"अरे… मनोज तो रवि को भेजने वाला था… तुम कौन हो…"
" जी… मैं रवि ही हूँ…सोनू तो मुझे प्यार से कहते हैं…"
"अरे सोनू हो या मोनू … तुम तो बस शुरू हो जाओ… " उसने मुझे अपनी बांहों मे कस लिया।
मुझे अहसास हुआ वो बिलकुल नन्गी थी। मैं चोरी के बारे में भूल गया। मेरे शरीर मे गर्मी आने लगी। वो किसी का इन्तजार कर रही थी। शायद रवि का…
"दरवाजा खुला है क्या…?"
"अरे हां…" वो जल्दी से उठी और दरवाजा बन्द करके आ गई। मैने भी अपने कपड़े उतार लिये और नंगा हो गया।
"आपका नाम क्या है …" मैने उसका नाम पूछ ही लिया
"कामिनी… क्यों मनोज ने बताया नहीं क्या…"
मैने कुछ नहीं कहा … उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया… और बेशर्मी से अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिये। मेरे बदन में वासना भड़क उठी। उसका नंगा बदन मुझे रोमान्चित कर रहा था। मेरा लण्ड जाग चुका था। और अपने काम की चीज़ ढूंढ रहा था। फ़ड़फ़ड़ाती चिड़िया को कामिनी ने तुरन्त अपने कब्जे में ले लिया। मेरे लण्ड पर उसके हाथ कस चुके थे और अब उसे मसल रहे थे। मेरे मुख से आह निकल गई… मैंने उसे चूमना जारी रखा… तभी
"बहन के लौड़े… मेरी चूंचियां तो दबा … " उखड़ती हुई सांस और एक गाली दी… मैं और उत्तेजित हो गया। उसके बोबे बड़े थे… दबा दिये और उन्हें मसलने लगा।
"मेरी जान… जल्दी क्या है … देख तेरी चूत को कैसा चोद कर भोंसड़ा बना दूंगा"
कामिनी मेरे लण्ड की खाल को ऊपर नीचे मुठ मारने जैसी चलाने लगी। मैने जोश में आकर उसके चूतड़ों को दबा डाला।
"हाय रे… मेरी गाण्ड मसल दी … बहन चोद… मेरी गाण्ड मारनी है क्या…" वो वासना में डूब चुकी थी।
"इच्छा है तो कहो… आपका गुलाम हूँ… " मैने उसकी चमचागिरी की।
"तो चल चोद दे पहले मेरी गाण्ड… फिर मेरा भोंसड़ा चोद देना…" उसकी भाषा … हाय रे… मुझे उत्तेजित कर रही थी। शायद वो बहुतों से चुदा चुकी थी … और उसकी गाली देने की आदत पड़ गई थी। मैंने उसके मस्त चूतड़ दबाने और मसलने चालू कर दिये। उसके मुख से सिसकियाँ निकलने लगी।
वो सीधी लेटी थी। मैंने उसकी चूतड़ों के नीचे तकिया लगाया और गाण्ड ऊंची कर दी। मैने उसकी गाण्ड पर अपना लण्ड टिका दिया और जोर लगाने लगा। मेरे दोनो हाथ फ़्री थे। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे उतर गया… मैने उसके बोबे दबाये और और उसकी गाण्ड को चोदना चालू कर दिया। वो मस्त होने लगी। कुछ देर बोबे मसलने के बाद बोबे छोड़ कर उसकी चूत में अपनी अंगुली घुसा दी।
वो चिंहुक उठी। बोली -"हरामी ये तरीका किसने बताया रे…… मस्त स्टाईल है… अब तो चूत में भी मजा आ रहा है…।"
" कामिनी जी … आपकी चूत मस्त है…अगर इसकी मां चुद जाये तो आपको मजा आ जायेगा ना…"
"हाय मेरे सोनू…… तूने ये क्या कह दिया … मां चोद दे मेरी भोसड़ी की…हाय…सच में बहुत प्यासी है रे…"
मेरा लण्ड अब थोड़ा तेजी पर था। मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, उसकी गाण्ड थोड़ी सी टाईट भी थी। मेरे धक्के उसकी गाण्ड में और उसकी चूत में मेरी अंगुलियां तेजी से चल रही थी। वो लगभग चीखती हुई सिसकारियां भर रही थी। उसे डबल मजा जो मिल रहा था। अब मेरा भी लण्ड फूल कर बहुत ही मस्त हो रहा था। मुझे लग रहा था कि ऐसे ही अगर गाण्ड चोदता रहा तो मैं झड़ जाऊंगा। मैने अपना लण्ड अब गाण्ड में से निकाला और उसकी चूत में फ़ंसा दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी चूत में फ़क से फ़िट हो गया ।
"हाय्…री… गया अन्दर… चुद गई…रे……" वो मस्त होती हुई सिसकने लगी।
मुझे भी तेज आनन्द की अनुभूति हुई… उसे अपनी चूत में लण्ड उतराता हुआ मह्सूस हो रहा था। मेरे लण्ड की चमड़ी रगड़ खाती हुई तेज मजा दे रही थी। मैने अपने धक्के लगा कर चूत की गहराई तक अपना लण्ड गड़ा दिया। अब मै उसके ऊपर लेट गया और अपने हाथो से शरीर को ऊंचा उठा लिया। मुझे लण्ड और चूत को फ़्री करके तेजी से धक्के लगाना अच्छा लगता है। अब मेरी बारी थी तेजी दिखाने की। जैसे ही मैने अपना पिस्टन चलाना चालू किया वो भी बड़े जोश से उतनी ही तेजी से अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर साथ देने लगी।
"तू तो गजब का चोदता है रे… मुझे तू ही रोज़ चोद जाया कर…"
"मत बोलो कुछ भी…… मुझे बस चोदने दो… हाय रे…कितना मजा आ रहा है…"
"मादरचोद…रुक जा…झड़ना मत……वर्ना मेरी चूत को फिर कौन चोदेगा…"
"चुप रहो … छिनाल… अभी तो चुद ले… झड़े तेरी मां… कुतिया…"
मेरे धक्के बढ़ते गये। उसकी सिसकारियां भी बढ़ती गई…उसकी गालियां भी बढ़ती गई… अचानक ही गालियों की बौछार बढ़ गई………
"हरामी … चोद दे……मेरी भोसड़ी फ़ाड़ डाल…… मेरी बहन चोद दे… कुत्ते… मार लण्ड चूत पर… हाय रे मेरी मां…"
मैं समझ गया कि अब कामिनी चरमसीमा पर पहुंच रही है। मैंने भी अपने आप को अब फ़्री छोड़ दिया झड़ने के लिये।
"मर गई रे…… भोंसड़ी के… लगा… दे धक्के… निकाल दे मेरा पानी… मादरचोद रे…अरे…गई… निकला रे……हाऽऽऽऽय री मां…"
और वो झड़ने लगी। मैने भी लण्ड अब उसके भोंसड़े में जोर से गड़ा दिया। और जोर लगाता रहा…दबाव से मेरे लण्ड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी। मेरा लण्ड झटके मार मार कर वीर्य उसके चूत में छोड़ रहा था। कामिनी ने मुझे अपनी टांगों के बीच मुझे जकड़ लिया था। दोनो का रस एक साथ ही निकल रहा था। हम आपस में चिपके रहे। अब मैं बिस्तर से नीचे उतर गया था।
"बस कामिनी जी… आपने तो मेरा पूरा रस निकाल दिया…"
"……ये लो… कल दरवाजे से आना……" कामिनी ने मुझे ५०० का एक नोट दिया…"तुम बहुत अच्छा चोदते हो…अब मुझे किसी दूसरे की जरूरत नहीं है…"
मैने झिझकते हुए रुपये ले लिये और चुपचाप सर झुका कर दरवाजा खोला और बाहर निकल गया।
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भांजे के लंड से चुदाई
हेल्लो गाय्ज़, मैं ३३ वर्षीया संजना माथुर लुधियाना से, मेरी फ़ीगर ३८-३२-४० है।
मैं जो कहानी ले कर आयी हूँ उसमे मैं आपको अपने भांजे (मेरी बहिन का बेटा) की करतूत के बारे में बताती हूँ।
हुआ यूँ कि मैं पिछले महीने अपनी बड़ी बहिन के घर अपने बच्चों के साथ कुछ दिन के लिए रहने के लिए गयी थी। मेरी बहिन के दो बच्चे हैं, लड़का अमितेश, १८ साल का और लड़की कशिश। अमितेश शुरू से ही मुझे बहुत प्यार करता है मुझसे लिपटना, चूमना करता ही रहता है, पर मैं उसे बच्चा समझ कर सब अनदेखा कर देती थी।
तो जब हम उनके घर पटियाला पहुंचे तो वो सभी हमें देख कर बहुत खुश हुए। उसके बाद तो खाने -पीने का और बातों का दौर चलता ही रहा। २-३ दिनों बाद एक बार मैं जब अमितेश के कमरे में गयी तो वो बाथरूम में नहा रहा था, मैंने देखा कि उसका मोबाइल बाहर बेड पर ही पड़ा हुआ था जिसको वो अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करता था। मैंने भी वैसे ही उसे उठा कर बटन दबाने शुरू कर दिए और ऐसे ही मोबाइल की गैलरी खोल कर देखने लगी। जब मैंने उसके एक छिपाई गैलरी खोल कर देखी तो मैं तो हैरान ही रह गयी। उसमे मेरी और हमारी रिश्तेदारी की और बहुत सारी औरतों की तसवीरें थी। किसी के कुरते या ब्लाऊज़ से उसके स्तन दिख रहा तो किसी कुछ। मेरी अपनी अपने बेटे को दूध पिलाते हुए मेरे बूब्स की, बाथरूम में नहाते हुए नंगी तस्वीरें थी।
जब मैं यह सब देख ही रही थी कि तभी अचानक अमितेश बाथरूम से बाहर आ गया, और मेरे हाथ में अपना मोबाइल देख कर दौड़ कर मेरे पास आया और मेरे हाथ से मोबाइल छीन कर बोला,"मासी, आपसे कितनी बार कहा है कि कोई मेरे मोबाइल को हाथ लगाये मुझे पसंद नहीं है।”
तो पलट कर मैंने कहा,“अच्छा, क्योंकि इसमें हम सबकी नंगी तस्वीरें हैं।”
यह सुनते ही वो घबरा गया और बोला,"प्लीज़ मासी किसी को मत बताना, वरना बहुत जूते पड़ेंगे, आप तो मेरी अच्छी वाली मासी हो।”
तो मैंने कहा," अच्छी वाली मासी हूँ, तभी मेरी नंगी फोटो खींच कर इसमें रखी हैं।”
वो बोला,“मासी सच कहता हूँ आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं बचपन से आप से बहुत प्यार करता हूँ, प्लीज़, पर आप किसी से यह मत कहना।”
तो मुझे भी शरारत सूझी, एक नौजवान का लंड लेने को मैंने भी तरकीब लड़ानी शुरू की,"अच्छा अमितेश ! ये बताओ इन तस्वीरों का तुम क्या करते हो, सच सच बताना, दोस्तों को दिखाते हो, इन्टरनेट पर डालते हो, क्या करते हो ?”
वो बोला, “ मैं कोई पागल हूँ जो औरों को अपने घर की औरतें नंगी करके दिखाऊंगा।”
“तो क्या करते हो फिर?” मैंने पूछा।
“मासी, सच कहूं, इन्हें देख कर मैं मुठ मारता हूँ, क्योंकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड तो है नहीं।”
“अच्छा, तो मेरी फोटो देख कर भी मुठ मारते हो?”
“जी मासी, मैंने अब तक जितनी बार भी मुठ मारी है सबसे ज़्यादा आपके नाम की मारी है।” उसने जवाब दिया।
“मुझ में तुम्हें सबसे ज़्यादा क्या अच्छा लगता है?” मैंने पूछा।
“सबसे ज़्यादा, आपके बूब्स फिर जांघें और होंठ!” उसने भी थोड़ा खुल कर बताना शुरू किया।
“अच्छा ये बताओ और क्या क्या है तुम्हारे मोबाइल में ?”
मेरे इतना कहने पर उसने अपने मोबाइल में मेरी २ विडियो दिखाए, एक में मैं उनके घर जब आयी थी तो बाथरूम उसने छुपा कर मोबाइल रख कर मेरी नहाते हुए की पूरी रिकॉर्डिंग की थी, दूसरी क्लिप में मैं बेड पर अपने छोटे बेटे को दूध पिलाती-पिलाती सो गयी थी, मेरा ब्लाउज और ब्रा ऊपर उठे हुए थे जिस कारण मेरे दोनों स्तन बाहर थे, और मेरा पेटीकोट इस बदमाश ने ऊपर उठा कर मेरी चूत की भी विडियो बना ली थी। इसके अलावा उसकी चाची, बुआ वगैरह की नंगी वीडियो और तस्वीरें थी। मैं तो उसकी यह करतूत देख कर हैरान रह गयी।
अब मेरा भी मूड बन रहा था मैंने सोचा कि अगर अब बात बन गयी तो बन गयी वरना नहीं। मैंने फिर बड़े प्यार से उसे पूछा ,” अमित, ये बताओ अगर जो काम तुम वीडियो देख कर करते हो वो सचमुच देखने को मिल जाए तो तुम्हे कैसा लगेगा?”
उसकी तो जैसे लॉटरी लग गयी हो, बहुत ही खुश होते हुआ बोला,"मासी ज़िन्दगी का सचमुच में मज़ा आ जाएगा, पर आप सच तो बोल रही हो ना !” मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा,"हाँ, पर तुम्हें मेरे लिए भी कुछ करना पड़ेगा।”
“मासी जो आप हुकुम करो।” वो चहका।
“ओ .के। सबसे पहले मेरा हुकुम यह है कि मुझे अपना लंड निकाल कर दिखाओ !”
मेरा हुकुम सुनते ही उसने जाकर दरवाज़ा बंद किया और मेरे सामने आ कर झट से अपने तौलिये को खोल कर मेरे सामने नंगा होकर खड़ा हो गया। पहली नज़र में ही मुझे उसका कुंवारा लंड बड़ा प्यारा लगा, मैंने जब उसे हाथ में पकड़ कर उसका सुपाड़ा बाहर निकाल कर २-४ बार आगे पीछे किया तो उसका लंड इतने में ही तन गया और अकड़ कर तकरीबन ६-१/२, ७ इंच का हो गया।
मैं अभी उसके लंड का जायजा ही ले रही थी तो तभी उसने मेरे सर को पीछे से धकेलते हुए अपना लंड मेरे होठों से लगा दिया और बोला,"मासी इसे चूसो !”
तो मैंने भी उसका सुपाड़ा मुँह में लेकर एक जोरदार चूसा मारा और बोली,"वाह बेटा, कहते कुछ हो और करते कुछ और हो, बड़े चालाक हो !”
तो उसने बड़े प्यार से मेरा सर सहलाते हुए बोला,"हुकुम करो मेरी जान, अब तो मैं मरा जा रहा हूँ !”
यही मौका था जिसका मुझे इंतज़ार था, मैं बोली,"अगर तुम मेरी चूत चाट चाट कर मेरा पानी निकाल दो तो मैं तुम्हारा लंड चूस चूस कर पानी निकाल दूँगी, बोलो मंज़ूर है? और तुम्हें मुठ मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी !”
उसने मुझे बाँहों में जकड़ लिया जिस से उसका लंड मेरी चूत से जा टकराया और वो बोला ,” मासी सलवार उतार।”
मैंने कहा ,” नहीं, मैं कुछ भी नहीं करूंगी, मैं रानी हूँ और तुम मेरे नौकर, चलो अब अपनी महारानी की खिदमत करो।”
उसने मुझे गोद में उठा कर बड़े प्यार से बेड पर रखा, फिर मेरी शर्ट ऊपर उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोला, उसके बाद मेरी सलवार निकाल कर उसने मेरी जांघें, चूत, पेट ,स्तन और होंठों पर चूमा. उसके बाद वो मेरे पैरों के पास बैठ गया और मेरी टाँगें खोल कर मेरी चूत पे चूमने लगा, और मैं आनंद के सागर में डूबती जा रही थी।
उसके बाद वो धीरे से अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर डाल कर फिराने लगा, मुझे भी मज़ा आया और मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी। अब सिर्फ़ चूत चटवाने से मेरा कहां कुछ बनने वाला था तो मैंने कहा, "अमितेश, अपनी कमर इधर घुमाओ, मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ।”
वो उठा और आकर मेरे ऊपर उल्टा लेट गया जिससे उसका लंड ऊपर से मेरे मुँह में जा रहा था और वो झुक कर मेरी चूत चाट रहा था। जैसे जैसे मज़ा बढ़ता गया उसकी जीभ और लंड की रफ़्तार बढती चली गयी।
४-५ मिनट तक ये खेल चलता रहा और फिर अचानक मेरे बदन में जैसे बिजली दौड़ गयी, मैंने जितना हो सकता था उसका लंड मुँह में ले लिया और उसे दांतों से काट खाया, ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर ऊपर को उछालती हुई मैं झड़ गयी, मेरा बदन अकड़ गया और मैंने अपने नाखून उसके कूल्हों में गाड़ दिए। जब मैं शांत हुई तो मैंने उसका मुँह अपनी चूत से हटाया और कहा ,” ला अब मैं तेरा पानी छुड़वाती हूँ।”
तो वो बोला,"मासी एक प्रार्थना है।”
मैं बोली, “क्या?”
तो उसने मेरे स्तनों को अपने हाथों में पकड़ कर दबाते हुए कहा," मैं आपको चोद कर अपना पानी छुड़वाना चाहता हूँ, अगर आपको ऐतराज़ ना हो, तो!”
"भला, मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है, जैसे चाहो मुझे चोद लो !”
मेरी इजाज़त पा कर उसने मेरी शर्ट और ब्रा भी उतार दी और मेरे ऊपर लेट कर बोला,"संजू, इसे हाथ में पकड़ो और अपनी चूत पर रखो।”
ज़िन्दगी में पहली बार उसने मुझे नाम लेकर बुलाया जो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने भी एक गर्लफ्रेंड या पत्नी की तरह उसका कहा मानते हुए उसका लंड अपनी चूत पर रखा और उसने बड़े आराम से धक्के लगाते हुए अपना लंड मेरी चूत में डाल कर चोदना शुरू किया। इसी दौरान उसने बताया कि वो मुझे पिछले ४ साल से चोदने की चाहत मन में रखे हुए था, जिस दिन उसने मेरी सोती हुई की नंगी विडियो अपने मोबाइल पर बनाई थी तो उस दिन उसने मेरे पास खड़े हो कर मुठ भी मारी थी और अपना माल मेरी चादर से पोंछा था।
अमितेश बड़े आराम से मुझे चोद रहा था, बीच बीच में बातें करता, मुझे चूमता और मेरे स्तनों से निकलने वाला दूध पीता हुआ मेरे सारे जिस्म का मज़ा ले रहा था और तभी उसने मुझे बताया कि यह उसकी ज़िन्दगी का पहला सेक्स है।
७-८ मिनट की आरामदायक चुदाई के बाद वो बोला,"मासी अगर मैं तुम्हारे मुँह में अपना माल छुडावाउं तो तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा?”
मैंने मुस्कुरा कर कहा “नहीं !”
तो उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड से मेरे मुँह को चोदने लगा। बेशक मेरे दांत लगने से उसे तकलीफ हो रही थी पर अब उसका जोश देखने वाला था उसकी इच्छा थी कि अपना सारा लंड मेरे मुँह में घुसा दे, उसका लंड मेरे गले तक जा कर चोट कर रहा था और फिर कुछ जोरदार शॉट्स लगाने के बाद उसके लंड से निकली आग से मेरा मुँह भर गया उसने मेरा सर ज़ोर से पकड़ कर रखा ताकि मैं उसका लंड अपने मुँह से न निकाल सकूं, उसका गरमा गरम माल मेरे मुँह में था जिसे मैं गटा गट पी गयी। एक नौजवान से चुद कर मैं तो जैसे निहाल ही हो गई।
मुझे अमितेश से चुदना इतना अच्छा लगा कि उसके बाद भी मैं अब तक ८-१० बार उस से चुदवा चुकी हूँ। जो गांड मैंने अपने पति से नहीं मरवाई वो भी मैंने अमितेश से चुदवाई।
दोस्तों अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी तो आप भी अपनी राय मुझे भेज सकते हैं:
sanjana_dear_75@yahoo.co.in
या
sexygirl4uonly16@gmail.com
मैं जो कहानी ले कर आयी हूँ उसमे मैं आपको अपने भांजे (मेरी बहिन का बेटा) की करतूत के बारे में बताती हूँ।
हुआ यूँ कि मैं पिछले महीने अपनी बड़ी बहिन के घर अपने बच्चों के साथ कुछ दिन के लिए रहने के लिए गयी थी। मेरी बहिन के दो बच्चे हैं, लड़का अमितेश, १८ साल का और लड़की कशिश। अमितेश शुरू से ही मुझे बहुत प्यार करता है मुझसे लिपटना, चूमना करता ही रहता है, पर मैं उसे बच्चा समझ कर सब अनदेखा कर देती थी।
तो जब हम उनके घर पटियाला पहुंचे तो वो सभी हमें देख कर बहुत खुश हुए। उसके बाद तो खाने -पीने का और बातों का दौर चलता ही रहा। २-३ दिनों बाद एक बार मैं जब अमितेश के कमरे में गयी तो वो बाथरूम में नहा रहा था, मैंने देखा कि उसका मोबाइल बाहर बेड पर ही पड़ा हुआ था जिसको वो अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करता था। मैंने भी वैसे ही उसे उठा कर बटन दबाने शुरू कर दिए और ऐसे ही मोबाइल की गैलरी खोल कर देखने लगी। जब मैंने उसके एक छिपाई गैलरी खोल कर देखी तो मैं तो हैरान ही रह गयी। उसमे मेरी और हमारी रिश्तेदारी की और बहुत सारी औरतों की तसवीरें थी। किसी के कुरते या ब्लाऊज़ से उसके स्तन दिख रहा तो किसी कुछ। मेरी अपनी अपने बेटे को दूध पिलाते हुए मेरे बूब्स की, बाथरूम में नहाते हुए नंगी तस्वीरें थी।
जब मैं यह सब देख ही रही थी कि तभी अचानक अमितेश बाथरूम से बाहर आ गया, और मेरे हाथ में अपना मोबाइल देख कर दौड़ कर मेरे पास आया और मेरे हाथ से मोबाइल छीन कर बोला,"मासी, आपसे कितनी बार कहा है कि कोई मेरे मोबाइल को हाथ लगाये मुझे पसंद नहीं है।”
तो पलट कर मैंने कहा,“अच्छा, क्योंकि इसमें हम सबकी नंगी तस्वीरें हैं।”
यह सुनते ही वो घबरा गया और बोला,"प्लीज़ मासी किसी को मत बताना, वरना बहुत जूते पड़ेंगे, आप तो मेरी अच्छी वाली मासी हो।”
तो मैंने कहा," अच्छी वाली मासी हूँ, तभी मेरी नंगी फोटो खींच कर इसमें रखी हैं।”
वो बोला,“मासी सच कहता हूँ आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं बचपन से आप से बहुत प्यार करता हूँ, प्लीज़, पर आप किसी से यह मत कहना।”
तो मुझे भी शरारत सूझी, एक नौजवान का लंड लेने को मैंने भी तरकीब लड़ानी शुरू की,"अच्छा अमितेश ! ये बताओ इन तस्वीरों का तुम क्या करते हो, सच सच बताना, दोस्तों को दिखाते हो, इन्टरनेट पर डालते हो, क्या करते हो ?”
वो बोला, “ मैं कोई पागल हूँ जो औरों को अपने घर की औरतें नंगी करके दिखाऊंगा।”
“तो क्या करते हो फिर?” मैंने पूछा।
“मासी, सच कहूं, इन्हें देख कर मैं मुठ मारता हूँ, क्योंकि मेरी कोई गर्लफ्रेंड तो है नहीं।”
“अच्छा, तो मेरी फोटो देख कर भी मुठ मारते हो?”
“जी मासी, मैंने अब तक जितनी बार भी मुठ मारी है सबसे ज़्यादा आपके नाम की मारी है।” उसने जवाब दिया।
“मुझ में तुम्हें सबसे ज़्यादा क्या अच्छा लगता है?” मैंने पूछा।
“सबसे ज़्यादा, आपके बूब्स फिर जांघें और होंठ!” उसने भी थोड़ा खुल कर बताना शुरू किया।
“अच्छा ये बताओ और क्या क्या है तुम्हारे मोबाइल में ?”
मेरे इतना कहने पर उसने अपने मोबाइल में मेरी २ विडियो दिखाए, एक में मैं उनके घर जब आयी थी तो बाथरूम उसने छुपा कर मोबाइल रख कर मेरी नहाते हुए की पूरी रिकॉर्डिंग की थी, दूसरी क्लिप में मैं बेड पर अपने छोटे बेटे को दूध पिलाती-पिलाती सो गयी थी, मेरा ब्लाउज और ब्रा ऊपर उठे हुए थे जिस कारण मेरे दोनों स्तन बाहर थे, और मेरा पेटीकोट इस बदमाश ने ऊपर उठा कर मेरी चूत की भी विडियो बना ली थी। इसके अलावा उसकी चाची, बुआ वगैरह की नंगी वीडियो और तस्वीरें थी। मैं तो उसकी यह करतूत देख कर हैरान रह गयी।
अब मेरा भी मूड बन रहा था मैंने सोचा कि अगर अब बात बन गयी तो बन गयी वरना नहीं। मैंने फिर बड़े प्यार से उसे पूछा ,” अमित, ये बताओ अगर जो काम तुम वीडियो देख कर करते हो वो सचमुच देखने को मिल जाए तो तुम्हे कैसा लगेगा?”
उसकी तो जैसे लॉटरी लग गयी हो, बहुत ही खुश होते हुआ बोला,"मासी ज़िन्दगी का सचमुच में मज़ा आ जाएगा, पर आप सच तो बोल रही हो ना !” मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा,"हाँ, पर तुम्हें मेरे लिए भी कुछ करना पड़ेगा।”
“मासी जो आप हुकुम करो।” वो चहका।
“ओ .के। सबसे पहले मेरा हुकुम यह है कि मुझे अपना लंड निकाल कर दिखाओ !”
मेरा हुकुम सुनते ही उसने जाकर दरवाज़ा बंद किया और मेरे सामने आ कर झट से अपने तौलिये को खोल कर मेरे सामने नंगा होकर खड़ा हो गया। पहली नज़र में ही मुझे उसका कुंवारा लंड बड़ा प्यारा लगा, मैंने जब उसे हाथ में पकड़ कर उसका सुपाड़ा बाहर निकाल कर २-४ बार आगे पीछे किया तो उसका लंड इतने में ही तन गया और अकड़ कर तकरीबन ६-१/२, ७ इंच का हो गया।
मैं अभी उसके लंड का जायजा ही ले रही थी तो तभी उसने मेरे सर को पीछे से धकेलते हुए अपना लंड मेरे होठों से लगा दिया और बोला,"मासी इसे चूसो !”
तो मैंने भी उसका सुपाड़ा मुँह में लेकर एक जोरदार चूसा मारा और बोली,"वाह बेटा, कहते कुछ हो और करते कुछ और हो, बड़े चालाक हो !”
तो उसने बड़े प्यार से मेरा सर सहलाते हुए बोला,"हुकुम करो मेरी जान, अब तो मैं मरा जा रहा हूँ !”
यही मौका था जिसका मुझे इंतज़ार था, मैं बोली,"अगर तुम मेरी चूत चाट चाट कर मेरा पानी निकाल दो तो मैं तुम्हारा लंड चूस चूस कर पानी निकाल दूँगी, बोलो मंज़ूर है? और तुम्हें मुठ मारने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी !”
उसने मुझे बाँहों में जकड़ लिया जिस से उसका लंड मेरी चूत से जा टकराया और वो बोला ,” मासी सलवार उतार।”
मैंने कहा ,” नहीं, मैं कुछ भी नहीं करूंगी, मैं रानी हूँ और तुम मेरे नौकर, चलो अब अपनी महारानी की खिदमत करो।”
उसने मुझे गोद में उठा कर बड़े प्यार से बेड पर रखा, फिर मेरी शर्ट ऊपर उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोला, उसके बाद मेरी सलवार निकाल कर उसने मेरी जांघें, चूत, पेट ,स्तन और होंठों पर चूमा. उसके बाद वो मेरे पैरों के पास बैठ गया और मेरी टाँगें खोल कर मेरी चूत पे चूमने लगा, और मैं आनंद के सागर में डूबती जा रही थी।
उसके बाद वो धीरे से अपनी जीभ मेरी चूत के अन्दर डाल कर फिराने लगा, मुझे भी मज़ा आया और मेरी चूत भी पानी छोड़ने लगी। अब सिर्फ़ चूत चटवाने से मेरा कहां कुछ बनने वाला था तो मैंने कहा, "अमितेश, अपनी कमर इधर घुमाओ, मैं तुम्हारा लंड चूसना चाहती हूँ।”
वो उठा और आकर मेरे ऊपर उल्टा लेट गया जिससे उसका लंड ऊपर से मेरे मुँह में जा रहा था और वो झुक कर मेरी चूत चाट रहा था। जैसे जैसे मज़ा बढ़ता गया उसकी जीभ और लंड की रफ़्तार बढती चली गयी।
४-५ मिनट तक ये खेल चलता रहा और फिर अचानक मेरे बदन में जैसे बिजली दौड़ गयी, मैंने जितना हो सकता था उसका लंड मुँह में ले लिया और उसे दांतों से काट खाया, ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर ऊपर को उछालती हुई मैं झड़ गयी, मेरा बदन अकड़ गया और मैंने अपने नाखून उसके कूल्हों में गाड़ दिए। जब मैं शांत हुई तो मैंने उसका मुँह अपनी चूत से हटाया और कहा ,” ला अब मैं तेरा पानी छुड़वाती हूँ।”
तो वो बोला,"मासी एक प्रार्थना है।”
मैं बोली, “क्या?”
तो उसने मेरे स्तनों को अपने हाथों में पकड़ कर दबाते हुए कहा," मैं आपको चोद कर अपना पानी छुड़वाना चाहता हूँ, अगर आपको ऐतराज़ ना हो, तो!”
"भला, मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है, जैसे चाहो मुझे चोद लो !”
मेरी इजाज़त पा कर उसने मेरी शर्ट और ब्रा भी उतार दी और मेरे ऊपर लेट कर बोला,"संजू, इसे हाथ में पकड़ो और अपनी चूत पर रखो।”
ज़िन्दगी में पहली बार उसने मुझे नाम लेकर बुलाया जो मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने भी एक गर्लफ्रेंड या पत्नी की तरह उसका कहा मानते हुए उसका लंड अपनी चूत पर रखा और उसने बड़े आराम से धक्के लगाते हुए अपना लंड मेरी चूत में डाल कर चोदना शुरू किया। इसी दौरान उसने बताया कि वो मुझे पिछले ४ साल से चोदने की चाहत मन में रखे हुए था, जिस दिन उसने मेरी सोती हुई की नंगी विडियो अपने मोबाइल पर बनाई थी तो उस दिन उसने मेरे पास खड़े हो कर मुठ भी मारी थी और अपना माल मेरी चादर से पोंछा था।
अमितेश बड़े आराम से मुझे चोद रहा था, बीच बीच में बातें करता, मुझे चूमता और मेरे स्तनों से निकलने वाला दूध पीता हुआ मेरे सारे जिस्म का मज़ा ले रहा था और तभी उसने मुझे बताया कि यह उसकी ज़िन्दगी का पहला सेक्स है।
७-८ मिनट की आरामदायक चुदाई के बाद वो बोला,"मासी अगर मैं तुम्हारे मुँह में अपना माल छुडावाउं तो तुम्हे बुरा तो नहीं लगेगा?”
मैंने मुस्कुरा कर कहा “नहीं !”
तो उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुँह में दे दिया और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड से मेरे मुँह को चोदने लगा। बेशक मेरे दांत लगने से उसे तकलीफ हो रही थी पर अब उसका जोश देखने वाला था उसकी इच्छा थी कि अपना सारा लंड मेरे मुँह में घुसा दे, उसका लंड मेरे गले तक जा कर चोट कर रहा था और फिर कुछ जोरदार शॉट्स लगाने के बाद उसके लंड से निकली आग से मेरा मुँह भर गया उसने मेरा सर ज़ोर से पकड़ कर रखा ताकि मैं उसका लंड अपने मुँह से न निकाल सकूं, उसका गरमा गरम माल मेरे मुँह में था जिसे मैं गटा गट पी गयी। एक नौजवान से चुद कर मैं तो जैसे निहाल ही हो गई।
मुझे अमितेश से चुदना इतना अच्छा लगा कि उसके बाद भी मैं अब तक ८-१० बार उस से चुदवा चुकी हूँ। जो गांड मैंने अपने पति से नहीं मरवाई वो भी मैंने अमितेश से चुदवाई।
दोस्तों अगर आपको ये कहानी अच्छी लगी तो आप भी अपनी राय मुझे भेज सकते हैं:
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छिनाल पूनम भाभी की बुर की चुदाई
हाय ! मेरी पूनम जैसी सभी चुद्दकड़ भाभियों को मेरे लण्ड का सलाम !
दोस्तो ! मैं अपनी एक हकीकत बताता हूँ !
मेरी एक विधवा भाभी पूनम है जो दो बच्चों की माँ होने के बावजूद अपने पति के मरने के तीन साल बाद मुझे सेक्सी निगाहों से देखती थी और हुआ ऐसा कि उसका टैस्ट लेने के ख्याल से एक रात मैं उसके कमरे में गया जब सारे लोग सो गए थे। वो जाग रही थी। बातों ही बातों में मैंने उसे अपना लण्ड चुसवा दिया। वह छिणाल भी मेरा लण्ड चूस कर गरम हो गई।
फ़िर क्या था, अगले दिन से तो वो मुझे ऐसे देखने लगी जैसे मेरे लण्ड से अपना मुंह, गाण्ड और बुर चुदवा कर मेरे लण्ड को भी खा जाएगी। वो मुझ से रात में मिलने की योजना बनाने लगी।
एक रात उस छिणाल ने अपना दरवाजा खुला रखा और पेट में दर्द के बहने मुझे बुलाया। मैं उसके कमरे में गया तो देखा कि नीचे बिछावन तैयार है। मैंने पूछा कि कहाँ है दर्द तो बोली कि लेट कर दिखाती हूँ पर पहले दरवाजा तो बंद कर दूँ कोई आ जायेगा। उसने दरवाजा बंद किया और लेट कर मुझे बुलाया।
जब मैं नजदीक गया तो उसने मुझे पकड़ लिया और कहा कि देवरजी कल रात से से आप मेरे भरतार (पति ) हो गए हैं। जो आपके भइया बाकी छोड़ गए हैं उसे आप पूरा करो। अभी मेरी उमर तो ३२ ही है। भला ये भी कोई बिना चुदवाए रहने की उमर है। आपने कल अपना लंड चुसवा कर मुझे गर्म कर दिया है। अब तो मुझे अपना बुर चोदवाना ही होगा। तुम नहीं तो कोई और सही। पर इससे तुझे गुस्सा होगा सो तुम ही मुझे चोदते रहो अब सारी उमर। जब जी चाहे।
उसकी ये सारी बातें सुन कर मेरे लंड में भी ताव आ गया था। वह तन कर रोड जैसा हो गया था। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने कहा- तुम भी खोल दो ना। और मेरे सारे कपड़े खोल दिए। मैंने कहा कि भाभी जान आज मैं तेरे भोंसडे जैसी बुर को चोद कर और भोंसडा बनाऊंगा पर पहले तेरे मुंह में पेलूँगा फ़िर गांड मरूँगा, तब तेरी बुर को।
उसने कहा कि मालिक जो करना है करना पर पहले एक बार इसे चोद दो। देखो ना साली तेरे लंड को देख कर कैसे पानी छोड़ रही है। अब आ जाओ ना। यह कह कर मुझे अपने ऊपर ले लिया। और मेरे लंड को अपनी बुर में घुसाने लगी और से धक्का देने लगी।
साली के बुर में मेरे लंड को घुसने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि 2 की माँ जो थी। पर भोंसड़ी की एक्सपर्ट थी। लंड के भीतर घुसते ही पैर पर पैर चढा लिया। अब उसकी बुर के सिकुड़ने के कारण उसे और मुझे मज़ा आने लगा।
वो पागलों की तरह बकने लगी- आ .... ओह। मेरे राजा। मेरे प्यारे देवर राजा। आज तुम मेरे भरतार बने हो। जोर जोर से चोदो। साली मेरी बुर बहुत दिनों से प्यासी है। आह। ओह। ओह मेरे मालिक घुसा दो अपना सारा लंड इसमें। इसका कचूमर निकल दो। आह जरा टॉर्च से देखो इस बुर को। कैसे टपटप तेरे लंड को निगल रही है।
मैंने भी देखा मेरा लंड तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था। मैंने कहा कि साली आज से तुम मेरी भाभी तो रही नहीं, तुझे कुतिया बनाकर चोदुंगा।
उसने कहा - हाँ, मुझे कुतिया बना दो। जैसे जैसे चाहो तुम इस हरामजादी बुर को चोदो। तेरे भाई ने ऐसे कभी नहीं चोदा। वो तो साला फुच फुच कर चोदता था मुझे। सिर्फ़ बच्चा पैदा करना जानता था। ओह। आह। आह। मज़ा। मज़ा आ रहा है। राजा मैं तो गई ...एई।
मैंने कहा कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। तो उसने मुझसे २-४ तेज़ झटके लगवाए और झट से मेरा लंड निकाल कर मुंह में ले लिया और कहा कि देवर जी आप अब मेरे मुंह की चुदाई करें, और टपटप मेरा लंड खाने लगी क्योकि वह जानती थी कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। वह मेरे लंड से निकले धात (वीर्य) को पीकर उसका भी स्वाद लेना चाहती थी।
मैंने कहा ओह। मेरी प्यारी चुदक्कड़ भाभी मैं झड़ने वाला हूँ तो उसने कहा कि राजा अपना धात बर्बाद मत करना। इसे मेरे मुंह में ही रहने दो। मैं अपने यार का रसपान करना चाहती हूँ।
इतने में मेरे लंड ने उजला गाढा द्रव छोड़ दिया। इसे मेरी छिनाल पूनम भाभी ने अन्तिम बूंद तक पी लिया। और कहा कि देवरजी अब तो तुम मेरे भरतार (पति) हो गए हो। जब मैं बुलाऊँ आ जाना। मैं खांस कर तुझे इशारा करुँगी। आज तो तुमने मुझे धन्य कर दिया।
तो दोस्तों, भाभियों, कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी। इसके बाद मैंने फ़िर नए नए स्टाइल से कैसे कैसे चोदा यह बताने कि उत्सुकता है मुझ में पर सोचता हूँ कि पता नहीं कैसी लगी मेरी यह कहानी। सो मुझे उत्साहित करने के लिए मुझे मेल करें !
pallav21_janu@yahoo.com
sexygirl4uonly16@gmail.com
दोस्तो ! मैं अपनी एक हकीकत बताता हूँ !
मेरी एक विधवा भाभी पूनम है जो दो बच्चों की माँ होने के बावजूद अपने पति के मरने के तीन साल बाद मुझे सेक्सी निगाहों से देखती थी और हुआ ऐसा कि उसका टैस्ट लेने के ख्याल से एक रात मैं उसके कमरे में गया जब सारे लोग सो गए थे। वो जाग रही थी। बातों ही बातों में मैंने उसे अपना लण्ड चुसवा दिया। वह छिणाल भी मेरा लण्ड चूस कर गरम हो गई।
फ़िर क्या था, अगले दिन से तो वो मुझे ऐसे देखने लगी जैसे मेरे लण्ड से अपना मुंह, गाण्ड और बुर चुदवा कर मेरे लण्ड को भी खा जाएगी। वो मुझ से रात में मिलने की योजना बनाने लगी।
एक रात उस छिणाल ने अपना दरवाजा खुला रखा और पेट में दर्द के बहने मुझे बुलाया। मैं उसके कमरे में गया तो देखा कि नीचे बिछावन तैयार है। मैंने पूछा कि कहाँ है दर्द तो बोली कि लेट कर दिखाती हूँ पर पहले दरवाजा तो बंद कर दूँ कोई आ जायेगा। उसने दरवाजा बंद किया और लेट कर मुझे बुलाया।
जब मैं नजदीक गया तो उसने मुझे पकड़ लिया और कहा कि देवरजी कल रात से से आप मेरे भरतार (पति ) हो गए हैं। जो आपके भइया बाकी छोड़ गए हैं उसे आप पूरा करो। अभी मेरी उमर तो ३२ ही है। भला ये भी कोई बिना चुदवाए रहने की उमर है। आपने कल अपना लंड चुसवा कर मुझे गर्म कर दिया है। अब तो मुझे अपना बुर चोदवाना ही होगा। तुम नहीं तो कोई और सही। पर इससे तुझे गुस्सा होगा सो तुम ही मुझे चोदते रहो अब सारी उमर। जब जी चाहे।
उसकी ये सारी बातें सुन कर मेरे लंड में भी ताव आ गया था। वह तन कर रोड जैसा हो गया था। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। उसने कहा- तुम भी खोल दो ना। और मेरे सारे कपड़े खोल दिए। मैंने कहा कि भाभी जान आज मैं तेरे भोंसडे जैसी बुर को चोद कर और भोंसडा बनाऊंगा पर पहले तेरे मुंह में पेलूँगा फ़िर गांड मरूँगा, तब तेरी बुर को।
उसने कहा कि मालिक जो करना है करना पर पहले एक बार इसे चोद दो। देखो ना साली तेरे लंड को देख कर कैसे पानी छोड़ रही है। अब आ जाओ ना। यह कह कर मुझे अपने ऊपर ले लिया। और मेरे लंड को अपनी बुर में घुसाने लगी और से धक्का देने लगी।
साली के बुर में मेरे लंड को घुसने में कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि 2 की माँ जो थी। पर भोंसड़ी की एक्सपर्ट थी। लंड के भीतर घुसते ही पैर पर पैर चढा लिया। अब उसकी बुर के सिकुड़ने के कारण उसे और मुझे मज़ा आने लगा।
वो पागलों की तरह बकने लगी- आ .... ओह। मेरे राजा। मेरे प्यारे देवर राजा। आज तुम मेरे भरतार बने हो। जोर जोर से चोदो। साली मेरी बुर बहुत दिनों से प्यासी है। आह। ओह। ओह मेरे मालिक घुसा दो अपना सारा लंड इसमें। इसका कचूमर निकल दो। आह जरा टॉर्च से देखो इस बुर को। कैसे टपटप तेरे लंड को निगल रही है।
मैंने भी देखा मेरा लंड तेजी से अन्दर बाहर हो रहा था। मैंने कहा कि साली आज से तुम मेरी भाभी तो रही नहीं, तुझे कुतिया बनाकर चोदुंगा।
उसने कहा - हाँ, मुझे कुतिया बना दो। जैसे जैसे चाहो तुम इस हरामजादी बुर को चोदो। तेरे भाई ने ऐसे कभी नहीं चोदा। वो तो साला फुच फुच कर चोदता था मुझे। सिर्फ़ बच्चा पैदा करना जानता था। ओह। आह। आह। मज़ा। मज़ा आ रहा है। राजा मैं तो गई ...एई।
मैंने कहा कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। तो उसने मुझसे २-४ तेज़ झटके लगवाए और झट से मेरा लंड निकाल कर मुंह में ले लिया और कहा कि देवर जी आप अब मेरे मुंह की चुदाई करें, और टपटप मेरा लंड खाने लगी क्योकि वह जानती थी कि मैं भी झड़ने वाला हूँ। वह मेरे लंड से निकले धात (वीर्य) को पीकर उसका भी स्वाद लेना चाहती थी।
मैंने कहा ओह। मेरी प्यारी चुदक्कड़ भाभी मैं झड़ने वाला हूँ तो उसने कहा कि राजा अपना धात बर्बाद मत करना। इसे मेरे मुंह में ही रहने दो। मैं अपने यार का रसपान करना चाहती हूँ।
इतने में मेरे लंड ने उजला गाढा द्रव छोड़ दिया। इसे मेरी छिनाल पूनम भाभी ने अन्तिम बूंद तक पी लिया। और कहा कि देवरजी अब तो तुम मेरे भरतार (पति) हो गए हो। जब मैं बुलाऊँ आ जाना। मैं खांस कर तुझे इशारा करुँगी। आज तो तुमने मुझे धन्य कर दिया।
तो दोस्तों, भाभियों, कैसी लगी मेरी यह सच्ची कहानी। इसके बाद मैंने फ़िर नए नए स्टाइल से कैसे कैसे चोदा यह बताने कि उत्सुकता है मुझ में पर सोचता हूँ कि पता नहीं कैसी लगी मेरी यह कहानी। सो मुझे उत्साहित करने के लिए मुझे मेल करें !
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बृहस्पतिवार, 29 मार्च 2012
ऋतु और मुक्ता की मस्तियाँ
मैं हूँ सुमीत। मैंने यह महसूस किया है कि यहां अधिकतर, या शायद सभी, कहानियाँ झूठी हैं। फ़िर भी मुझे अन्तर्वासना बहुत पसन्द है क्योंकि यहाँ से आपको आपकी अपनी भाषा में बेहतरीन कामुक कथाएँ मिल जाती हैं।
मैंने सोचा कि अगर अपनी कल्पना से ही कहानी लिखनी है तो क्यों न सच बोल कर ही क्यों न लिखा जाए, इससे पाठकों के साथ धोखा भी नहीं होगा। इसलिए मैं आपको पहले ही बता दूँ कि यह कहानी कपोल-कल्पित है और सिर्फ़ पाठकों के मनोरंजन के लिए लिखी गई है।
तो प्रस्तुत है मेरी काल्पनिक कथा :
मुक्ता को कोलेज़ में आए अभी एक हफ़्ता भी नहीं हुआ था कि पूरे कोलेज़ के लड़कों में उसके बड़े बड़े, तने हुए गोल गोल स्तन और मोटे मोटे नितम्बों के चर्चे होने लगे थे।
मुक्ता ने अभी अभी कैथल के इन्ज़िनियरिन्ग कोलेज़ में आई टी ब्रांच में प्रवेश लिया था। मुक्ता कोहर वैसे हाँसी से थी पर ए.आई.ई.ई.ई. के कारण उसे यही कोलेज़ मिला था जो कि उसके शहर से काफ़ी दूर है। इसी कारण उसे होस्टल में रहना था।
मुक्ता अपने माँ-बाप की इकलौती बेटी है और अपने पापा की बहुत लाड़ली है। उसका व्यव्हार बिल्कुल बच्चों जैसा था। उसे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। पर ऐसा भी नहीं था कि वो इससे बिल्कुल अनभिज्ञ थी। बस उसे सही जानकारी नहीं मिल पाई थी।
मुक्ता पहले दिन कक्षा में आई तो सबकी नज़र उसके गोल-गोल स्तनों पर पड़ी। पूरी कक्षा में उसके जैसे तने हुए और सुडौल वक्ष शायद किसी लड़की के नहीं थे। उसे तंग ब्रा पहनने की आदत थी जिस कारण उसके वक्ष का ऊपरी हिस्सा फ़ूला हुआ रहता था। शायद यह कसी हुई ब्रा ही उसके वक्ष की सुडौलता का राज़ थी। उसका कद होगा कोई ५' ४" और फ़ीगर होगी ३५-२८-३६, कन्धे तक लम्बे बाल। उसके नयन-नक्श तो साधारण थे, नाक लम्बी थी। जब वो चलती थी तो उसके स्तन उसकी चाल के साथ ही चाल मिला कर उछलते थे।
कोलेज़ में आते ही उसकी सबसे पहली सहेली अभी उसकी होस्टल की रूम-मेट ऋतु ढींगरा, जो कि दिल्ली से थी और कुछ खास सुन्दर नहीं थी। मुक्ता के सामने तो वो बदसूरत ही लगती थी। हालांकि उसके स्तन भी काफ़ी बड़े और तने हुए थे और ऋतु मुक्ता से ज्यादा पतली कमर वाली थी, पर मुक्ता के गोरे रंग और गदराए बदन के सामने ऋतु की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता था। कोलेज़ का हर लड़का मुक्ता को देखते ही उसके नंगे बदन की कल्पना करने लगता था। जाने कितने लरके उसके बारे में सोच सोच कर मुठ मारते थे।
रितु दिल्ली से होने के कारण सेक्स के ममले में मुक्ता से कहीं ज्यादा जानती थी। जहाँ एक तरफ़ मुक्ता ने अपनी चूत में कभी उँगली तक नहीं घुसाई थी तो वहीं दूसरी तरफ़ ऋतु कई बार सेक्स कर चुकी थी बल्कि केला, बैंगन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल भी बखूबी जानती और करती थी।
बस अब क्या होना था, मुक्ता को एकदम सही लड़की मिल गई थी। धीरे धीरे दोनों काफ़ी अच्छी दोस्त बन गई। अब तो अपने पसन्दीदा लड़कों की बातें करने में भी दोनों को बिल्कुल शरम नहीं आती थी। फ़िर धीरे धीरे अपनी ड्रेस से लेकर अधोवस्त्रों तक की बातें खुलकर होने लगी। कई बार तो रितु मुक्ता के सामने नंगी भी हो जाती थी। शुरू में तो मुक्ता थोड़ी शरमा जाती थी पर फ़िर ऋतु के बार बार उकसाने पर वो भी कभी कभी ऋतु के सामने नंगी हो जाया करती थी।
शुरुआत का शरमीलापन आखिरकार खत्म होता गया और दोनों एकदम खुल गई। फ़िर तो दोनों अपनी झाँटे भी एक दूसरे से ही शेव करवाने लगी। इस से एक तो शेव अच्छी तरह हो जाती थी, दूसरा कट लगने का डर कम हो जाता था। पहली बार तो मुक्ता ऋतु से शेव करवाने में शरमा रही थी पर जब ऋतु ने कई बार उस से अपनी झांटें शेव करवा ली तो मुक्ता भी ऋतु से ही अपनी झांटें शेव करवाने के लिए तैयार हो गई।
“वाह यार ! बड़ी नर्म -नर्म और सुलझी हुई झांटें हैं तेरी तो … एक दम इंग्लिश हिरोइनों की तरह … रंग भी ब्राऊन है !” जब पहली बार ऋतु ने मुक्ता की झांटें देखी तो उसके मुंह से ये निकला।
मुक्ता थोड़ा शरमाई पर मन ही मन अपनी झांटों की तारीफ़ सुनकर खुश भी हुई। ऋतु कई बार मुक्ता की चूत का मुआयना करने के चक्कर में भी रहती थी पर मुक्ता की शर्म इतनी भी नहीं खुली थी। इसलिए वो ऋतु को अपनी झांटों से नीचे नहीं पहुँचने देती थी।
ऋतु को तो शुरू से ही नंगी होकर सोने की आदत थी, पर अब उसने मुक्ता को भी यह आदत डालने की कोशिश में लग गई थी। ऋतु ने उसे नंगी सोने के ऊपर बहुत बार लंबे -चौड़े भाषण दिए, तब कहीं जाकर मुक्ता को नंगी होकर सोने के लिए तैयार कर पायी। तो अंततः दोनों हॉस्टल के कमरे में एकदम नंगी होकर सोने लगी थी।
एक रात मुक्ता की नींद खुली तो उसने महसूस किया कि उसकी टांगों के बीच में हल्की -हल्की गुदगुदी हो रही थी जैसे कि कोई चींटी उसकी टांगों के बीच से चूत की तरफ़ बढ़ रही हो। पहले तो मुक्ता ने सोचा कि इस गुदगुदी को जारी रहने दूँ क्यूंकि उसे मज़ा सा आ रहा था पर फ़िर उसने सोचा कहीं कोई और कीड़ा -मकोड़ा न हो इसलिए उसने झट से अपना हाथ गुदगुदी वाली जगह पर लगाया तो पाया कि वो कोई चींटी नहीं बल्कि ऋतु की ऊँगली थी। मुक्ता ने ऋतु कि तरफ़ देखा तो पाया कि वो उसकी और देखकर मुस्कुरा रही थी।
मुक्ता भी पहले ज़रा मुस्कुरायी फ़िर बोली -“क्या है यार ? नींद नहीं आ रही क्या ? कम से कम मुझे तो सोने दे ! ”
ऋतु - “मैं क्या कह रही हूँ तुझे? तू सो आराम से। लोग पहले तो कपड़े उतारकर सो जाते हैं फ़िर सोचते हैं कि किसी का हाथ तक न छू जाए।”
मुक्ता-“रहने दे, तूने ही आदत डाली है मुझे। नहीं तो मैं तो अच्छी-भली …”
ऋतु -“हाँ हाँ, बड़ी आई अच्छी-भली उन कसे तंग कपडों में अपने मोटे -मोटे स्तनों को जकड़कर सोने वाली। अरे भगवान ने ये कोमल सा बदन इसलिए दिया है क्या कि तू इसे उन तंग कपडों में बांधकर इसपर अत्याचार करे?”
यह बात कहते हुए ऋतु ने अपनी ऊँगली मुक्ता के स्तनों से लेकर नीचे उसकी चूत तक हलके से फिर दी। मुक्ता भी एक बार तो सिहर सी गई। फ़िर थोड़ा संभलकर बोली -“वो तो ठीक है यार, अब फ़िर से शुरू मत हो। मैंने कब कहा कि तू ग़लत कहती है ! तेरा बस चले तो तू तो दिन भर कॉलेज में भी नंगी ही घूम आए !”
ऋतु - “हाय … तूने तो मेरे मुंह की बात छीन ली मेरी जान। ला वापिस दे दे …” इतना कहकर ऋतु ने अचानक मुक्ता के होठों पर एक हल्की सी पर ज़रा लम्बी चुम्मी कर दी।
मुक्ता थोड़ा शरमाकर बोली - “हट पागल, ये क्या कर रही है तू?”
ऋतु - “शायद इसे किस कहते हैं। तू क्या कहती है वैसे ?” ऋतु अब मुक्ता के ज़रा करीब खिसक आई थी और उसने ये बात थोड़े नशीले अंदाज़ में कही।
मुक्ता ज़रा पीछे मुंह खींचते हुए बोली - “मुझे भी पता है इसे किस कहते हैं। पर तू मुझे क्या सोचकर किस कर रही है ? मुझे अपना बॉय फ्रेंड समझा है क्या?”
ऋतु - “जो चाहे समझ ले यार, चाहे तो रात को मेरा बॉय फ्रेंड ही बन जाया कर।”
मुक्ता - “ऐसा क्या मिलेगा तुझे मुझे बॉय फ्रेंड समझ कर?”
ऋतु - “एक लड़की रात को बिस्तर पर अपने बॉय फ्रेंड से क्या चाहती है?”
मुक्ता थोड़ा सोचकर बोली - “तेरा मतलब सेक्स …”
ऋतु - “वाह मेरी जान ! सामान्य ज्ञान अच्छा है तेरा।”
मुक्ता - “क्या ख़ाक सामान्य ज्ञान है? मुझे तो ये तक नहीं पता कि सेक्स में सही-सही होता क्या है ?” मुक्ता की भी नींद उड़ चुकी थी।
ऋतु - “वो तो मुझे पता है की तू इस मामले में अभी ज़रा कच्ची है।”
मुक्ता - “ह्म्म्म … पर यार मैं १८ साल की हो गई हूँ। तुझे नहीं लगता की मुझे सबकुछ पता होना चाहिए?”
ऋतु - “हाँ -हाँ, क्यूँ नहीं पता होना चाहिए? अब तक तो तेरे प्रैक्टिकल भी हो जाने चाहिए थे।”
मुक्ता थोड़ा हिचकिचाई फ़िर बोली - “शायद तू सही कह रही है। अच्छा तो बता न, क्या होता है सेक्स में?”
ऋतु - “ज़ल्दबाजी नहीं माय डीयर, पहले तू बता कि तुझे कितना पता है?”
मुक्ता - “वो … बस पहले तो लड़का -लड़की कपड़े उतार लेते हैं, फ़िर एक -दूसरे को किस करते हैं और फ़िर बिल्कुल चिपक कर सो जाते हैं। इतना ही …” मुक्ता कुछ सोचते हुए बोली।
ऋतु मुक्ता के एक स्तन को हाथ से भींचते हुए बोली - “ये जो किस और चिपक के सोने के बीच में जो होता है न, दरअसल वो सेक्स है।”
मुक्ता एकदम से उसका हाथ पकड़ते हुए बोली - “क्या मतलब ? चिपक कर सोने से सेक्स नहीं होता?” पर मुक्ता ने उसका हाथ अपने स्तनों पर से हटाया नहीं।
ऋतु हँसते हुए बोली - “अरे नहीं। सेक्स में तो बहुत -कुछ होता है और चिपक कर सोने से कहीं ज़्यादा मज़ा भी आता है।”
मुक्ता - “अच्छा ? बता न फ़िर क्या होता है?”
“बताना क्या है ! मैं तुझे करके दिखाती हूँ .” ऋतु ने मुक्ता के दोनों स्तनों पर एक -एक किस करते हुए कहा।
मुक्ता - “तो क्या लड़के के बिना ही …”
ऋतु - “यार सिर्फ़ सिखा रही हूँ। इस सबसे तुझे थोड़ा आईडिया हो जाएगा न ! फ़िर जब तेरा बॉय फ्रेंड हो तो उसके साथ असली वाला सेक्स कर लेना !”
मुक्ता - “हाँ। ये सही रहेगा। चल फ़िर हो जा शुरू .” मुक्ता के लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा था। वो ज़रा नर्वस भी थी पर सेक्स के बारे में जानने की इच्छा उसपर हावी हो रही थी।
मुक्ता का इतना कहना था कि एकदम से ऋतु ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और ख़ुद से कसकर चिपका लिया। फ़िर वो मुक्ता के होंठों पर अपने होंठ रखकर उसे किस करने लगी। मुक्ता के मुंह से एक बार सिसकी निकली और फ़िर सिर्फ़ “म्मम्मम्म … म्मम्मम …” की आवाजें आने लगी। कोई अनजान भी ये बता सकता था कि यह आवाजें पूरी तरह वासना से भरी हुई थी। ऋतु और मुक्ता दोनों कि आँखें बंद थी और मुक्ता को ऐसा आभास हो रहा था जैसे कि वो कोई सपना देख रही हो। अपने होंठों को मुक्ता के होंठों से चिपकाए हुए ही ऋतु अपना हाथ धीरे -धीरे मुक्ता की चूत की तरफ़ बढ़ाने लगी। मुक्ता को लगा कि आज तो वो उसकी चूत को अच्छे से स्कैन करके ही रहेगी।
पर फिलहाल ऋतु का ऐसा कोई इरादा नहीं था। ऋतु अपना हाथ नीचे ले जाकर मुक्ता की टांगें खोलने की कोशिश करने लगी। मुक्ता ने भी समय की नजाकत को समझते हुए टाँगे ज़रा ढीली छोड़ दी। ऋतु तुंरत मुक्ता की दोनों टांगों को खोलकर उनके बीच में आ गई। अब ऋतु ने दोनों हाथों को मुक्ता की कमर पर ले जाकर उसे पूरी ताकत से भींच लिया और फ़िर धीरे -धीरे कमर पर हाथ फिरने लगी।
मुक्ता को काफ़ी मज़ा आने लगा। दोनों के चूचुक आपस में टकरा रहे थे और न सिर्फ़ टकरा रहे थे बल्कि पूरी ताकत के साथ एक-दूसरे को दबा रहे थे। आखिरकार ऋतु ने मुक्ता के होंठों को छोड़ा और मुक्ता को साँस लेने के लिए कुछ सेकंड का वक्त दिया। और फ़िर ये कहकर कि “थोड़ा तू भी साथ दे न यार …” फ़िर से उसके होंठों को चूसने लगी।
इस बार मुक्ता भी ऋतु के होंठों को चूस रही थी। मुक्ता को महसूस हो रहा था कि उसकी चूत की अंदरूनी दीवारें धीरे -धीरे नम हो रही थी और फ़िर पूरी तरह गीली हो गई थी। मुक्ता को तो ये भी शक था कि कहीं पानी की कुछ बूँदें बेड की चादर पर न टपक गई हों। पर इस सबकी चिंता करने का उसके पास वक्त नहीं था, वो तो जैसे स्वर्ग में तैर रही थी। अब मुक्ता को एहसास हो रहा था कि वाकई सेक्स में चिपक कर सोने से कहीं ज़्यादा मज़ा है। हलाँकि उसे अंदाजा नहीं था कि ऋतु अभी उसके साथ और क्या -क्या करने वाली थी।
दूसरी तरफ़ ऋतु की भी चूत पूरी तरह से पानी में तर थी। अचानक ऋतु की चूत से निकली पानी की एक बूँद मुक्ता की टांग पर गिरी तो मुक्ता को विश्वास हो गया कि ऋतु का भी वही हाल हो रहा था जो कि उसका, बस मुक्ता का ये पहला एहसास था और ऋतु तो गिनती करना छोड़ चुकी थी।
किस करते करते ऋतु अपनी जीभ से मुक्ता के होंठों को खोलने के लिए ज़ोर लगाने लगी तो मुक्ता ने उसकी इस हरकत पर कुछ कहने के लिए अपने होंठ खोले ही थे कि ऋतु ने अपनी जीभ मुक्ता के मुंह में घुसा दी। अब ऋतु मुक्ता के पूरे मुंह का जायजा ले रही थी। मुक्ता का आनंद अपने चरम पर पहुँचने लगा। इसका असर सीधा उसकी चूत पर पड़ा और उसकी चूत और ज़्यादा गीली होकर ज़ोर ज़ोर से फड़कने लगी।
थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा। फ़िर एकाएक ऋतु की जीभ मुक्ता की जीभ से टकराई और उस से खेलने लगी। मुक्ता पहले तो ज़रा हैरान हुई पर फ़िर वो भी उत्सुकता से अपनी जीभ को ऋतु की जीभ से रगड़ने लगी। अब तो दोनों के मुंह से “म्मम्मम … म्मम्मम … म्मम्मम …” की आवाजें आने लगी। ये आवाजें धीरे -धीरे और तेज़ होने लगी।
थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, फ़िर अचानक मुक्ता के शरीर में एक सरसर्राहट सी दौड़ गई और उसका अंग -अंग अकड़ने लगा। ऋतु उसका ये हाल देखकर समझ गई कि मुक्ता अब झड़ने वाली है। उसका अंदाजा सही था। मुक्ता के मुंह से एक लम्बी सी “आः ” निकली और उसकी चूत से एकदम से काफ़ी ज्यादा पानी की फुहार निकली। उसके बाद तो एक के बाद एक कई फुहारें निकलती चली गई। मुक्ता की चूत से निकला ज्यादातर पानी ऋतु की चूत से टकराकर नीचे बहने लगा। ऋतु की चूत और जांघें मुक्ता की चूत से निकले जूस से नहा गई थी।
इस जूस की गर्माहट ऋतु भी ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पायी और “आआह्ह्ह्ह्छ …. मुक्ता …. मैं भी बस्स ….. आआह्ह्छ …” कहते हुए वो भी झड़ गई। इस तरह मुक्ता की चूत से निकले पानी में नहाई हुई ऋतु की चूत एक बार फिरसे उसके ख़ुद के पानी से नहा गई। हलाँकि ऋतु की चूत से निकला पानी मुक्ता की चूत से निकले पानी से काफी कम था।
आखिरकार दोनों निढाल होकर गिर गई। थोड़ी देर तक वो दोनों एक -दूसरे से चिपक कर लम्बी -लम्बी साँसे लेती रही।
कुछ देर के बाद दोनों सामान्य हुई तो ऋतु ने कहा - “तो कैसा रहा मैडम ?”
“कमीनी, इतने दिन से तेरे साथ नंगी सो रही हूँ और तू मुझे ये सब आज सिखा रही है?” मुक्ता की आंखों में वासना साफ़ दिखाई दे रही थी और उसकी आवाज़ भी कामुक लग रही थी।
ऋतु ने मुक्ता की चूत पर ऊँगली फिराई और मुक्ता ने उसे बिल्कुल नहीं रोका। फ़िर वो उसी ऊँगली को चूसते हुए बोली - “हर काम सही समय पर करने में ही मज़ा आता है। अगर मैंने पहले ही दिन तेरे साथ कोई ऐसी वैसी हरकत की होती तो तू दोबारा कभी नंगी सोती क्या?”
पर मुक्ता का ध्यान ऋतु की बात पर नहीं था, वो तो उसकी ऊँगली की और ही देखे जा रही थी। आखिरकार जब उस से नहीं रहा गया तो वो बोल उठी - “ये तू मेरी उस में से निकला हुआ पानी क्यूँ चाट रही है ? तुझे घिन्न नहीं आती क्या ?”
“तेरी किस में से?” ऋतु जानबूझकर अनजान बनते हुए बोली।
मुक्ता - “मेरी उस में से यार !” मुक्ता अपनी चूत की और इशारा करते हुए बोली।
“पहले तो मैं तुझे ये बता दूँ की इसे ‘चूत ’ कहते हैं, क्या कहते हैं ?” ऋतु ‘चूत ’ शब्द पर ज़ोर देते हुए बोली।
मुक्ता - “चूत। पर तुझे कैसे पता?”
ऋतु - “मेरा एक बॉय फ्रेंड था १२वीं में, कुशल। उसने बताया था कि सब लड़के इसे चूत ही कहते हैं .”
मुक्ता - “क्या ? १२वीं में तेरा बॉय फ्रेंड था?”
ऋतु - “इस में क्या बड़ी बात है ? मैंने तो १२वीं में ही अपनी सील भी तुड़वा ली थी।”
मुक्ता - “क्या तुड़वा ली थी?”
ऋतु - “सील। तुझे सील नहीं पता? कभी अपनी चूत में ऊँगली डालने की कोशिश की है?”
मुक्ता - “हाँ एक बार नहाते हुए … पर ज़्यादा अन्दर नहीं गई।”
ऋतु - “वो सील की वजह से अन्दर नहीं गई। जब लड़की पहली बार सेक्स करती है तब वो सील टूट जाती है।”
“पर मुझे नहीं लगता कि मेरी सील टूट गई है।” मुक्ता अपनी चूत में ऊँगली घुसाने की कोशिश करते हुए बोली।
ऋतु - “अरे मेरी जान, अभी कहाँ सेक्स हुआ है?”
मुक्ता - “तो वो सब??”
ऋतु - “वो तो बस मैं तुझे और खुद को गरम कर रही थी, मतलब सेक्स के लिए तैयार कर रही थी।”
मुक्ता - “ओह्ह … और ये तू मेरी चूत का पानी क्यूँ चाट रही थी?”
ऋतु - “क्यूंकि मुझे अच्छा लगता है। ये सब सेक्स का ही हिस्सा है। तू भी सीख जायेगी धीरे धीरे। चल अब टाइम ख़राब मत कर। अभी बहुत कुछ बाकी है। कल रविवार है इसलिए हम लेट भी उठ सकते हैं। फ़िर कभी इतना टाइम नहीं मिलेगा। दिखा ज़रा …” कहकर ऋतु ने मुक्ता के दोनों स्तन अपने हाथों में जकड़ लिए और उन्हें दबाने लगी।
मुक्ता को पहले तो थोड़ा दर्द हुआ पर साथ ही साथ अच्छा भी लगा इसलिए उसने ऋतु को रोका नहीं। मुक्ता के स्तनों को दबाते -दबाते उसने एक बार मुक्ता के चुचूक को अपनी उँगलियों के बीच में पकड़ा और ज़ोर से मसल दिया।
मुक्ता लगभग चीख उठी थी, पर तभी ऋतु ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगी। पर उसने मुक्ता के चुचूक को मसलना और उसके स्तनों को दबाना जारी रखा।
थोड़ी देर बाद मुक्ता को आदत सी पड़ गई और उसे अब सिर्फ़ मज़ा आ रहा था। मुक्ता के मुंह से कामुक सिस्कारियां निकलने लगी थी और उसकी चूत अन्दर से गीली होने लगी थी पर अबकी बार मुक्ता इस एहसास को अच्छे से समझती थी।
थोड़ी देर मुक्ता के स्तन दबाने के बाद ऋतु ने उसका एक चुचूक अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी, पर उसने दूसरे चुचूक को मसलना जारी रखा। मुक्ता की चूत अब और ज्यादा गीली होने लगी थी।
चूत तो ऋतु की भी सूखी नहीं थी, उसकी चूत भी भीगकर गरम हो गई थी। उसने और ज्यादा तेज़ी से मुक्ता के चुचूकों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया। अब तो वो कभी कभी मुक्ता के चुचूक के आसपास का भूरा हिस्सा भी पूरा मुंह में भर लेती थी और कई बार तो इस से भी ज्यादा।
मुक्ता तेज़ी से कामुक सिस्कारियां ले रही थी और उसकी चूत से गरम -गरम पानी की बूँदें तापकने लगी थी।
अचानक ऋतु ने मुक्ता को पीठ के बल सीधा किया और ख़ुद उसके ऊपर आ गई। अब उसने मुक्ता के स्तनों को चूसना बंद कर दिया और उनपर हलके हलके किस करने लगी। पर इस से मुक्ता की साँसे और भी तेज़ होने लगी और उसकी चूत गरम होकर तेज़ी से फड़कने लगी थी।
अब ऋतु जरा ऊपर की ओर गई और मुक्ता के होंठों पर हल्के से किस किया। फ़िर वो ऐसे ही किस पे किस करते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर आने लगी। पहले गर्दन पर, फ़िर दोनों चुचूकों पर, फ़िर दोनों स्तनों के बीच में, फ़िर नाभि में और फ़िर मुक्ता की चूत से जरा ऊपर ऋतु ने हल्की हल्की किस की। फ़िर ऋतु ने मुक्ता की चूत को ध्यान से देखा। एकदम सफ़ाचट गुलाबी गुलाबी चूत देख कर एक बार तो ऋतु को मुक्ता से ईर्ष्या होने लगी क्योंकि खुद उसकी चूत का रंग काला पड़ चुका था। मुक्ता की चूत से निकले पानी से भीगे होने के कारण उसकी चूत चमक रही थी।
फ़िर उसने मुक्ता की शिश्निका को देखा जो कि हल्के हल्के से फ़ड़फ़ड़ाने लगी थी। ऋतु ने मुक्ता की तांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर खोला और धीरे से उस पर झुकी तो उसकी गरम सांसें मुक्ता की शिश्निका से जा टकराई। इस से मुक्ता की चूत से पानी की २-४ बूंदें टपक गई और उसकी क्लिट और तेज़ी से फ़ड़कने लगी।
ऋतु ने अपनी जीभ के ऊपरी हिस्से को हल्के से मुक्ता की क्लिट पर छुआ दिया तो उसे भी पता लग गया कि उसकी क्लिट काफ़ी गर्म थी। ऋतु कि इस अचनक हरकत से मुक्ता एक बार तो उछल पड़ी और उसके गले से एक ज़ोर की सिसकी निकली। फ़िर ऋतु ने धीरे धीरे अपनी जीभ को मुक्ता कि क्लिट पर फ़िराना चालू किया तो मुक्ता ने भी अपने नितम्ब ऊपर उठा लिए।
उसका मन कर रहा था कि अपनी चूत को ऋतु के मुँह में घुसेड़ दे जिस से उसे कुछ राहत मिल सके। ऋतु भी मुक्ता की हालत को समझ गई और उसने मुक्ता की टांगों को थोड़ा और चौड़ा किया और उसकी क्लिट को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगी।
मुक्ता तो जैसे आनन्द के महासागर में गोते लगा रही थी। उसके मुँह से “आह ह आऽऽह उह म्म्म आह्म्म…” की आवाज़ें आनी बंद ही नहीं हो रही थी ।
थोड़ी देर तक यही चलता रहा। फ़िर ऋतु ने अपनी जीभ को मुक्ता की चूत में लगा दिया और ज़ोर से अन्दर घुसाने का प्रयास करने लगी। उसकी जीभ थोड़ी सी ही अन्दर जा पाई।
ऋतु ने मुक्ता की टांगों को और चौड़ा किया और उसकी चूत को अपने दोनों हाथों की उँगलियों से थोड़ा और चौड़ा किया और फ़िर अपनी जीभ तेज़ी से अन्दर -बाहर करने लग।
मुक्ता को और भी मज़ा आने लगा और वो “आह्ह ... अआछ ... आःह्छ ...” करने लगी। ऋतु ने पहले एक ऊँगली, फ़िर दो और फ़िर तीन उँगलियाँ अपनी चूत में घुसा ली और तेज़ी से अन्दर -बाहर करने लगी।
मुक्ता लगातार अपने नितम्ब उछाल रही थी। ऋतु ने स्पीड और तेज़ कर दी। बस अब मुक्ता के लिए और सह पाना नामुमकिन था। मुक्ता के मुंह से एक बार ज़ोर की “आया ... आआआअह्ह्ह ... आःह्ह्ह्छ ....” निकली और मुक्ता ने पूरा ज़ोर लगाकर अपने नितम्ब ऊपर उठा लिए। आखिरकार मुक्ता बड़ी ज़ोर से ऋतु के मुंह में झड़ी।
मुक्ता के पानी की फुहार से ऋतु का पूरा मुंह भर गया और उसका पूरा चेहरा भी गीला हो गया। ऋतु ने अपनी ऊँगली की स्पीड भी बढ़ा दी और कुछ ही सेकंड में वो भी झड़ गई।
उसने मुक्ता की ओर देखा तो उसका मुंह लाल हो चुका था और वो आँखें बंद करके लेटी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो एक लम्बी रेस लगाकर आई हो। मुंह लाल होने के कारण मुक्ता और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। वैसे भी मुक्ता का शरीर इतना नाज़ुक था कि अगर कोई उसका हाथ भी कसकर पकड़ लेता था तो वो लाल हो जाता था, फिर इतना कुछ करने के बाद मुंह तो लाल होना ही था।
थोड़ी देर तक मुक्ता और ऋतु यूँ ही लेटी रही। फ़िर मुक्ता ने ऋतु से पूछा - “क्या अब मेरी सील टूट गई है?”
ऋतु ने मुस्कुराते हुए कहा - “नहीं यार ! जब कोई लड़का अपना लण्ड तेरी चूत में घुसायेगा तभी वो सील टूटेगी।”
मुक्ता - “तो इसका मतलब तू ...”
ऋतू - “हाँ ! मैं तो बहुत से लड़कों का लण्ड अपनी चूत मैं घुसवा चुकी हूँ।”
“और ये लंड क्या होता है?” मुक्ता ने भोली सी सूरत बनाकर पूछा तो ऋतु भी उसके भोलेपन पर मुस्कुराये बिना न रह सकी। कहाँ एक तरफ़ थी मुक्ता जिसने लण्ड देखना तो दूर उसका नाम भी पहली बार सुना था और कहाँ दूसरी तरफ़ थी ऋतु जो न जाने कितने लड़कों के तरह तरह के लण्ड अपनी चूत में ले चुकी थी, कई बार तो २-२ एक साथ।
आखिरकार ऋतु ने एक लम्बी साँस ली और बोली - “चलो मैडम, अब मैं आपको लण्ड का पाठ पढाती हूँ।” और फ़िर ऋतु ने मुक्ता को विस्तार से लण्ड के बारे में बताया .
उस दिन के बाद तो जैसे यह मस्तियाँ ऋतु और मुक्ता कि दिनचर्या का हिस्सा बन गई। अब तो मुक्ता को २-३ बार झड़े बिना नींद नहीं आती थी। दिन में मौका मिल जाता तो मुक्ता कभी खाली नहीं जाने देती थी।
ऋतु भी अब समझने लगी थी कि मुक्ता अब ज़्यादा दिन लण्ड के बिना नहीं रह सकती, इसलिए उसने मुक्ता को उनके क्लास के दोस्तों में से ही किसी लड़के को अपना बॉय फ्रेंड बनाने की सलाह दी। लेकिन मुक्ता के लिए अपने दोस्तों में से चुनाव करना इतना आसान नहीं था। हलाँकि मुक्ता के हुस्न के जलवे देखने के बाद कई लड़के उसे प्रोपोज कर चुके थे। पर उनपर विश्वास करना मुक्ता के लिए मुमकिन नहीं था। इसलिए मुक्ता अनजान लड़कों को हमेशा मना कर दिया करती थी चाहे कोई कितना भी स्मार्ट क्यूँ न लगे। उसे कैसे पता चलता कि कौन सा लड़का उसकी इच्छाओं को सही तरह समझ पायेगा और कॉलेज में उसकी छवि ख़राब नहीं करेगा !
आख़िर में इस समस्या का हल भी ऋतु ने ही निकाला।
शेष अगली बार ...
दोस्तों , आप अपनी प्रतिक्रिया मुझे ज़रूर भेजें।
इससे मुझे कहानी के अगले भाग को और अच्छा लिखने में बहुत मदद मिलेगी।
मेरी इ-मेल है - 1stunwrittenstory@gmail.com
कहानी का अगला भाग ज़ल्द ही लिखूंगा।
तब तक के लिए
गुड बाय !
मैंने सोचा कि अगर अपनी कल्पना से ही कहानी लिखनी है तो क्यों न सच बोल कर ही क्यों न लिखा जाए, इससे पाठकों के साथ धोखा भी नहीं होगा। इसलिए मैं आपको पहले ही बता दूँ कि यह कहानी कपोल-कल्पित है और सिर्फ़ पाठकों के मनोरंजन के लिए लिखी गई है।
तो प्रस्तुत है मेरी काल्पनिक कथा :
मुक्ता को कोलेज़ में आए अभी एक हफ़्ता भी नहीं हुआ था कि पूरे कोलेज़ के लड़कों में उसके बड़े बड़े, तने हुए गोल गोल स्तन और मोटे मोटे नितम्बों के चर्चे होने लगे थे।
मुक्ता ने अभी अभी कैथल के इन्ज़िनियरिन्ग कोलेज़ में आई टी ब्रांच में प्रवेश लिया था। मुक्ता कोहर वैसे हाँसी से थी पर ए.आई.ई.ई.ई. के कारण उसे यही कोलेज़ मिला था जो कि उसके शहर से काफ़ी दूर है। इसी कारण उसे होस्टल में रहना था।
मुक्ता अपने माँ-बाप की इकलौती बेटी है और अपने पापा की बहुत लाड़ली है। उसका व्यव्हार बिल्कुल बच्चों जैसा था। उसे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। पर ऐसा भी नहीं था कि वो इससे बिल्कुल अनभिज्ञ थी। बस उसे सही जानकारी नहीं मिल पाई थी।
मुक्ता पहले दिन कक्षा में आई तो सबकी नज़र उसके गोल-गोल स्तनों पर पड़ी। पूरी कक्षा में उसके जैसे तने हुए और सुडौल वक्ष शायद किसी लड़की के नहीं थे। उसे तंग ब्रा पहनने की आदत थी जिस कारण उसके वक्ष का ऊपरी हिस्सा फ़ूला हुआ रहता था। शायद यह कसी हुई ब्रा ही उसके वक्ष की सुडौलता का राज़ थी। उसका कद होगा कोई ५' ४" और फ़ीगर होगी ३५-२८-३६, कन्धे तक लम्बे बाल। उसके नयन-नक्श तो साधारण थे, नाक लम्बी थी। जब वो चलती थी तो उसके स्तन उसकी चाल के साथ ही चाल मिला कर उछलते थे।
कोलेज़ में आते ही उसकी सबसे पहली सहेली अभी उसकी होस्टल की रूम-मेट ऋतु ढींगरा, जो कि दिल्ली से थी और कुछ खास सुन्दर नहीं थी। मुक्ता के सामने तो वो बदसूरत ही लगती थी। हालांकि उसके स्तन भी काफ़ी बड़े और तने हुए थे और ऋतु मुक्ता से ज्यादा पतली कमर वाली थी, पर मुक्ता के गोरे रंग और गदराए बदन के सामने ऋतु की ओर किसी का ध्यान ही नहीं जाता था। कोलेज़ का हर लड़का मुक्ता को देखते ही उसके नंगे बदन की कल्पना करने लगता था। जाने कितने लरके उसके बारे में सोच सोच कर मुठ मारते थे।
रितु दिल्ली से होने के कारण सेक्स के ममले में मुक्ता से कहीं ज्यादा जानती थी। जहाँ एक तरफ़ मुक्ता ने अपनी चूत में कभी उँगली तक नहीं घुसाई थी तो वहीं दूसरी तरफ़ ऋतु कई बार सेक्स कर चुकी थी बल्कि केला, बैंगन जैसी चीज़ों का इस्तेमाल भी बखूबी जानती और करती थी।
बस अब क्या होना था, मुक्ता को एकदम सही लड़की मिल गई थी। धीरे धीरे दोनों काफ़ी अच्छी दोस्त बन गई। अब तो अपने पसन्दीदा लड़कों की बातें करने में भी दोनों को बिल्कुल शरम नहीं आती थी। फ़िर धीरे धीरे अपनी ड्रेस से लेकर अधोवस्त्रों तक की बातें खुलकर होने लगी। कई बार तो रितु मुक्ता के सामने नंगी भी हो जाती थी। शुरू में तो मुक्ता थोड़ी शरमा जाती थी पर फ़िर ऋतु के बार बार उकसाने पर वो भी कभी कभी ऋतु के सामने नंगी हो जाया करती थी।
शुरुआत का शरमीलापन आखिरकार खत्म होता गया और दोनों एकदम खुल गई। फ़िर तो दोनों अपनी झाँटे भी एक दूसरे से ही शेव करवाने लगी। इस से एक तो शेव अच्छी तरह हो जाती थी, दूसरा कट लगने का डर कम हो जाता था। पहली बार तो मुक्ता ऋतु से शेव करवाने में शरमा रही थी पर जब ऋतु ने कई बार उस से अपनी झांटें शेव करवा ली तो मुक्ता भी ऋतु से ही अपनी झांटें शेव करवाने के लिए तैयार हो गई।
“वाह यार ! बड़ी नर्म -नर्म और सुलझी हुई झांटें हैं तेरी तो … एक दम इंग्लिश हिरोइनों की तरह … रंग भी ब्राऊन है !” जब पहली बार ऋतु ने मुक्ता की झांटें देखी तो उसके मुंह से ये निकला।
मुक्ता थोड़ा शरमाई पर मन ही मन अपनी झांटों की तारीफ़ सुनकर खुश भी हुई। ऋतु कई बार मुक्ता की चूत का मुआयना करने के चक्कर में भी रहती थी पर मुक्ता की शर्म इतनी भी नहीं खुली थी। इसलिए वो ऋतु को अपनी झांटों से नीचे नहीं पहुँचने देती थी।
ऋतु को तो शुरू से ही नंगी होकर सोने की आदत थी, पर अब उसने मुक्ता को भी यह आदत डालने की कोशिश में लग गई थी। ऋतु ने उसे नंगी सोने के ऊपर बहुत बार लंबे -चौड़े भाषण दिए, तब कहीं जाकर मुक्ता को नंगी होकर सोने के लिए तैयार कर पायी। तो अंततः दोनों हॉस्टल के कमरे में एकदम नंगी होकर सोने लगी थी।
एक रात मुक्ता की नींद खुली तो उसने महसूस किया कि उसकी टांगों के बीच में हल्की -हल्की गुदगुदी हो रही थी जैसे कि कोई चींटी उसकी टांगों के बीच से चूत की तरफ़ बढ़ रही हो। पहले तो मुक्ता ने सोचा कि इस गुदगुदी को जारी रहने दूँ क्यूंकि उसे मज़ा सा आ रहा था पर फ़िर उसने सोचा कहीं कोई और कीड़ा -मकोड़ा न हो इसलिए उसने झट से अपना हाथ गुदगुदी वाली जगह पर लगाया तो पाया कि वो कोई चींटी नहीं बल्कि ऋतु की ऊँगली थी। मुक्ता ने ऋतु कि तरफ़ देखा तो पाया कि वो उसकी और देखकर मुस्कुरा रही थी।
मुक्ता भी पहले ज़रा मुस्कुरायी फ़िर बोली -“क्या है यार ? नींद नहीं आ रही क्या ? कम से कम मुझे तो सोने दे ! ”
ऋतु - “मैं क्या कह रही हूँ तुझे? तू सो आराम से। लोग पहले तो कपड़े उतारकर सो जाते हैं फ़िर सोचते हैं कि किसी का हाथ तक न छू जाए।”
मुक्ता-“रहने दे, तूने ही आदत डाली है मुझे। नहीं तो मैं तो अच्छी-भली …”
ऋतु -“हाँ हाँ, बड़ी आई अच्छी-भली उन कसे तंग कपडों में अपने मोटे -मोटे स्तनों को जकड़कर सोने वाली। अरे भगवान ने ये कोमल सा बदन इसलिए दिया है क्या कि तू इसे उन तंग कपडों में बांधकर इसपर अत्याचार करे?”
यह बात कहते हुए ऋतु ने अपनी ऊँगली मुक्ता के स्तनों से लेकर नीचे उसकी चूत तक हलके से फिर दी। मुक्ता भी एक बार तो सिहर सी गई। फ़िर थोड़ा संभलकर बोली -“वो तो ठीक है यार, अब फ़िर से शुरू मत हो। मैंने कब कहा कि तू ग़लत कहती है ! तेरा बस चले तो तू तो दिन भर कॉलेज में भी नंगी ही घूम आए !”
ऋतु - “हाय … तूने तो मेरे मुंह की बात छीन ली मेरी जान। ला वापिस दे दे …” इतना कहकर ऋतु ने अचानक मुक्ता के होठों पर एक हल्की सी पर ज़रा लम्बी चुम्मी कर दी।
मुक्ता थोड़ा शरमाकर बोली - “हट पागल, ये क्या कर रही है तू?”
ऋतु - “शायद इसे किस कहते हैं। तू क्या कहती है वैसे ?” ऋतु अब मुक्ता के ज़रा करीब खिसक आई थी और उसने ये बात थोड़े नशीले अंदाज़ में कही।
मुक्ता ज़रा पीछे मुंह खींचते हुए बोली - “मुझे भी पता है इसे किस कहते हैं। पर तू मुझे क्या सोचकर किस कर रही है ? मुझे अपना बॉय फ्रेंड समझा है क्या?”
ऋतु - “जो चाहे समझ ले यार, चाहे तो रात को मेरा बॉय फ्रेंड ही बन जाया कर।”
मुक्ता - “ऐसा क्या मिलेगा तुझे मुझे बॉय फ्रेंड समझ कर?”
ऋतु - “एक लड़की रात को बिस्तर पर अपने बॉय फ्रेंड से क्या चाहती है?”
मुक्ता थोड़ा सोचकर बोली - “तेरा मतलब सेक्स …”
ऋतु - “वाह मेरी जान ! सामान्य ज्ञान अच्छा है तेरा।”
मुक्ता - “क्या ख़ाक सामान्य ज्ञान है? मुझे तो ये तक नहीं पता कि सेक्स में सही-सही होता क्या है ?” मुक्ता की भी नींद उड़ चुकी थी।
ऋतु - “वो तो मुझे पता है की तू इस मामले में अभी ज़रा कच्ची है।”
मुक्ता - “ह्म्म्म … पर यार मैं १८ साल की हो गई हूँ। तुझे नहीं लगता की मुझे सबकुछ पता होना चाहिए?”
ऋतु - “हाँ -हाँ, क्यूँ नहीं पता होना चाहिए? अब तक तो तेरे प्रैक्टिकल भी हो जाने चाहिए थे।”
मुक्ता थोड़ा हिचकिचाई फ़िर बोली - “शायद तू सही कह रही है। अच्छा तो बता न, क्या होता है सेक्स में?”
ऋतु - “ज़ल्दबाजी नहीं माय डीयर, पहले तू बता कि तुझे कितना पता है?”
मुक्ता - “वो … बस पहले तो लड़का -लड़की कपड़े उतार लेते हैं, फ़िर एक -दूसरे को किस करते हैं और फ़िर बिल्कुल चिपक कर सो जाते हैं। इतना ही …” मुक्ता कुछ सोचते हुए बोली।
ऋतु मुक्ता के एक स्तन को हाथ से भींचते हुए बोली - “ये जो किस और चिपक के सोने के बीच में जो होता है न, दरअसल वो सेक्स है।”
मुक्ता एकदम से उसका हाथ पकड़ते हुए बोली - “क्या मतलब ? चिपक कर सोने से सेक्स नहीं होता?” पर मुक्ता ने उसका हाथ अपने स्तनों पर से हटाया नहीं।
ऋतु हँसते हुए बोली - “अरे नहीं। सेक्स में तो बहुत -कुछ होता है और चिपक कर सोने से कहीं ज़्यादा मज़ा भी आता है।”
मुक्ता - “अच्छा ? बता न फ़िर क्या होता है?”
“बताना क्या है ! मैं तुझे करके दिखाती हूँ .” ऋतु ने मुक्ता के दोनों स्तनों पर एक -एक किस करते हुए कहा।
मुक्ता - “तो क्या लड़के के बिना ही …”
ऋतु - “यार सिर्फ़ सिखा रही हूँ। इस सबसे तुझे थोड़ा आईडिया हो जाएगा न ! फ़िर जब तेरा बॉय फ्रेंड हो तो उसके साथ असली वाला सेक्स कर लेना !”
मुक्ता - “हाँ। ये सही रहेगा। चल फ़िर हो जा शुरू .” मुक्ता के लिए इंतजार करना मुश्किल हो रहा था। वो ज़रा नर्वस भी थी पर सेक्स के बारे में जानने की इच्छा उसपर हावी हो रही थी।
मुक्ता का इतना कहना था कि एकदम से ऋतु ने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और ख़ुद से कसकर चिपका लिया। फ़िर वो मुक्ता के होंठों पर अपने होंठ रखकर उसे किस करने लगी। मुक्ता के मुंह से एक बार सिसकी निकली और फ़िर सिर्फ़ “म्मम्मम्म … म्मम्मम …” की आवाजें आने लगी। कोई अनजान भी ये बता सकता था कि यह आवाजें पूरी तरह वासना से भरी हुई थी। ऋतु और मुक्ता दोनों कि आँखें बंद थी और मुक्ता को ऐसा आभास हो रहा था जैसे कि वो कोई सपना देख रही हो। अपने होंठों को मुक्ता के होंठों से चिपकाए हुए ही ऋतु अपना हाथ धीरे -धीरे मुक्ता की चूत की तरफ़ बढ़ाने लगी। मुक्ता को लगा कि आज तो वो उसकी चूत को अच्छे से स्कैन करके ही रहेगी।
पर फिलहाल ऋतु का ऐसा कोई इरादा नहीं था। ऋतु अपना हाथ नीचे ले जाकर मुक्ता की टांगें खोलने की कोशिश करने लगी। मुक्ता ने भी समय की नजाकत को समझते हुए टाँगे ज़रा ढीली छोड़ दी। ऋतु तुंरत मुक्ता की दोनों टांगों को खोलकर उनके बीच में आ गई। अब ऋतु ने दोनों हाथों को मुक्ता की कमर पर ले जाकर उसे पूरी ताकत से भींच लिया और फ़िर धीरे -धीरे कमर पर हाथ फिरने लगी।
मुक्ता को काफ़ी मज़ा आने लगा। दोनों के चूचुक आपस में टकरा रहे थे और न सिर्फ़ टकरा रहे थे बल्कि पूरी ताकत के साथ एक-दूसरे को दबा रहे थे। आखिरकार ऋतु ने मुक्ता के होंठों को छोड़ा और मुक्ता को साँस लेने के लिए कुछ सेकंड का वक्त दिया। और फ़िर ये कहकर कि “थोड़ा तू भी साथ दे न यार …” फ़िर से उसके होंठों को चूसने लगी।
इस बार मुक्ता भी ऋतु के होंठों को चूस रही थी। मुक्ता को महसूस हो रहा था कि उसकी चूत की अंदरूनी दीवारें धीरे -धीरे नम हो रही थी और फ़िर पूरी तरह गीली हो गई थी। मुक्ता को तो ये भी शक था कि कहीं पानी की कुछ बूँदें बेड की चादर पर न टपक गई हों। पर इस सबकी चिंता करने का उसके पास वक्त नहीं था, वो तो जैसे स्वर्ग में तैर रही थी। अब मुक्ता को एहसास हो रहा था कि वाकई सेक्स में चिपक कर सोने से कहीं ज़्यादा मज़ा है। हलाँकि उसे अंदाजा नहीं था कि ऋतु अभी उसके साथ और क्या -क्या करने वाली थी।
दूसरी तरफ़ ऋतु की भी चूत पूरी तरह से पानी में तर थी। अचानक ऋतु की चूत से निकली पानी की एक बूँद मुक्ता की टांग पर गिरी तो मुक्ता को विश्वास हो गया कि ऋतु का भी वही हाल हो रहा था जो कि उसका, बस मुक्ता का ये पहला एहसास था और ऋतु तो गिनती करना छोड़ चुकी थी।
किस करते करते ऋतु अपनी जीभ से मुक्ता के होंठों को खोलने के लिए ज़ोर लगाने लगी तो मुक्ता ने उसकी इस हरकत पर कुछ कहने के लिए अपने होंठ खोले ही थे कि ऋतु ने अपनी जीभ मुक्ता के मुंह में घुसा दी। अब ऋतु मुक्ता के पूरे मुंह का जायजा ले रही थी। मुक्ता का आनंद अपने चरम पर पहुँचने लगा। इसका असर सीधा उसकी चूत पर पड़ा और उसकी चूत और ज़्यादा गीली होकर ज़ोर ज़ोर से फड़कने लगी।
थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा। फ़िर एकाएक ऋतु की जीभ मुक्ता की जीभ से टकराई और उस से खेलने लगी। मुक्ता पहले तो ज़रा हैरान हुई पर फ़िर वो भी उत्सुकता से अपनी जीभ को ऋतु की जीभ से रगड़ने लगी। अब तो दोनों के मुंह से “म्मम्मम … म्मम्मम … म्मम्मम …” की आवाजें आने लगी। ये आवाजें धीरे -धीरे और तेज़ होने लगी।
थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा, फ़िर अचानक मुक्ता के शरीर में एक सरसर्राहट सी दौड़ गई और उसका अंग -अंग अकड़ने लगा। ऋतु उसका ये हाल देखकर समझ गई कि मुक्ता अब झड़ने वाली है। उसका अंदाजा सही था। मुक्ता के मुंह से एक लम्बी सी “आः ” निकली और उसकी चूत से एकदम से काफ़ी ज्यादा पानी की फुहार निकली। उसके बाद तो एक के बाद एक कई फुहारें निकलती चली गई। मुक्ता की चूत से निकला ज्यादातर पानी ऋतु की चूत से टकराकर नीचे बहने लगा। ऋतु की चूत और जांघें मुक्ता की चूत से निकले जूस से नहा गई थी।
इस जूस की गर्माहट ऋतु भी ज्यादा देर तक सहन नहीं कर पायी और “आआह्ह्ह्ह्छ …. मुक्ता …. मैं भी बस्स ….. आआह्ह्छ …” कहते हुए वो भी झड़ गई। इस तरह मुक्ता की चूत से निकले पानी में नहाई हुई ऋतु की चूत एक बार फिरसे उसके ख़ुद के पानी से नहा गई। हलाँकि ऋतु की चूत से निकला पानी मुक्ता की चूत से निकले पानी से काफी कम था।
आखिरकार दोनों निढाल होकर गिर गई। थोड़ी देर तक वो दोनों एक -दूसरे से चिपक कर लम्बी -लम्बी साँसे लेती रही।
कुछ देर के बाद दोनों सामान्य हुई तो ऋतु ने कहा - “तो कैसा रहा मैडम ?”
“कमीनी, इतने दिन से तेरे साथ नंगी सो रही हूँ और तू मुझे ये सब आज सिखा रही है?” मुक्ता की आंखों में वासना साफ़ दिखाई दे रही थी और उसकी आवाज़ भी कामुक लग रही थी।
ऋतु ने मुक्ता की चूत पर ऊँगली फिराई और मुक्ता ने उसे बिल्कुल नहीं रोका। फ़िर वो उसी ऊँगली को चूसते हुए बोली - “हर काम सही समय पर करने में ही मज़ा आता है। अगर मैंने पहले ही दिन तेरे साथ कोई ऐसी वैसी हरकत की होती तो तू दोबारा कभी नंगी सोती क्या?”
पर मुक्ता का ध्यान ऋतु की बात पर नहीं था, वो तो उसकी ऊँगली की और ही देखे जा रही थी। आखिरकार जब उस से नहीं रहा गया तो वो बोल उठी - “ये तू मेरी उस में से निकला हुआ पानी क्यूँ चाट रही है ? तुझे घिन्न नहीं आती क्या ?”
“तेरी किस में से?” ऋतु जानबूझकर अनजान बनते हुए बोली।
मुक्ता - “मेरी उस में से यार !” मुक्ता अपनी चूत की और इशारा करते हुए बोली।
“पहले तो मैं तुझे ये बता दूँ की इसे ‘चूत ’ कहते हैं, क्या कहते हैं ?” ऋतु ‘चूत ’ शब्द पर ज़ोर देते हुए बोली।
मुक्ता - “चूत। पर तुझे कैसे पता?”
ऋतु - “मेरा एक बॉय फ्रेंड था १२वीं में, कुशल। उसने बताया था कि सब लड़के इसे चूत ही कहते हैं .”
मुक्ता - “क्या ? १२वीं में तेरा बॉय फ्रेंड था?”
ऋतु - “इस में क्या बड़ी बात है ? मैंने तो १२वीं में ही अपनी सील भी तुड़वा ली थी।”
मुक्ता - “क्या तुड़वा ली थी?”
ऋतु - “सील। तुझे सील नहीं पता? कभी अपनी चूत में ऊँगली डालने की कोशिश की है?”
मुक्ता - “हाँ एक बार नहाते हुए … पर ज़्यादा अन्दर नहीं गई।”
ऋतु - “वो सील की वजह से अन्दर नहीं गई। जब लड़की पहली बार सेक्स करती है तब वो सील टूट जाती है।”
“पर मुझे नहीं लगता कि मेरी सील टूट गई है।” मुक्ता अपनी चूत में ऊँगली घुसाने की कोशिश करते हुए बोली।
ऋतु - “अरे मेरी जान, अभी कहाँ सेक्स हुआ है?”
मुक्ता - “तो वो सब??”
ऋतु - “वो तो बस मैं तुझे और खुद को गरम कर रही थी, मतलब सेक्स के लिए तैयार कर रही थी।”
मुक्ता - “ओह्ह … और ये तू मेरी चूत का पानी क्यूँ चाट रही थी?”
ऋतु - “क्यूंकि मुझे अच्छा लगता है। ये सब सेक्स का ही हिस्सा है। तू भी सीख जायेगी धीरे धीरे। चल अब टाइम ख़राब मत कर। अभी बहुत कुछ बाकी है। कल रविवार है इसलिए हम लेट भी उठ सकते हैं। फ़िर कभी इतना टाइम नहीं मिलेगा। दिखा ज़रा …” कहकर ऋतु ने मुक्ता के दोनों स्तन अपने हाथों में जकड़ लिए और उन्हें दबाने लगी।
मुक्ता को पहले तो थोड़ा दर्द हुआ पर साथ ही साथ अच्छा भी लगा इसलिए उसने ऋतु को रोका नहीं। मुक्ता के स्तनों को दबाते -दबाते उसने एक बार मुक्ता के चुचूक को अपनी उँगलियों के बीच में पकड़ा और ज़ोर से मसल दिया।
मुक्ता लगभग चीख उठी थी, पर तभी ऋतु ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उन्हें चूसने लगी। पर उसने मुक्ता के चुचूक को मसलना और उसके स्तनों को दबाना जारी रखा।
थोड़ी देर बाद मुक्ता को आदत सी पड़ गई और उसे अब सिर्फ़ मज़ा आ रहा था। मुक्ता के मुंह से कामुक सिस्कारियां निकलने लगी थी और उसकी चूत अन्दर से गीली होने लगी थी पर अबकी बार मुक्ता इस एहसास को अच्छे से समझती थी।
थोड़ी देर मुक्ता के स्तन दबाने के बाद ऋतु ने उसका एक चुचूक अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी, पर उसने दूसरे चुचूक को मसलना जारी रखा। मुक्ता की चूत अब और ज्यादा गीली होने लगी थी।
चूत तो ऋतु की भी सूखी नहीं थी, उसकी चूत भी भीगकर गरम हो गई थी। उसने और ज्यादा तेज़ी से मुक्ता के चुचूकों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया। अब तो वो कभी कभी मुक्ता के चुचूक के आसपास का भूरा हिस्सा भी पूरा मुंह में भर लेती थी और कई बार तो इस से भी ज्यादा।
मुक्ता तेज़ी से कामुक सिस्कारियां ले रही थी और उसकी चूत से गरम -गरम पानी की बूँदें तापकने लगी थी।
अचानक ऋतु ने मुक्ता को पीठ के बल सीधा किया और ख़ुद उसके ऊपर आ गई। अब उसने मुक्ता के स्तनों को चूसना बंद कर दिया और उनपर हलके हलके किस करने लगी। पर इस से मुक्ता की साँसे और भी तेज़ होने लगी और उसकी चूत गरम होकर तेज़ी से फड़कने लगी थी।
अब ऋतु जरा ऊपर की ओर गई और मुक्ता के होंठों पर हल्के से किस किया। फ़िर वो ऐसे ही किस पे किस करते हुए धीरे धीरे नीचे की ओर आने लगी। पहले गर्दन पर, फ़िर दोनों चुचूकों पर, फ़िर दोनों स्तनों के बीच में, फ़िर नाभि में और फ़िर मुक्ता की चूत से जरा ऊपर ऋतु ने हल्की हल्की किस की। फ़िर ऋतु ने मुक्ता की चूत को ध्यान से देखा। एकदम सफ़ाचट गुलाबी गुलाबी चूत देख कर एक बार तो ऋतु को मुक्ता से ईर्ष्या होने लगी क्योंकि खुद उसकी चूत का रंग काला पड़ चुका था। मुक्ता की चूत से निकले पानी से भीगे होने के कारण उसकी चूत चमक रही थी।
फ़िर उसने मुक्ता की शिश्निका को देखा जो कि हल्के हल्के से फ़ड़फ़ड़ाने लगी थी। ऋतु ने मुक्ता की तांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर खोला और धीरे से उस पर झुकी तो उसकी गरम सांसें मुक्ता की शिश्निका से जा टकराई। इस से मुक्ता की चूत से पानी की २-४ बूंदें टपक गई और उसकी क्लिट और तेज़ी से फ़ड़कने लगी।
ऋतु ने अपनी जीभ के ऊपरी हिस्से को हल्के से मुक्ता की क्लिट पर छुआ दिया तो उसे भी पता लग गया कि उसकी क्लिट काफ़ी गर्म थी। ऋतु कि इस अचनक हरकत से मुक्ता एक बार तो उछल पड़ी और उसके गले से एक ज़ोर की सिसकी निकली। फ़िर ऋतु ने धीरे धीरे अपनी जीभ को मुक्ता कि क्लिट पर फ़िराना चालू किया तो मुक्ता ने भी अपने नितम्ब ऊपर उठा लिए।
उसका मन कर रहा था कि अपनी चूत को ऋतु के मुँह में घुसेड़ दे जिस से उसे कुछ राहत मिल सके। ऋतु भी मुक्ता की हालत को समझ गई और उसने मुक्ता की टांगों को थोड़ा और चौड़ा किया और उसकी क्लिट को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगी।
मुक्ता तो जैसे आनन्द के महासागर में गोते लगा रही थी। उसके मुँह से “आह ह आऽऽह उह म्म्म आह्म्म…” की आवाज़ें आनी बंद ही नहीं हो रही थी ।
थोड़ी देर तक यही चलता रहा। फ़िर ऋतु ने अपनी जीभ को मुक्ता की चूत में लगा दिया और ज़ोर से अन्दर घुसाने का प्रयास करने लगी। उसकी जीभ थोड़ी सी ही अन्दर जा पाई।
ऋतु ने मुक्ता की टांगों को और चौड़ा किया और उसकी चूत को अपने दोनों हाथों की उँगलियों से थोड़ा और चौड़ा किया और फ़िर अपनी जीभ तेज़ी से अन्दर -बाहर करने लग।
मुक्ता को और भी मज़ा आने लगा और वो “आह्ह ... अआछ ... आःह्छ ...” करने लगी। ऋतु ने पहले एक ऊँगली, फ़िर दो और फ़िर तीन उँगलियाँ अपनी चूत में घुसा ली और तेज़ी से अन्दर -बाहर करने लगी।
मुक्ता लगातार अपने नितम्ब उछाल रही थी। ऋतु ने स्पीड और तेज़ कर दी। बस अब मुक्ता के लिए और सह पाना नामुमकिन था। मुक्ता के मुंह से एक बार ज़ोर की “आया ... आआआअह्ह्ह ... आःह्ह्ह्छ ....” निकली और मुक्ता ने पूरा ज़ोर लगाकर अपने नितम्ब ऊपर उठा लिए। आखिरकार मुक्ता बड़ी ज़ोर से ऋतु के मुंह में झड़ी।
मुक्ता के पानी की फुहार से ऋतु का पूरा मुंह भर गया और उसका पूरा चेहरा भी गीला हो गया। ऋतु ने अपनी ऊँगली की स्पीड भी बढ़ा दी और कुछ ही सेकंड में वो भी झड़ गई।
उसने मुक्ता की ओर देखा तो उसका मुंह लाल हो चुका था और वो आँखें बंद करके लेटी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो एक लम्बी रेस लगाकर आई हो। मुंह लाल होने के कारण मुक्ता और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। वैसे भी मुक्ता का शरीर इतना नाज़ुक था कि अगर कोई उसका हाथ भी कसकर पकड़ लेता था तो वो लाल हो जाता था, फिर इतना कुछ करने के बाद मुंह तो लाल होना ही था।
थोड़ी देर तक मुक्ता और ऋतु यूँ ही लेटी रही। फ़िर मुक्ता ने ऋतु से पूछा - “क्या अब मेरी सील टूट गई है?”
ऋतु ने मुस्कुराते हुए कहा - “नहीं यार ! जब कोई लड़का अपना लण्ड तेरी चूत में घुसायेगा तभी वो सील टूटेगी।”
मुक्ता - “तो इसका मतलब तू ...”
ऋतू - “हाँ ! मैं तो बहुत से लड़कों का लण्ड अपनी चूत मैं घुसवा चुकी हूँ।”
“और ये लंड क्या होता है?” मुक्ता ने भोली सी सूरत बनाकर पूछा तो ऋतु भी उसके भोलेपन पर मुस्कुराये बिना न रह सकी। कहाँ एक तरफ़ थी मुक्ता जिसने लण्ड देखना तो दूर उसका नाम भी पहली बार सुना था और कहाँ दूसरी तरफ़ थी ऋतु जो न जाने कितने लड़कों के तरह तरह के लण्ड अपनी चूत में ले चुकी थी, कई बार तो २-२ एक साथ।
आखिरकार ऋतु ने एक लम्बी साँस ली और बोली - “चलो मैडम, अब मैं आपको लण्ड का पाठ पढाती हूँ।” और फ़िर ऋतु ने मुक्ता को विस्तार से लण्ड के बारे में बताया .
उस दिन के बाद तो जैसे यह मस्तियाँ ऋतु और मुक्ता कि दिनचर्या का हिस्सा बन गई। अब तो मुक्ता को २-३ बार झड़े बिना नींद नहीं आती थी। दिन में मौका मिल जाता तो मुक्ता कभी खाली नहीं जाने देती थी।
ऋतु भी अब समझने लगी थी कि मुक्ता अब ज़्यादा दिन लण्ड के बिना नहीं रह सकती, इसलिए उसने मुक्ता को उनके क्लास के दोस्तों में से ही किसी लड़के को अपना बॉय फ्रेंड बनाने की सलाह दी। लेकिन मुक्ता के लिए अपने दोस्तों में से चुनाव करना इतना आसान नहीं था। हलाँकि मुक्ता के हुस्न के जलवे देखने के बाद कई लड़के उसे प्रोपोज कर चुके थे। पर उनपर विश्वास करना मुक्ता के लिए मुमकिन नहीं था। इसलिए मुक्ता अनजान लड़कों को हमेशा मना कर दिया करती थी चाहे कोई कितना भी स्मार्ट क्यूँ न लगे। उसे कैसे पता चलता कि कौन सा लड़का उसकी इच्छाओं को सही तरह समझ पायेगा और कॉलेज में उसकी छवि ख़राब नहीं करेगा !
आख़िर में इस समस्या का हल भी ऋतु ने ही निकाला।
शेष अगली बार ...
दोस्तों , आप अपनी प्रतिक्रिया मुझे ज़रूर भेजें।
इससे मुझे कहानी के अगले भाग को और अच्छा लिखने में बहुत मदद मिलेगी।
मेरी इ-मेल है - 1stunwrittenstory@gmail.com
कहानी का अगला भाग ज़ल्द ही लिखूंगा।
तब तक के लिए
गुड बाय !
साक्षी की चूत मारी
मेरा नाम विकास है, मेरा कद ५'७" और मेरा लण्ड ६" का है। मैं गुड़गांव का रहने वाला हूँ। मैंने बहुत सी कहानियाँ पढ़ी तो मेरा भी मन एक कहानी लिखने को हुआ।
हमारे पड़ोस में साक्षी नाम की एक लड़की रहती है। मैं उसे बचपन से जानता हूँ पर अब वो जवान हो गई है, उसकी फ़ीगर ३२ २८ ३० है। वो मुझे बहुत ही सेक्सी लगती है। मैं उसे बहुत पसन्द करता हूँ। वो अक्सर हमारे घर आती रहती है पर मेरी कभी उससे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई।
एक दिन उसकी मम्मी हमारे घर पर आई और उसने मुझे कहा कि साक्षी को इंटरनेट पर साइंस का प्रोजेक्ट निकालना है। वो मेरे पास इस लिए आई थी क्योंकि मैं कंप्यूटर हार्डवेयर नेट्वर्किंग का काम करता हूँ। मैं अन्दर से खुश हो गया।
लेकिन मैंने ना जाने का बहाना बनाया। उसने कहा उसे बहुत जरुरी प्रोजेक्ट बनाना है। मैंने कहा- ठीक है।
फ़िर मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठाया और हम दोनों साइबर कैफे चले गए। हमने वहां प्राइवेट केबिन लिया, जैसे ही हम केबिन में गए तो देखा कि केबिन में एक ही कुर्सी थी, मैंने कैफे वाले से कहा तो उसने मना कर दिया क्योंकि उस दिन रविवार था और कैफे में बहुत भीड़ थी।
जब मैंने साक्षी को कहा तो उसने कहा कोई बात नहीं हम एडजस्ट कर लेते हैं।
हम केबिन में गए और मैंने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया। केबिन की कुर्सी छोटी थी जिससे हम दोनों चिपक कर बैठ गए। उस दिन साक्षी ने सफ़ेद सुइट -सलवार पहनी थी। मेरी टांग उसकी टांग से चिपकी हुई थी, जिस से मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया।
उस दिन शायद मेरी किस्मत अच्छी थी जिससे उसकी प्रोजेक्ट वाली साईट खुल नहीं रही थी। कुछ देर बाद उसने कहा कि प्रोजेक्ट साईट तो खुल नहीं रही चलो चलते हैं।
लेकिन मैंने कहा कि मैं तब तक अपनी आइ.डी चेक कर लेता हूँ, तो वो मान गई।
जैसे ही मैंने कीबोर्ड पर लिखना शुरू किया तो मेरा हाथ साक्षी के बूब्स पर लग गया। उसके बूब्स एक दम कड़क थे। फिर मैंने आपनी साईट खोली तो उसमे सेक्सी पिक्चर आई हुई थी। जैसे ही वो खुली तो मैंने उन्हें झट से बंद कर दिया।
उसने कहा- क्या था ये?
मैंने कहा- तुम्हारे मतलब की चीज नहीं है !
उसने कहा- दिखाओ तो सही !
मैंने कहा- तुम बुरा तो नहीं मानोगी?
उसने कहा- नहीं मानूंगी !
फ़िर मैंने वो फोटो खोल दी। वो उसे देख कर शरमा गई और नज़रे नीचे झुका ली।
फ़िर मैंने पूछा- तुम ऐसी फोटो पसंद करती हो क्या?
उसने कहा- नहीं !
फ़िर मैंने कहा- और देखना चाहती हो?
तो उसने शरमाते हुए कहा- तुम्हारी मर्जी !
मैं समझ गया कि अब वो तैयार है। मैंने उसे और फोटो दिखाई फ़िर मैंने उसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- कभी नहीं !
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- साक्षी ! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !
तो वो बोली- मैं भी !
तब मैंने झट से उसके गोरे गोरे गाल को चूम लिया। वो कितना शानदार पल था। हम दोनों बिल्कुल चिपके हुए थे।
फ़िर हमारा समय समाप्त हो गया। हम घर के लिए निकल पड़े। मैंने उसे कहा कि कल मेरे घर पर आ जाना।
उसने कहा- ठीक है!
अगले दिन वो हमारे घर पर आ गई। घर पर कोई नहीं था, सब शादी में गए हुए थे। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और चूमने लगा। मैंने उसके बदन को ऊपर से नीचे तक चूमा। उसने जीन्स और टोप पहना हुआ था।
हम दोनों गर्म हो चुके थे। मैंने उसकी जीन्स और टोप उतार दिए, अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में एकदम कयामत लग रही थी।
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर चूचियों को चूसना शुरू किया तो चूसता ही रहा।
फ़िर उसने कहा- जल्दी करो ! अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा !
तो मैंने ज्यादा समय खराब ना करते हुए उसकी पैन्टी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और बहुत ही चिकनी थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर टिकाया और अन्दर घुसाने लगा तो मेरा लण्ड अन्दर जा ही नहीं रहा था क्योंकि उसकी चूत बहुत ही तंग थी। मैंने थोड़ा सा तेल उसकी चूत पर लगाया और एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे लगा कर फ़िर से अपना लण्ड घुसाने लगा तो एक झटके में ही मेरा आधा लण्ड कविता की चूत में घुस गया और वो दर्द से चिल्ला पड़ी।
मैंने अपने होंठों से उसका मुँह बन्द करने की कोशिश की तो वो रो पड़ी और रोते रोते बोली- बहुत दर्द हो रहा है !
फ़िर मैं झटके मारने लगा तो उसको भी मज़ा आने लगा और उसके मुँह से सीऽऽ ओऽऽ ईऽ उईऽ आऽऽ की आवाज़ें आने लगी। वो सिसकारियाँ भरने लगी।
दस मिनट के बाद मेरा निकल गया और वो भी झड़ चुकी थी।
थोड़ी देर बाद हमने एक बार और मज़ा लिया। इस बार उसे ज्यादा मज़ा आया।
फ़िर कपड़े पहन कर साक्षी अपने घर चली गई।
अब हमें जब भी मौका मिलता है हम काम-क्रीड़ा का आनन्द लेते हैं।
मुझे आशा है कि आपको मेरी कहानी पसन्द आई होगी।
मुझे मेल करें :
vikas_ak1kumar@yahoo.co.in
sexygirl4uonly16@gmail.com
हमारे पड़ोस में साक्षी नाम की एक लड़की रहती है। मैं उसे बचपन से जानता हूँ पर अब वो जवान हो गई है, उसकी फ़ीगर ३२ २८ ३० है। वो मुझे बहुत ही सेक्सी लगती है। मैं उसे बहुत पसन्द करता हूँ। वो अक्सर हमारे घर आती रहती है पर मेरी कभी उससे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई।
एक दिन उसकी मम्मी हमारे घर पर आई और उसने मुझे कहा कि साक्षी को इंटरनेट पर साइंस का प्रोजेक्ट निकालना है। वो मेरे पास इस लिए आई थी क्योंकि मैं कंप्यूटर हार्डवेयर नेट्वर्किंग का काम करता हूँ। मैं अन्दर से खुश हो गया।
लेकिन मैंने ना जाने का बहाना बनाया। उसने कहा उसे बहुत जरुरी प्रोजेक्ट बनाना है। मैंने कहा- ठीक है।
फ़िर मैंने उसे अपनी बाइक पर बिठाया और हम दोनों साइबर कैफे चले गए। हमने वहां प्राइवेट केबिन लिया, जैसे ही हम केबिन में गए तो देखा कि केबिन में एक ही कुर्सी थी, मैंने कैफे वाले से कहा तो उसने मना कर दिया क्योंकि उस दिन रविवार था और कैफे में बहुत भीड़ थी।
जब मैंने साक्षी को कहा तो उसने कहा कोई बात नहीं हम एडजस्ट कर लेते हैं।
हम केबिन में गए और मैंने केबिन का दरवाजा बंद कर दिया। केबिन की कुर्सी छोटी थी जिससे हम दोनों चिपक कर बैठ गए। उस दिन साक्षी ने सफ़ेद सुइट -सलवार पहनी थी। मेरी टांग उसकी टांग से चिपकी हुई थी, जिस से मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया।
उस दिन शायद मेरी किस्मत अच्छी थी जिससे उसकी प्रोजेक्ट वाली साईट खुल नहीं रही थी। कुछ देर बाद उसने कहा कि प्रोजेक्ट साईट तो खुल नहीं रही चलो चलते हैं।
लेकिन मैंने कहा कि मैं तब तक अपनी आइ.डी चेक कर लेता हूँ, तो वो मान गई।
जैसे ही मैंने कीबोर्ड पर लिखना शुरू किया तो मेरा हाथ साक्षी के बूब्स पर लग गया। उसके बूब्स एक दम कड़क थे। फिर मैंने आपनी साईट खोली तो उसमे सेक्सी पिक्चर आई हुई थी। जैसे ही वो खुली तो मैंने उन्हें झट से बंद कर दिया।
उसने कहा- क्या था ये?
मैंने कहा- तुम्हारे मतलब की चीज नहीं है !
उसने कहा- दिखाओ तो सही !
मैंने कहा- तुम बुरा तो नहीं मानोगी?
उसने कहा- नहीं मानूंगी !
फ़िर मैंने वो फोटो खोल दी। वो उसे देख कर शरमा गई और नज़रे नीचे झुका ली।
फ़िर मैंने पूछा- तुम ऐसी फोटो पसंद करती हो क्या?
उसने कहा- नहीं !
फ़िर मैंने कहा- और देखना चाहती हो?
तो उसने शरमाते हुए कहा- तुम्हारी मर्जी !
मैं समझ गया कि अब वो तैयार है। मैंने उसे और फोटो दिखाई फ़िर मैंने उसे पूछा कि तुमने कभी सेक्स किया है?
उसने कहा- कभी नहीं !
मैंने उसका हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- साक्षी ! मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !
तो वो बोली- मैं भी !
तब मैंने झट से उसके गोरे गोरे गाल को चूम लिया। वो कितना शानदार पल था। हम दोनों बिल्कुल चिपके हुए थे।
फ़िर हमारा समय समाप्त हो गया। हम घर के लिए निकल पड़े। मैंने उसे कहा कि कल मेरे घर पर आ जाना।
उसने कहा- ठीक है!
अगले दिन वो हमारे घर पर आ गई। घर पर कोई नहीं था, सब शादी में गए हुए थे। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और चूमने लगा। मैंने उसके बदन को ऊपर से नीचे तक चूमा। उसने जीन्स और टोप पहना हुआ था।
हम दोनों गर्म हो चुके थे। मैंने उसकी जीन्स और टोप उतार दिए, अब वो सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी में एकदम कयामत लग रही थी।
मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर चूचियों को चूसना शुरू किया तो चूसता ही रहा।
फ़िर उसने कहा- जल्दी करो ! अब कन्ट्रोल नहीं हो रहा !
तो मैंने ज्यादा समय खराब ना करते हुए उसकी पैन्टी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे और बहुत ही चिकनी थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर टिकाया और अन्दर घुसाने लगा तो मेरा लण्ड अन्दर जा ही नहीं रहा था क्योंकि उसकी चूत बहुत ही तंग थी। मैंने थोड़ा सा तेल उसकी चूत पर लगाया और एक तकिया उसकी गाण्ड के नीचे लगा कर फ़िर से अपना लण्ड घुसाने लगा तो एक झटके में ही मेरा आधा लण्ड कविता की चूत में घुस गया और वो दर्द से चिल्ला पड़ी।
मैंने अपने होंठों से उसका मुँह बन्द करने की कोशिश की तो वो रो पड़ी और रोते रोते बोली- बहुत दर्द हो रहा है !
फ़िर मैं झटके मारने लगा तो उसको भी मज़ा आने लगा और उसके मुँह से सीऽऽ ओऽऽ ईऽ उईऽ आऽऽ की आवाज़ें आने लगी। वो सिसकारियाँ भरने लगी।
दस मिनट के बाद मेरा निकल गया और वो भी झड़ चुकी थी।
थोड़ी देर बाद हमने एक बार और मज़ा लिया। इस बार उसे ज्यादा मज़ा आया।
फ़िर कपड़े पहन कर साक्षी अपने घर चली गई।
अब हमें जब भी मौका मिलता है हम काम-क्रीड़ा का आनन्द लेते हैं।
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खेत में चुदाई का खेल
शहर में तीन साल की पढ़ाई के बाद मैं बिल्कुल ही बदल चुका था, लेकिन मेरे पड़ोसी हरखू काका की बेटी रनिया मुझे पहले जैसा लल्लू ही समझती थी। मैंने इंटर तक पढ़ाई गांव में ही की थी। तब तक खेती और पढ़ाई के अतिरिक्त दुनियादारी को मुझे कोई समझ नहीं थी। गांव के सिवान पर हमारे और रनिया के खेत थे। मैं स्कूल से वापस आने के बाद सीधे खेत में चला जाता। वह भी स्कूल से आकर अपनी बकरियां लेकर वहीं आ जाती। मेरे पहुंचने पर हरखू काका गांजा पीने के लिए चले जाते।
जब मैंने बारहवीं के बाद गांव छोड़ा तो वह सातवीं में थी। मैंने जब बी ए पास किया तो वह दसवीं में आ गयी। उसकी नीबू के आकार की चूचियां सेब के आकार में बदल गयीं। होस्टल के जीवन ने मेरी काया ही पलट दी थी। मुट्ठ मारना मैंने वहीं आकर सीखा। उस समय मेरे सामने रनिया का ही चेहरा होता। मैं उसी की चुदाई की कल्पना करके मुट्ठी मारता। मुट्ठी मारते मारते मेरा लन्ड थोड़ा टेढ़ा भी हो गया था। सुपाड़े की चमड़ी खुल गयी थी। कभी कभी तो हम तीन लड़के एक साथ ही मुट्ठी मारते।
हर बार मुट्ठी मारते मैं यही सोचता कि बस यह अन्तिम बार है, अब जाकर साक्षात ही उसे चोदूंगा। वह मेरे सामने ही जवान हो रही थी, लेकिन अवसर ही नहीं मिला। पहले साल के बाद मैं जब दूसरे साल मैं यह सब जान सका तो वह गरमियों की छुट्टियों में अपने ननिहाल चली गई। उसके बाद बीच में ऐसा अवसर ही नहीं मिला कि मैं कोशिश करुं।
फाइनल की परीक्षा के बाद दैवयोग से वह अवसर मिल गया। मैं जानता तो नहीं था कि उसके मन में क्या है लेकिन एक दिन बाबू जब मुकदमें के सिलसिले में बाहर चले गये तो मैं दोपहर का खाना खाने के बाद खेत में चला गया। वहां मेरे ट्यूबवेल के पास आम का घना पेड़ था।
मैंने माई से कहा कि मैं जाकर वहीं कुछ पढ़ूंगा और सो जाऊंगा।
मेरे ट्यूबवेल से हरखू काका अपने गन्ने में पानी लगा रहे थे। चिलचिलाती दुपहरिया थी। उनका खेत निकट ही था। वह पानी खोलकर वही मेरे ट्यूबवेल के घर में रखी खटोली पर लेटे थे। मुझे देखकर उठ गये। बातें करने लगे। पता चला कि रनिया अब खाना लेकर आती ही होगी।
यह सुनकर न जाने मेरा मन क्यों खिल उठा। मेरी छठी इंद्री ने कहा अभी हरखू काका खाना खाकर गांजा पीने जायेंगे। आज बिना चोदे छोड़ूंगा नहीं!
मेरा सोचा सही हुआ। पानी का काम बस दो-तीन घंटे में पूरा होने वाला था। वह रनिया को पानी देखने के लिए कहकर मुझसे बोले कि काम होने के बाद पंप बन्द कर दूं तब यह चली जायेगी, मुझे देर हो जायेगी।
रनिया खेत का एक चक्कर लगाकर आकर वहीं भूमि पर बिछे एक बोरे पर बैठ गई।
मैंने उसे गौर से देखा। उसने छींट की सलवार और कुरती पहने थी। उसकी चूंचियां सेब से भी बड़ी थीं। नीचे केवल शमीज थी, ब्रा नहीं। इसलिए उनका पूरा आकार मेरी आंखों में था। शरीर भरा था।
वह चुप ही बैठी थी। मैंने बात आरम्भ की, " तुम काफी बड़ी हो गयी हो। "
वह चुप ही रही। मैंने फिर कहा, " खूबसूरत हो गयी हो। "
" हट " वह बोली।
" भगवान कसम!" मैंने कहा।
उसने कोई उत्तर नहीं दिया तो मेरी समझ में नहीं आया कि क्या कहूं। थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद मैंने कहा, " आओ चारपाई पर बैठ जाओ। क्यों जमीन पर बैठी हो? "
" यहीं ठीक है। " उसने कहा।
मैंने चारों तरफ देखा, सन्नाटा था। सूरज बिल्कुल सिर के ऊपर आ गया था। गांव की तरफ गन्ने के खेत थे। पेड़ की आड़ भी थी। मैं हिम्मत सजोकर उठा और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा, आओ पास बैठो। अच्छा नहीं लग रहा है।"
उसने विरोध किया तो मैंने और जोर लगाया। वह खड़ी हो गयी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा तो वह चारपाई पर गिरते-गिरते बैठ गयी। संम्भवतः उसे मेरी नीयत का आभास हो गया था। उसकी सांसे लम्बी हो गयीं।
मै एक बार फिर इधर उधर देखकर उससे सट कर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया।
रनिया बोली, " लल्लू भैया छोड़ो, अभी कोई देखेगा तो क्या कहेगा? "
उसका यह कहना था, मैं तो निश्चिन्त हो गया। उसे अपनी भुजाओं में कसकर जकड़ लिया और कहा," आज मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं। मेरी नीयत बहुत दिनों से तुम्हारे ऊपर है। " फिर मैं उसकी दाहिनी चूची को शमीज के ऊपर से पकड़कर मलने लगा।
वह घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी, " छोड़ दो! छोड़ दो! "
मैंने उसकी आवाज को बन्द करने के लिए उसके मुंह पर अपना मुंह लगाकर पहले होंठ को किस किया फिर मुँह में जीभ डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा।
वह अभी भी छुड़ाने का हल्का सा प्रयास कर रही थी, लेकिन वह शक्ति नहीं थी जो छुड़ाने के लिए होनी चाहिए थी।
थोड़ी देर उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसके मुंह से अपना मुंह हटाकर फिर उसकी चूचियों पर आ गया। इस बार उसकी कुरती को शमीज के साथ ऊपर करके दोनों चूचियों को नंगा कर दिया। उसके चूचियों की ढेंपी कड़ी हो गयी थी।
एक चूची को मलते हुए दूसरी पर जब मुंह लगाया तो वह अहक कर बोली, " चलों किसी खेत में "
" इसका मतलब है कि तुम पहले ही करवा चुकी हो? "
" भगवान कसम नहीं ! "
" तब तुमने कैसे कहा कि चलो खेत में? "
" यहां कोई देख लेगा तो जान मार देगा "
कोई नहीं देखेगा, कहकर मैंने एक हाथ से उसकी चूची को मसलते हुए दूसरे को अपने लन्ड पर रख दिया। लुंगी के नीचे जांघिया में मेरा लंड खड़ा हो गया था।
उसने हाथ हटा लिया।
मैंने फिर खींचकर हाथ रक्खा और कहा, "सहलाओ न मजा आयेगा। यह तो जान ही लो कि आज बिना चोदे छोड़ने वाला नहीं।"
" अभी तो! "कहकर उसने मेरा लंड पकड़ लिया।
मीजते हुए मैंने देखा कि उसकी चुचियां फूलने लगीं। वह अकड़ने भी लगी थी।
उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर सलवार का नाड़ा खोलकर देखा तो उसकी चूत झांटों से भरी थी।
मैंनें कहा, " इसे साफ नहीं करती? "
वह बोली, " मुझे डर लगता हैं। बालसफा साबुन भी तो कौन लाये। यहां गांव में औरतें गरम राख से बनाती हैं। "
मैंने देखा कि अब उसकी चूत पूरी तरह पनिया गयी है इधर मेरे बाबू जी अब काबू से बाहर हो रहे थे। वह मस्ती में बेसुध होने लगी तो मैंने कहा चलो ट्यूबेल वाले कमरे में।
वह उठकर सलवार पकड़े इधर उधर देखते अन्दर चली गयी। मैं भी गया और अपनी जांघिया निकालकर उसकी जांघों से एक मोहरी निकालकर उसकी टांगे चीरकर लंड को उसकी पनियाई बुर के मुहाने पर रखकर उसकी दोनों टांगों को फैलाकर उसके ऊपर छा गया। कसते ही सट से लंड उसके अन्दर चला गया।
उसने कहा, " आह! "
फिर मैं घपाघप धक्के मारने लगा। उसने मेरी पीठ को ऊपर से कस लिया और नोचने लगी।
मैंने चोदते हुए उससे पूछा, " रनिया तूने किसी और से तो नहीं चुदवाया क्योंकि तू तो मजे ले रही है।"
वह बोली, "तुम्हारी कसम नहीं। दर्द वाली बात झूठी होती है। मैं सायकिल चलाती हूं एक दिन मेरी झिल्ली फट गयी। अब गांव में भी लड़कियां मूठ मारती हैं।"
बातें करने में मेरा ध्यान बंट गया। तो थोड़ा समय और लग गया। मैं कमर चलाता रहा। वह नीचे से अपनी कमर हिलाती रही। मैं एकाएक फड़फड़ाकर झड़ गया और उसे छाप लिया। झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था। उसकी बुर की पुत्ती फूल गयी थी। मेरा बीज उसकी बुर से होता हुआ जांघों तक फैला था। मैंने अपने जांघिये से उसे साफ किया।
वह उठी और सलवार बांधकर धीरे से कमरे से बाहर चली आयी थोड़ी देर बाद मैं भी निकल आया।
फिर तो मैं सारी छुट्टी उसे पत्नी की तरह चोदता रहा। हम दोनों ही प्रयत्न करते कि खेत में कोई काम रहे।
हरखू काका की उपस्थिति में ही हम लोग चुदाई पेलाई की बात करते रहते। वह सारे गांव की कहानी बताती।
उसने अपनी एक सहेली की और बुर भी दिलावाई। उसकी कहानी फिर कभी।
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जब मैंने बारहवीं के बाद गांव छोड़ा तो वह सातवीं में थी। मैंने जब बी ए पास किया तो वह दसवीं में आ गयी। उसकी नीबू के आकार की चूचियां सेब के आकार में बदल गयीं। होस्टल के जीवन ने मेरी काया ही पलट दी थी। मुट्ठ मारना मैंने वहीं आकर सीखा। उस समय मेरे सामने रनिया का ही चेहरा होता। मैं उसी की चुदाई की कल्पना करके मुट्ठी मारता। मुट्ठी मारते मारते मेरा लन्ड थोड़ा टेढ़ा भी हो गया था। सुपाड़े की चमड़ी खुल गयी थी। कभी कभी तो हम तीन लड़के एक साथ ही मुट्ठी मारते।
हर बार मुट्ठी मारते मैं यही सोचता कि बस यह अन्तिम बार है, अब जाकर साक्षात ही उसे चोदूंगा। वह मेरे सामने ही जवान हो रही थी, लेकिन अवसर ही नहीं मिला। पहले साल के बाद मैं जब दूसरे साल मैं यह सब जान सका तो वह गरमियों की छुट्टियों में अपने ननिहाल चली गई। उसके बाद बीच में ऐसा अवसर ही नहीं मिला कि मैं कोशिश करुं।
फाइनल की परीक्षा के बाद दैवयोग से वह अवसर मिल गया। मैं जानता तो नहीं था कि उसके मन में क्या है लेकिन एक दिन बाबू जब मुकदमें के सिलसिले में बाहर चले गये तो मैं दोपहर का खाना खाने के बाद खेत में चला गया। वहां मेरे ट्यूबवेल के पास आम का घना पेड़ था।
मैंने माई से कहा कि मैं जाकर वहीं कुछ पढ़ूंगा और सो जाऊंगा।
मेरे ट्यूबवेल से हरखू काका अपने गन्ने में पानी लगा रहे थे। चिलचिलाती दुपहरिया थी। उनका खेत निकट ही था। वह पानी खोलकर वही मेरे ट्यूबवेल के घर में रखी खटोली पर लेटे थे। मुझे देखकर उठ गये। बातें करने लगे। पता चला कि रनिया अब खाना लेकर आती ही होगी।
यह सुनकर न जाने मेरा मन क्यों खिल उठा। मेरी छठी इंद्री ने कहा अभी हरखू काका खाना खाकर गांजा पीने जायेंगे। आज बिना चोदे छोड़ूंगा नहीं!
मेरा सोचा सही हुआ। पानी का काम बस दो-तीन घंटे में पूरा होने वाला था। वह रनिया को पानी देखने के लिए कहकर मुझसे बोले कि काम होने के बाद पंप बन्द कर दूं तब यह चली जायेगी, मुझे देर हो जायेगी।
रनिया खेत का एक चक्कर लगाकर आकर वहीं भूमि पर बिछे एक बोरे पर बैठ गई।
मैंने उसे गौर से देखा। उसने छींट की सलवार और कुरती पहने थी। उसकी चूंचियां सेब से भी बड़ी थीं। नीचे केवल शमीज थी, ब्रा नहीं। इसलिए उनका पूरा आकार मेरी आंखों में था। शरीर भरा था।
वह चुप ही बैठी थी। मैंने बात आरम्भ की, " तुम काफी बड़ी हो गयी हो। "
वह चुप ही रही। मैंने फिर कहा, " खूबसूरत हो गयी हो। "
" हट " वह बोली।
" भगवान कसम!" मैंने कहा।
उसने कोई उत्तर नहीं दिया तो मेरी समझ में नहीं आया कि क्या कहूं। थोड़ी देर तक चुप रहने के बाद मैंने कहा, " आओ चारपाई पर बैठ जाओ। क्यों जमीन पर बैठी हो? "
" यहीं ठीक है। " उसने कहा।
मैंने चारों तरफ देखा, सन्नाटा था। सूरज बिल्कुल सिर के ऊपर आ गया था। गांव की तरफ गन्ने के खेत थे। पेड़ की आड़ भी थी। मैं हिम्मत सजोकर उठा और उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा, आओ पास बैठो। अच्छा नहीं लग रहा है।"
उसने विरोध किया तो मैंने और जोर लगाया। वह खड़ी हो गयी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा तो वह चारपाई पर गिरते-गिरते बैठ गयी। संम्भवतः उसे मेरी नीयत का आभास हो गया था। उसकी सांसे लम्बी हो गयीं।
मै एक बार फिर इधर उधर देखकर उससे सट कर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया।
रनिया बोली, " लल्लू भैया छोड़ो, अभी कोई देखेगा तो क्या कहेगा? "
उसका यह कहना था, मैं तो निश्चिन्त हो गया। उसे अपनी भुजाओं में कसकर जकड़ लिया और कहा," आज मैं तुम्हें छोड़ूंगा नहीं। मेरी नीयत बहुत दिनों से तुम्हारे ऊपर है। " फिर मैं उसकी दाहिनी चूची को शमीज के ऊपर से पकड़कर मलने लगा।
वह घोड़ी की तरह हिनहिनाने लगी, " छोड़ दो! छोड़ दो! "
मैंने उसकी आवाज को बन्द करने के लिए उसके मुंह पर अपना मुंह लगाकर पहले होंठ को किस किया फिर मुँह में जीभ डालकर उसकी जीभ को चूसने लगा।
वह अभी भी छुड़ाने का हल्का सा प्रयास कर रही थी, लेकिन वह शक्ति नहीं थी जो छुड़ाने के लिए होनी चाहिए थी।
थोड़ी देर उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसके मुंह से अपना मुंह हटाकर फिर उसकी चूचियों पर आ गया। इस बार उसकी कुरती को शमीज के साथ ऊपर करके दोनों चूचियों को नंगा कर दिया। उसके चूचियों की ढेंपी कड़ी हो गयी थी।
एक चूची को मलते हुए दूसरी पर जब मुंह लगाया तो वह अहक कर बोली, " चलों किसी खेत में "
" इसका मतलब है कि तुम पहले ही करवा चुकी हो? "
" भगवान कसम नहीं ! "
" तब तुमने कैसे कहा कि चलो खेत में? "
" यहां कोई देख लेगा तो जान मार देगा "
कोई नहीं देखेगा, कहकर मैंने एक हाथ से उसकी चूची को मसलते हुए दूसरे को अपने लन्ड पर रख दिया। लुंगी के नीचे जांघिया में मेरा लंड खड़ा हो गया था।
उसने हाथ हटा लिया।
मैंने फिर खींचकर हाथ रक्खा और कहा, "सहलाओ न मजा आयेगा। यह तो जान ही लो कि आज बिना चोदे छोड़ने वाला नहीं।"
" अभी तो! "कहकर उसने मेरा लंड पकड़ लिया।
मीजते हुए मैंने देखा कि उसकी चुचियां फूलने लगीं। वह अकड़ने भी लगी थी।
उसे वहीं चारपाई पर लिटाकर सलवार का नाड़ा खोलकर देखा तो उसकी चूत झांटों से भरी थी।
मैंनें कहा, " इसे साफ नहीं करती? "
वह बोली, " मुझे डर लगता हैं। बालसफा साबुन भी तो कौन लाये। यहां गांव में औरतें गरम राख से बनाती हैं। "
मैंने देखा कि अब उसकी चूत पूरी तरह पनिया गयी है इधर मेरे बाबू जी अब काबू से बाहर हो रहे थे। वह मस्ती में बेसुध होने लगी तो मैंने कहा चलो ट्यूबेल वाले कमरे में।
वह उठकर सलवार पकड़े इधर उधर देखते अन्दर चली गयी। मैं भी गया और अपनी जांघिया निकालकर उसकी जांघों से एक मोहरी निकालकर उसकी टांगे चीरकर लंड को उसकी पनियाई बुर के मुहाने पर रखकर उसकी दोनों टांगों को फैलाकर उसके ऊपर छा गया। कसते ही सट से लंड उसके अन्दर चला गया।
उसने कहा, " आह! "
फिर मैं घपाघप धक्के मारने लगा। उसने मेरी पीठ को ऊपर से कस लिया और नोचने लगी।
मैंने चोदते हुए उससे पूछा, " रनिया तूने किसी और से तो नहीं चुदवाया क्योंकि तू तो मजे ले रही है।"
वह बोली, "तुम्हारी कसम नहीं। दर्द वाली बात झूठी होती है। मैं सायकिल चलाती हूं एक दिन मेरी झिल्ली फट गयी। अब गांव में भी लड़कियां मूठ मारती हैं।"
बातें करने में मेरा ध्यान बंट गया। तो थोड़ा समय और लग गया। मैं कमर चलाता रहा। वह नीचे से अपनी कमर हिलाती रही। मैं एकाएक फड़फड़ाकर झड़ गया और उसे छाप लिया। झड़ने के बाद भी मेरा लंड खड़ा था। उसकी बुर की पुत्ती फूल गयी थी। मेरा बीज उसकी बुर से होता हुआ जांघों तक फैला था। मैंने अपने जांघिये से उसे साफ किया।
वह उठी और सलवार बांधकर धीरे से कमरे से बाहर चली आयी थोड़ी देर बाद मैं भी निकल आया।
फिर तो मैं सारी छुट्टी उसे पत्नी की तरह चोदता रहा। हम दोनों ही प्रयत्न करते कि खेत में कोई काम रहे।
हरखू काका की उपस्थिति में ही हम लोग चुदाई पेलाई की बात करते रहते। वह सारे गांव की कहानी बताती।
उसने अपनी एक सहेली की और बुर भी दिलावाई। उसकी कहानी फिर कभी।
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